VIDEO : आबादी क्षेत्रों में अब टलेगा वन्यजीवों का खतरा, विभाग ने शुरू की ये कवायद, जानिए पूरी खबर...

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By: Suresh Hemnani

Published: 04 Apr 2019, 01:31 PM IST

Pali, Pali, Rajasthan, India

- प्यास बुझाने पहुंच रहे वन्यजीव
- बुद्धपूर्णिमा पर वन्यजीव गणना के दौरान बेहतर परिणाम मिलने के संकेत

सादड़ी। भोजन व पानी की तलाश में आबादी क्षेत्रों में वन्यजीवों की चहल-कदमी और अन्यत्र क्षेत्र में पलायन रोकने की कवायद में वन विभाग ने कुम्भलगढ़ अभयारण्य की सादड़ी व देसूरी रेन्ज के अधिनस्थ खाली पड़े कृत्रिम वाटर हॉल्स में पानी भरवाने का कार्य शुरू करवा दिया है। वॉटर हॉल्स पर वन्यजीवों की आवाजाही भी बढ़ गई। चैत्र की शुरूआत से वाटर हॉल्स भरवाने के सार्थक परिणाम आगामी वैशाख माह की बुद्ध पूर्णिमा को होने वाली वन्यजीव गणना 2019 में देखने को मिलेंगे। विभाग सहायक वनसंरक्षक यादवेन्द्रसिंह चूण्डावत ने वन कार्मिकों को निष्ठा से कार्य करने के दिशा निर्देश दिए हैं।

सादड़ी रेन्ज के क्षेत्रीय वनअधिकारी किशनसिंह राणावत ने बताया कि अरावली पर्वतमाला व वन क्षेत्र में विगत वर्ष में न्यूनतम से कम बारिश होने पर कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य सादड़ी व देसूरी रेन्ज में कई कृत्रिम-प्राकृतिक पेयजल स्रोत खाली रह गए। कुछ में आंशिक जलआवक हुई जो इनदिनों बढ़ती गर्मी के साथ खाली होने की कगार पर है। पेयजल के अभाव से वन्यजीवों की चहलकदमी अभयारण्य की सरहद स्थित आबादी क्षेत्रों व अन्यत्र क्षेत्र में पलायन नहीं बढ़ जाए इसको लेकर विभाग ने सादड़ी रेन्ज के चिह्नित 14 जलस्त्रोत भरवाने के लिए 97 हजार रुपए व देसूरी रेन्ज में 19 कृत्रिम प्राकृतिक जलस्रोत भरवाने को 2 लाख 77 हजार रुपए का बजट पूर्व में विभाग के मार्फत सरकार से मांग लिया गया।

विभाग ने अभी अपने संसाधन से मांग अनुरूप खाली पेयजल स्रोत भरवाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया है। इन सभी पेयजलस्त्रोत पर सुबह शाम वन्यजीवों की चहलकदमी भी बढ़ गई है। सादड़ी में तीर्थंकर नेचर ट्रेल, खारड़ा माताजी, पगपावटा, मोडिय़ामगरी, खेजडीवेरी रेम्पवेल, पावटी, भंवरवल्डा, शक्तिमाता मन्दिर, मामाजी का खादरा, भीलावेरा सेवाड़ी, खेड़ा वेरा जैसे कई जलस्रोत भरवाए जा रहे हैं। वन क्षेत्र में जल भण्डारण को लेकर विभाग से ऐसे कई गजलर, स्टोरेज टैंक बनाए हैं, जिनमें बारिश के दौरान स्वत: जल एकत्र होकर वाटर हॉल्स के खाली होने तक एक निर्धारित लेवल तक पानी भरने पर स्वत: जलआवक बन्द हो जाती है। जिससे व्यर्थ जल अपव्यय नहीं हो पाए।

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