VIDEO : आपसी सौहार्द से 15 साल से पाली की धरा पर साकार हो रही बंगाल की संस्कृति

Suresh Hemnani

Publish: Oct, 13 2018 10:15:36 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 10:17:15 PM (IST)

Pali, Rajasthan, India

पाली। पाली की धरा पर पिछले 15 वर्षों से दुर्गा पूजा के जरिए बंगाल की संस्कृति साकार हो रही है। जो अपने आप में साम्प्रदायिक सौहार्द का बेहतर उदाहरण है। इसको मूर्त रूप देने में हिन्दू-मुस्लिम सहित कई समाजों के लोग जुटे रहते है। इस बार भी पाली में 15 से 19 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन होगा।
पाली में दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत होने की भी एक रोचक कहानी है। काम-काज के सिलसिले में पाली शहर में 150 से अधिक बंगाली परिवार रहते हैं, जो मजदूरी सहित सोने-चांदी के आभूषण बनाने का काम करते है। बंगाल में दुर्गा पूजा महोत्सव का काफी महत्व है। पाली में रहने वाले कई बंगाली परिवार दुर्गा पूजा महोत्सव में भाग लेने बंगाल जाते है। लेकिन अधिकतर बंगाली लोग छुट्टियां न मिलने एवं आने-जाने में समय व धन खर्च होने के चलते दुर्गा पूजा महोत्सव में बंगाल नहीं जा पाते थे। वर्ष 2003 की बात है।

पाली में रहने वाले बंगाली युवक रोबिन रॉय के मन में विचार आया कि पाली में भी दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत की जाए। विचार को उन्होंने अपने मित्र ओम वैष्णव, जीवराज बोराणा, ए.एस. पाठक, गोपाल कुमावत व दूलाल मंडल के समक्ष रखा। सभी दुर्गा पूजा महोत्सव आयोजन को लेकर राजी हो गए। आयोजन के लिए रुपए बंगाली समाज के लोगों ने रुपए एकत्रित किए लेकिन वह काफी कम थे। ऐसे में उन्होंने शहर के प्रकाशचंद गुंदेचा व राजेश बोहरा से संर्पक किया। इनके संबल व आर्थिक सहयोग से वर्ष 2003 में पहली बार दुर्गा पूजा महोत्सव सूरजपोल के निकट गोलेच्छा ग्राउंड में हुआ था। पहला आयोजन सफल रहा। ग्राउंड छोटा पडऩे लगा तो बाद में रेलवे स्टेशन के निकट पेच बिल्डिंग मैदान में इसका आयोजन करना शुरू किया और पिछले दो-तीन वर्षों से लाखोटिया उद्यान के निकट बने रंगमंच पर इसका आयोजन किया जा रहा है।

सहयोग के लिए हर कोई आया आगे
समिति संयोजक ओम वैष्णव ने बताया कि पांच दिन तक चलने वाले दुर्गा पूजा महोत्सव के प्रथम आयोजन में खर्चा करीब डेढ़ लाख रुपए आया था। उसके बाद इस आयोजन में भागीदारी निभाने वालों की सं या भी बढऩे लगी तो इसकी भव्यता भी बढ़ी। वर्तमान में इसके आयोजन पर सात-आठ लाख रुपए का खर्चा आ रहा है। प्रकाशचंद गुंदेचा व राजेश बोहरा का आज भी समिति को आर्थिक सहयोग मिल रहा है।

कई कलाकारों को मिला मंच
महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होता है। जिसमें भजनों सहित मारवाड़ी गीतों पर कलाकार नृत्य की प्रस्तुति देते है। इस मंच पर इंडियन आइडल, भारत संगीत एकडेमी, राजस्थान संगीत एकेडमी के कई कलाकार अपनी प्रस्तुति दे चुके है।

पूजन सामग्री से लेकर पंडित तक बंगाल के
पूजन सामग्री से लेकर पंडित व प्रतिमा बनाने वाले कारीगर तक बंगाल से आते है। महोत्सव के पहले दिन महापष्ठी पूजा एवं पुष्पाजंली, संध्या आरती का आयोजन होता है। दूसरे दिन नवपत्रिका प्रवेश स्थापना, महासप्तमी पूजा, पुष्पांजलि, संध्या आरती, महोत्सव के तीसरे दिन संधि पूजा, बलिदान तथा चौथे दिन महानवमी पूजा, कुमारी पूजा व खिचड़ी भोग का आयोजन होता है। अंतिम दिन विजया दशमी, अपराजिता पूजा, सिंदूर खेल, मां की प्रतिमा का विसर्जन कार्यक्रम होता है। मां की प्रतिमा भी गंगा नदी की मिट्टी से बनाई जाती है, जो पर्यावरण के अनुकूल है।

सहयोग से सपना हुआ साकार
दुर्गा पूजा महोत्सव का मेरा सपना पालीवासियों के सहयोग से ही पूरा हुआ है। शहर में ज्यादा बंगाली परिवार हैं नहीं। ऐसे में स्थानीय लोगों के सहयोग से ही महोत्सव का आयोजन हो रहा है। पिछले 15 वर्षों में एक बार भी समिति का अध्यक्ष नहीं बदला गया और न ही किसी तरह का विवाद हुआ। -रोबिन रॉय, सचिव, सार्वजनिक मां दुर्गा पूजा उत्सव समिति, पाली

साम्प्रदायिक सौहार्द का बेहतर उदाहरण
समिति में विभिन्न समाज व धर्म के लोग भी है। आपसी सौहार्द व भाईचारे के साथ इस कार्यक्रम का पिछले 15 वर्षों से आयोजन हो रहा है। इसमें सभी धर्मों के लोगों का भी आर्थिक सहयोग रहता है। -सोमेन्द्र सिन्हा, अध्यक्ष सार्वजनिक मां दुर्गा पूजा उत्सव समिति, पाली

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