VIDEO : पश्चिम राजस्थान की नदियों की बदहाली पर एनजीटी का फरमान, पाली के प्रदूषण मामले पर क्या कहा, पढ़ें पूरी खबर

Suresh Hemnani

Publish: May, 11 2019 01:51:01 PM (IST)

Pali, Pali, Rajasthan, India

पाली/जोधपुर। industrial pollution से बर्बाद हो रही पश्चिम राजस्थान की जोजरी, Bandi and Luni river की दशा से चिंतित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने Chief Secretary को राज्य की सभी शुष्क नदियों की स्थिति की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इनमें ठोस और तरल प्रदूषक तत्वों को प्रवाहित नहीं किया जाए।

एनजीटी ने पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन कर रही औद्योगिक इकाइयों का आपराधिक दायित्व तय करने के संकेत देते हुए 17 मई को राज्य के Director General of police को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। पुलिस मुखिया को ऐसी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का प्रस्ताव साथ में लाने को कहा गया है।
एनजीटी के न्यायिक सदस्य रघुवेन्द्र एस राठौड़ और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सत्यवान सिंह की खंडपीठ ने जोधपुर में टेक्सटाइल और स्टील री रोलिंग इकाइयों सहित सीवरेज से हो रहे प्रदूषण पर सख्ती दिखाते हुए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन करने को भी कहा है। खंडपीठ ने कहा कि प्रदूषण के कारण जल संसाधनों को नुकसान पहुंचा है और इसका स्वास्थ्य और कृषि पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। परफॉरमेंस गारंटी और environment क्षतिपूर्ति लगाने की जरूरत बताते हुए खंडपीठ ने राज्य के पर्यावरण सचिव को दो महीने में औद्योगिक अपशिष्टों व सीवरेज से पर्यावरण को हुए नुकसान का मूल्यांकन करने के निर्देश देते हुए नुकसान का कीमत में आकलन करने को कहा है।

एनजीटी ने कहा कि जोजरी नदी का प्रवाह बनाए रखने के संबंध में विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन किसी भी स्थिति में औद्योगिक या सीवरेज अपशिष्टों को जोजरी नदी में नहीं में छोड़ा जाए, क्योंकि यह पहले से ही बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है और इससे भूजल और कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार सिंह NGT के सामने पेश हुए, लेकिन खंडपीठ ने उन्हें अगली तिथि पर डीजीपी के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए। सभी शुष्क यानी बरसाती नदियों के संबंध में मुख्य सचिव द्वारा की जाने वाली समीक्षा के संबंध में संबंधित महकमों के विमर्श के बाद जल संसाधन सचिव को दो महीने में शपथ पत्र पेश करने को कहा गया है।

हालात में सुधार के लिए दिए कई अहम निर्देश
-राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रत्येक पखवाड़े के अंतराल में कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की कार्यप्रणाली की निगरानी करने और उपचारित अपशिष्टों के नमूनों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण करवाने के निर्देश। ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत पैरामीटर और निर्धारित मानदंड के अनुसरण में उपचारण संभव हो रहा है या नहीं। बोर्ड को यह भी विचार करने को कहा कि यदि CETP मानकों के साथ गैर-अनुपालन योग्य है, तो सीईटीपी के सभी सदस्य इकाइयों की जिम्मेदारी तय करने और तब तक उत्पादन बंद करने के निर्देश। चूंकि, सीईटीपी के पूरे प्रवाह को उद्योगों और सिंचाई द्वारा उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बरसाती नदी जोजरी में उपचारित पानी छोडऩे से पहले यह मानकों के अनुरूप है या नहीं। बोर्ड को दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा।

-राज्य के नगरीय विकास विभाग के सचिव को यह जानकारी देने को कहा कि जोधपुर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) Pollution control board से प्राप्त सम्मति के अनुरूप संचालित किए जा रहे हैं या नहीं। मौजूदा एसटीपी को अपग्रेड करने एवं नए एसटीपी स्थापित करने की क्या योजना है। उपचारित पानी अन्य विकल्पों में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के बाद ही जोजरी नदी में छोड़ा जाए।
-कृषि, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के सचिवों को दो महीने में यह रिपोर्ट देने के निर्देश कि उपचारित प्रदूषित पानी कृषि, वानिकी तथा बागवानी के लिए उपयुक्त है या नहीं। इसका कोई हानिकारक प्रभाव तो नहीं है।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो महीने में यह रिपोर्ट देने को कहा कि जोधपुर की इकाइयों में स्थापित निजी ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। बोर्ड को मॉनिटरिंग का एक भरोसेमंद सिस्टम विकसित करने के संबंध में एनजीटी को बताने के निर्देश।
-केंद्रीय और State ground water board को दो महीने में यह शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश कि रीको और गैर रीको क्षेत्रों में पानी की सप्लाई का स्रोत क्या है। भूजल के औद्योगिक उपयोग के संबंध में इकाइयों को क्या अनुमति प्रदान की गई है।

एनजीटी में सुनवाई के दौरान पाली के लिए कहा
- बांडी नदी में प्रवाहित किए गए औद्योगिक इकाइयों के पानी से खेतों को कितना नुकसान पहुंचा इसका आंकलन किया जाए।
- नदी के आस-पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर किया प्रभाव पड़ा।
- फैक्ट्रियों में जो पानी आ रहा है वहां कहा से आ रहा। इसकी जांच की जाए तथा रिपोर्ट बनाई जाए।
- जलशोधन संयंत्रों की स्थापना की जाए।
- अद्र्ध अपशिष्टों के अनधिकृत निपटान को रोकना।
- 728 आवेदनों में से भूजल के लिए एनओसी केवल 3 को ही क्यों दी गई इसका स्पष्टीकरण मांगा।
- पानी का स्रोत क्या है जिसे आपूर्ति की जा रही है
- उद्योगों और अनुमति दी गई। इस तरह के स्पष्टीकरण
- दो महीने के भीतर दायर किया जाए।
- अगली सुनवाई पांच जुलाई को होगी।

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