VIDEO : 92 साल पहले आज ही के दिन खून से लथपथ हुई थी आउवा की गलियां

-1858 में 120 स्वतन्त्रता सेनानियों पर ब्रिटिश अधिकारियों ने किया था मामला दर्ज- मात्र दो दिन का नोटिस देकर 24 स्वतन्त्रता सेनानियों को दिया था मृत्यु दंड

By: Suresh Hemnani

Published: 25 Jan 2019, 07:30 AM IST

Pali, Pali, Rajasthan, India

आउवा (पाली)। मारवाड़ का एक छोटा सा कस्बा आउवा, लेकिन पूरी अंग्रेजी हुकूमत की चूले हिलाने में इस कस्बे का नाम इतना बड़ा है कि जब-जब भी देश में आजादी की पहली अलख जगाने वाली 1857 की क्रांति का जिक्र होगा, आउवा के बलिदान को नहीं भुलाया जा सकता। इस छोटे से कस्बे में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर रखा था। ब्रिटिश हुकूमत ने स्वन्त्रता सेनानियों के गढ़ को ख़त्म करने के लिए 24 जनवरी 1858 को 120 सैनिकों को गिरफ्तार किया। 25 जनवरी 1858 को कोर्ट से 24 स्वतन्त्र सेनानियों को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई और उन्हें एक साथ लाइन में खड़ा करके तोप से उड़ा दिया गया। यह पहला ऐसा मामला था जिसमें इतने कम समय में किसी को फांसी दी गई हो।

सुरंग बनाकर ध्वस्त किए थे आउवा के छह गढ़
स्वतन्त्रता सेनानियों के गढ़ को तबाह करने के लिए अंग्रेजों ने कई राजाओं के साथ मिलकर आउवा पर हमला किया। लेकिन, हर बार युद्ध में अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि ठाकुर कुशाल सिंह सुगाली माता के परम भक्त थे। उनकी कृपा से अंग्रेजों की मुंह की खानी पड़ती थी, तब अंग्रेज सरकार ने मूर्ति खण्डित कर आऊवा सहित उससे जुड़े छह किलों को सुरंगे बनाकर ध्वस्त किया।

मॉक मेशन का सिर काट लटकाया आउवा किले पर
आउवा पर हमला करने के लिए जब अंग्रेज पूरी तरह विफल रहे तब उन्होंने जोधपुर के महाराजा की मदद ली। जोधपुर के राजा और अंग्रेज सरकार ने मिलकर आउवा पर हमला किया। उस समय जोधपुर की सेना का पॉलिटिकल एजेन्ट मॉक मेसन था। उसने आउवा पर हमला करना चाहा पर युद्ध में ठाकुर कुशाल की तलवार के आगे टिक नहीं पाया और मॉक मेशन का सिर काट आऊवा के दरवाजे पर लटका लिया। हालांकि, कर्नल होम्स के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने 24 जनवरी 1858 को आउवा के किले पर अधिकार कर लिया।

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