VIDEO : हम जिन्हें चुनते है, वे हमारी नहीं सुनते, तभी हमारा आधा दिन पानी लाने में ही बीत रहा, जानिए इस गांव की व्यथा

Suresh Hemnani

Updated: 14 Jun 2019, 05:45:24 PM (IST)

Pali, Pali, Rajasthan, India

पाली। राज्य हो या देश सरकार चुनने में हम भी अपना वोट देकर अपनी भागीदारी निभाते है। लेकिन अफसोस है कि हम जिन्हें चुनते है वे ही हमारी नहीं सुनते। इसलिए इतनी तेज गर्मी में भी हमारा आधा दिन पानी की टंकी से पेयजल लाइन में ही बीत रहा। हमारी इस समस्या का समाधान हो तो काफी राहत मिले।

शहर के निकट स्थित भांवरी गांव की महिलाओं ने कुछ इस तरह अपनी समस्या बताई। उनका एक ही कहना था सरकार किसी की भी बने हमारी समस्या का समाधान कर दे बस हमें इससे ज्यादा ओर कुछ नहीं चाहिए। जिला मुख्यालय से महज 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भांवरी गांव स्थित है। करीब 1200 घरों की आबादी वाले इस गांव के अधिकतर ग्रामीण पशुपालन व कृषि कार्य से जुड़े हुए है। यह गांव कभी खुले में शौचमुक्त होने के कारण जिले में चर्चा का विषय रहा। लेकिन आज ग्रामीणों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें पेयजल, किल्लत, पर्याप्त बिजली न मिलना, पशु चिकित्सक का अभाव, नालियों मेें सफाई का अभाव आदि प्रमुख है।

दोपहर की तेज धूप में साथी के साथ भांवरी गांव के लिए रवाना हुए। हमारा स्वागत खस्ताहाल सडक़ ने किया। जैसे-तैसे कर भांवरी गांव पहुंचे। वहां एक घर के बाहर कुछ महिलाएं बैठी मिली। गांव की समस्याओं को लेकर उनसे बात कि तो उन्होंने बताया कि घरों में नल कनेक्शन है लेकिन पानी नहीं आता। ऐसे में जीएलआर से पीने का पानी लाते है ओर नहाने.धोने के लिए रुपए खर्च कर टेंकर मंगवाते है। इतने में बीच में बोलते हुए दूसरी वृद्धा ने बताया कि लाइट बार-बार काट दी जाती है। ऐसे में गर्मी के कारण काफी परेशान रहते है। यहां से कुछ आगे गए तो एक मोबाइल की दुकान चलाने वाले युवक ने बताया कि अधिकतर ग्रामीण पशुपालन व कृषि कार्य करते है लेकिन गांव में एक भी पशु चिकित्सक नहीं है।

यहां से हम आगे चलकर गांव के जीएलआर पहुंचे वहां पानी भरने के लिए महिलाएं व बालिकाएं लाइन लगाकर खड़ी नजर आई। पानी भरने को लेकर उनमें तनातनी हो रही थी। फोटो क्लिक करने लगे तो वहां खड़ी वृद्धा ने कहा कि पानी के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है आप देख लो। इस पानी के चक्कर में कई बार तो हमारा झगड़ा तक हो जाता है। यहां से कुछ आगे गए तो एक युवती घर के बाहर बनी कच्ची नाली की सफाई करती नजर आई। उसने बताया कि नाली नहीं होने घर के आगे गंदा पानी फैला रहता है। सफाई करने कोई नहीं आता। इसलिए खुद को ही सफाई करनी पड़ती है।

नलों में नही आता पानी
पेयजल किल्लत के चलते नलों में पानी नहीं आ रहा। इसलिए पीने का पानी टंकी से पानी भरकर लाते है। नहाने-धोने के लिए 500-700 रुपए खर्च कर टैंकर डलवाते है। -देवी पटेल, भांवरी

बार-बार जाती है लाइट
गांव में बार-बार लाइट जाती है। गर्मी के इस मौसम में बिना लाइट के कैसे रहे। बार-बार लाइट कटने से हमारा काम काज भी प्रभवित होता है। -गीता पटेल, भांवरी

पशु चिकित्सक तक नहीं
अधिकतर ग्रामीण पशुपालन व कृषि कार्य करते है लेकिन गांव में पशु चिकित्सक तक नहीं है। ओर न ही पशु चिकित्सालय के लिए भवन बना हुआ है। ऐसे में पशु बीमार पडऩे पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। -रसूल खत्री, भांवरी

घर के आगे गंदा पानी
गांव की कई गलियों में पक्की नाली का निर्माण नहीं हो रखा है। ऐसे में घरों का गंदा पानी सडक़ पर फेला रहता है। जिससे गंदगी होती रहती है। - मांगीलाल मेघवाल, भांवरी

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