VIDEO : यहां है पशुओं को भडक़ाने की अनोखी परम्परा

Suresh Hemnani

Publish: Nov, 09 2018 06:48:08 PM (IST) | Updated: Nov, 09 2018 06:48:09 PM (IST)

Pali, Pali, Rajasthan, India

धनला। आधुनिकता की होड़ में एक ओर दिपावली नए अंदाज में मनाने का प्रचलन बढ़ रहा हैं, वहीं दूसरी ओर गांवों में आज भी परम्परागत ढंग से दिवाली मनाई जाती हैं। ऐसी ही रेवड़ भडक़ाने की एक अनोखी परम्परा हैं जिसको देवासी समाज के चरवाहे परिवारों द्वारा आज भी उत्साह से निभाया जा रहा हैं। इस अनोखी परम्परा को निभाने को लेकर महिलाओं ने गोवर्धन पूजा के बाद अपने पशुधन को सप्त रंगों से शृंगार किया। इसके बाद चारवाहों ने अपने पशुओं को बाड़े से बाहर निकाला। इस दौरान बाड़े के बाहर खड़े बच्चों ने हाथों में थाली-बर्तन बजाकर पशुओं को भडक़ाते हुए परम्परा निभाई। बुर्जुग चरवाहों ने बताया कि यह परम्परा पूर्वजों के समय से चली आ रही है। ऐसी मान्यता हैं कि इस प्रकार पशुओं को भडक़ाकर दौडाने से पशुधन स्वस्थ रहता हैं।

एक दिन पूर्व पशुओं का करते हैं शृंगार
पशुओं को भडक़ाने से एक दिन पहले देवासी समाज के चरवाहें परिवारों द्वारा अपने पशुधन को विभिन्न रंगों से शृंगार किया जाता हैं। यहा तक कि महिलाएं भी बराबर की भागीदारी निभाते हुए पशुओं को रंगने से लेकर रेवड़ भडक़ाने तक में पूरा सहयोग करती हैं।

पीढिय़ों से चल रही है यह परम्परा
जोजावर स्थित शीतला माता की ढाणी निवासी चरवाह परिवार के हेमाराम देवासी तथा देवासी युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष लाबुराम वेराणा ने बताया कि रेवड़ भडक़ाने की यह परम्परा हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं। जिसे आज भी हम पुरे उत्साह से निभा रहे हैं।

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