VIDEO : उद्यमियों ने जानी एमवीआर तकनीक की करामात, प्रजेंटेशन देने पहुंचे चंडीगढ़ के इंजीनियर्स

-सीइटीपी सभागार में हुई बैठक
-उपखण्ड अधिकारी व प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्रीय अधिकारी भी हुए शामिल

By: rajendra denok

Published: 13 Jun 2019, 08:12 AM IST

Pali, Pali, Rajasthan, India

पाली। प्रदूषण की समस्या से निजात पाने के लिए शहर के एक उद्यमी द्वारा लगाए गए एमवीआर प्लांट को जानने-समझने की उत्सुकता अब अन्य उद्यमियों में भी बढ़ती जा रही है। उद्यमियों की मांग पर सीइटीपी के सान्निध्य में बुधवार शाम सीइटीपी सभागार में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें चंडीगढ़ से आए कंपनी के इंजीनियर्स ने उद्यमियों को भाप आधारित एमवीआर तकनीक की करामात से रूबरू कराया। कंपनी के इंजीनियर्स ने उद्यमियों की जिज्ञासा को भी शांत करने का प्रयास किया।

उपखण्ड अधिकारी (आइएएस) रोहिताश्वसिंह तोमर, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अमित शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में चंडीगढ़ से आए कंपनी के विवेक वर्मा और पवन शर्मा ने प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने तकनीक के सभी पहलुओं की जानकारी दी और उद्यमियों की शंकाओं का समाधान भी किया। इंजीनियर्स ने बताया कि यह तकनीक हाल ही में अमल में लाई गई है जिसके परिणाम बेहतर आ रहे हैं। उन्होंने पाली के प्रदूषण की समस्या पूर्णतया खत्म करने का भी दावा किया। उन्होंने बताया कि पानी बचाने में भी यह तकनीक मुफीद रहेगी।

उद्यमी न केवल पानी को शत प्रतिशत ट्रीट करने में सफल होंगे, बल्कि पानी का रीयूज भी किया जा सकेगा। बैठक के दौरान सीइटीपी अध्यक्ष प्रवीण कोठारी, उपाध्यक्ष कमलेश गुगलिया सत्कार, सचिव अशोक लोढ़ा, पूर्व अध्यक्ष अनिल मेहता, उद्यमी राकेश अखावत, अमित समदडिय़ा समेत बड़ी संख्या में कपड़ा इंडस्ट्री के उद्यमी शामिल हुए। सीइटीपी के उपाध्यक्ष गुगलिया ने बताया कि प्रजेंटेशन से उद्यमियों का उत्साह बढ़ा है और वे कपड़ा उद्योग के बेहतर भविष्य के प्रति आशांवित भी है।

बैठक में ये भी निर्णय
-प्रजेंटेशन के बाद उद्यमियों ने तय किया कि कमलेश गुगलिया द्वारा लगाए गए प्लांट की करीब एक माह तक की रिपोर्ट का इंतजार किया जाए। इसके बाद प्लांट सुचारू रूप से चलता है और ट्रीटेड पानी के नतीजे अनुकूल मिलते हैं तो अन्य इकाइयों और सीइटीपी में ऐसा प्लांट लगाने पर विचार किया जाएगा।
-एमवीआर प्लांट सरकार के किन नियमो के तहत लगाया जा सकेगा, इसकी पड़ताल की जाएगी।
-इसका प्रयोग सफल रहा तो कई उद्यमी निजी स्तर पर भी प्लांट लगाने का फैसला कर सकते हैं।
-सीइटीपी भी इस तकनीक की तरफ कदम बढ़ा सकती है।

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