इनके दर्द पर मरहम लगाया तो आंखों से आ गए आंसू

-गुजरात से पैदल आए श्रमिक, ग्रामीणों की सेवा से हुए अभिभूत
-प्रशासन ने गांव किया रवाना

By: Suresh Hemnani

Published: 16 May 2020, 03:11 PM IST

पाली। बारां जिले से गुजरात कमाने गए 33 लोग कोरोना महामारी के लॉकडाउन में कमाई का जरिया नहीं रहने पर गांव के लिए पैदल ही निकल पड़े। वे गुजरात के मडगांव से सात दिन तक लगातार चलने के बाद बाली के समीप श्रीसेला गांव पहुंचे। उनके दर्द पर ग्रामीणों ने मरहम लगाया तो उनकी आंखों से आंसू आ गए।

गांव में ग्रामीणों व प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी दो दिन तक सेवा करने के बाद सहबाद गांव के लिए रवाना किया। जिला कलक्टर अंश दीप ने बताया कि आदिवासी सहरिया जाति के 33 जने आए थे। इनमें 11 पुरुष, 7 महिलाएं व 15 बच्चे थे। इन सभी को श्रीसेला आने पर डाकघर के पुराने भवन में ठहरा कर भोजन की व्यवस्था की गई। इसकी जानकारी पर बाली उपखण्ड अधिकारी श्रीनिधि बीटी भी वहां पहुंची। मास्क व सेनिटाइजर वितरित किए। रोडवेज बस की व्यवस्था करके उन्हें अपने घरों की ओर रवाना किया।

इन श्रमिकों को बिस्किट व पानी की बोतल के दो-दो कर्टन भी दिए। उपखण्ड अधिकारी ने गांव वालों की तरफ से एकत्रित की गई चार हजार रुपए की राशि भी श्रमिकों को सौंपी। तहसीलदार सर्वेसर निम्बार्क ने श्रमिकों को गांव जाकर 14 दिन होम क्वॉरंटीन रहने के साथ कोरोनो से बचाव के सभी उपाय करने को कहा।

श्रमिकों को रवाना करते समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार सोनी, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी हितेन्द्र वागोरिया, नायब तहसीलदार नरेन्द्र, डॉ. प्रेम कुमार, डॉ. ताहिर, मोहम्मद अजरूद्दीन, प्रेम प्रकाश, मनोज कुमार, सरपंच महिपालसिंह चौहान आदि ने सहयोग किया।

Suresh Hemnani
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