scriptYouth of Marwar region are earning lakhs of in organic farming 10101 | कपड़ा व्यवसाय छोड़ थामी खेतीबाड़ी, तकनीक के समावेश से कमा रहे लाखों | Patrika News

कपड़ा व्यवसाय छोड़ थामी खेतीबाड़ी, तकनीक के समावेश से कमा रहे लाखों

- सवा दो बीघा जमीन में लहलहा रहे अनार के 425 पौधे
- ऑर्गेनिक खाद का उपयोग, कीट पकडऩे को लगाया वैज्ञानिक जाल

पाली

Published: January 15, 2022 06:49:53 pm

-राजकमल व्यास
पाली। दिसावर में व्यापारिक कौशल के जरिए अपनी छाप छोड़ चुके मारवाड़ क्षेत्र के युवा अब ऑर्गेनिक खेती-बाड़ी में अपने हाथ आजमा रहे हैं। खास बात ये है कि वे अपनी फसल में देसी खाद का उपयोग तो कर ही रहे हैं, तकनीक का भी समावेश कर रहे हैं। इससे फसलों में कीट व मक्खियों से नुकसान कम हो रहा है। साथ ही ये तकनीक ज्यादा मुनाफे का जरिया भी बन चुकी है। ऐसे ही एक युवा किसान है, जिन्होंने सोजतरोड के समीपवर्ती मेलावास गांव में अपनी कृषि भूमि पर अनार की खेती की है, जो सालाना लाखों की आय दे रही है।
कपड़ा व्यवसाय छोड़ थामी खेतीबाड़ी, तकनीक के समावेश से कमा रहे लाखों
कपड़ा व्यवसाय छोड़ थामी खेतीबाड़ी, तकनीक के समावेश से कमा रहे लाखों
दरअसल, पाली जिले में कई युवा है, जो अब ऑर्गेनिक खेती से जुडकऱ अपनी नई मंजिल को तलाश रहे हैं। इन्हीं में से एक है सोजतरोड कस्बे के निकटवर्ती गांव मेलावास के गोविंदसिंह राजपुरोहित। इनका पहले कपड़ा व्यवसाय था। लेकिन, अपने मित्रों के जरिए उन्हें ऑर्गेनिक खेती के बारे में जानकारी मिली। साथ ही इससे होने वाले फायदों के बारे में जानकारी मिली तो इन्होंने अपने पैत्तृक गांव मेलावास में ऑर्गेनिक खेती करने का मन बनाया।
दो साल की मेहनत, तीसरे साल में अनार ने दी मुस्कान
बकौल गोविंद सिंह, चार साल पहले खुद के सवा दो बीघा खेत में अनार के 450 पौधे लगवाए थे। इनमें से कुछ पौधे खराब हो गए थे। आज खेत में अनार के 425 पौधे हैं, जिसके लिए खेत में वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा हूं। हालांकि, अनार के पौधे को तैयार होने में दो साल लगते है। लेकिन, तीसरे साल से अनार के इन पौधों ने चेहरों पर मुस्कान ला दी। पौधों पर अनार के फल आए, जिसकी पहली पैदावार से उन्हें चार लाख की आय हुई। हालांकि, इस बार पैदावार से करीब छह से सात लाख रुपए मिलने की उम्मीद है।
कीट-मक्खियों को पकडऩे के लिए वैज्ञानिक जाल
खेत में अनार के पौधों पर एक विशेष प्रकार का रेडीमेड बॉक्स लगाया है, जो कि कीट व मक्खियों को आकर्षित करता है। कीट-मक्खी जाल के नाम से सम्बोधित किए जाने वाले पीले कलर के इस बॉक्स में मक्खियों व कीट के प्रवेश के बाद इनके निकलने का रास्ता बंद हो जाता है। इससे अनार को इन कीट व मक्खियों से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा। इसके अलावा पौधों पर होने वाली अनार की पैदावार का तापमान नियंत्रित रखने के लिए विशेष प्रकार की थैलियों का भी उपयोग किया है।
खेत में तैयार करते हैं खाद
गोविंदसिंह अनार के पौधों में देसी खाद का ही उपयोग करते हैं। इसके लिए आसपास से गोबर एकत्रित कर उसे गड्ढे में डाल देते हैं तथा उसमें केंचुएं छोड़ देते हैं, इससे तैयार खाद पौधों की जड़ों में डाली जाती है।
रासायनिक खाद से स्वास्थ्य को नुकसान
मारवाड़ में पिछले कुछ समय से ऑर्गेनिक खेती का रूझान बढ़ा है। बदलते दौर में अब लोग रासायनिक खाद के नुकसान के प्रति जागरूक हो रहे हैं तो क्षेत्र के किसानों का भी रासायनिक खाद के उपयोग से मोह भंग हो रहा है। ये ही कारण कि देसी खाद से होने वाली उपज का बाजार में भाव भी ज्यादा मिल रहा है।
ड्रीपिंग सिस्टम से सिंचाई
क्षेत्र में काफी समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से जल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। ऐसे में ड्रीपिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे पौधों की सिंचाई करने में पानी की बहुत कम जरूरत होती है।
अपील : युवा करें ऑर्गेनिक खेती
चाहे मुनाफा कम हो, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। इसीलिए आर्गेनिक खेती का चयन किया। मेरी मंशा है कि क्षेत्र की युवा पीढ़ी को खेती की ओर बढऩा चाहिए। साथ ही उन्हें ऑर्गेनिक खेती करनी चाहिए, ताकि आमजन को पोषक तत्वों से भरपूर अनाज व फल मिल सके। - गोविंदसिंह, युवा किसान

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