पाली के युवा ने दिखाई स्टेम सेल पद्धति की राह, केन्द्र सरकार करवाएगी अनुसंधान, जारी किया ड्राफ्ट

केन्द्र सरकार ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद को प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा

By: rajendra denok

Published: 11 Sep 2017, 11:01 AM IST

पाली .
जालोर जिले के चितलवाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले गोवाराम एक एेसी बीमारी से ग्रसित है जिसमें कि मांसपेशिया सिकुड़ती जाती है। यह बीमारी आनुवांशिक तौर पर मिली है और इसी बीमारी से उसके परिवार के चार जनों की अब तक मौत भी हो चुकी है। गोवाराम जैसे हजारों मरीज हैं जिनकी बीमारी का इलाज स्टेम सेल थैरेपी है। जो कि सरकारी स्तर पर कहीं उपलब्ध नहीं। पाली के एक युवा को इसकी जानकारी हुई तो वे स्टेम सेल थैरेपी को लागू करवाने के लिए संघर्ष में लग गए। करीब तीन साल के संघर्ष के बाद अब केन्द्र सरकार ने उनकी बात मानी और इसके लिए रिसर्च शुरू किया है।

आईसीएमआर करेगा रिसर्च
पाली के युवा अधिवक्ता वैभव भंडारी ने स्टेम सेल थैरेपी पर सर्वप्रथम 2014 में पत्राचार शुरू किया। संसद में सवाल तक लगवाए। इसके बाद जालोर के गोवाराम और एेसी बीमारियों से ग्रसित लोगों की रिपोर्ट बनाकर केन्द्र सरकार को भेजी। अब केन्द्र सरकार के स्वाथ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से पत्र मिला है। इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद को इस पर रिसर्च करने को कहा गया है।

इस प्रकार केन्द्र सरकार ने किए कार्य

- जून 2017 में केन्द्र सरकार ने पत्र एम्स के निदेशक को भेजा
- एम्स के स्टेम सेल थैरेपी विभाग के प्रभारी ने इस पर जवाब पेश किया।

- उन्होंने इस पर आईसीएमआर और केन्द्र सरकार के बायोटैक्नोलॉजी विभाग के गाइड लाइन बनाने की जानकारी दी।
- एक माह बाद जुलाई 2017 में बायोटैक्नोलॉजी विभाग व आईसीएमआर ने गाइड लाइन जारी कर दी।

- अब अगस्त में अधिवक्ता भंडारी की ओर से दिए गए रिप्रजेंटेशन पर आईसीएमआर को रिपोर्ट देने को कहा गया है।
- संभवत: ड्राफ्ट को फाइनल करने के बाद सरकारी स्तर पर स्टेल सेल थैरेपी से इलाज संभव हो सकेगा।

एेसे कारगर है इलाज में

गोवाराम जैसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और दिव्यांगता की श्रेणी में शामिल की गई करीब ७ प्रकार की लाइलाज बीमारियों में राहत पहुंचाने के लिए स्टेम सेल थैरेपी सफल साबित होती है। चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक स्टेम सेल थैरेपी में शरीर का वह हिस्सा जो दिव्यांगता से ग्रसित है। वहां रीढ़ की हड्डी की मूल कोशिकाएं ट्रांसप्लांट की जाती है।

 

rajendra denok Reporting
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