प्रवासियों के पलायन से संकट में आए हरियाणा के किसान, धान की बजाए सीधी की बिजाई

सरकार के फैसले के बाद धान उत्पादकों ने अपनाई नई राह

By: Devkumar Singodiya

Updated: 23 May 2020, 12:58 AM IST

पानीपत/चंडीगढ़. एक तरफ हरियाणा से लाखों प्रवासियों का पलायन और दूसरी तरफ धान की पैदावार को लेकर हरियाणा सरकार की सख्ती। ऐसे में किसानों ने नया रास्ता निकालते हुए धान की सीधी बिजाई की तैयारी कर ली है। सीधी बिजाई से किसानों की कई समस्याओं का समाधान होगा।

हरियाणा में इस सीजन के दौरान धान की रोपाई को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। हरियाणा सरकार उत्तरी हरियाणा के सात जिलों में धान की रोपाई पर रोक लगा चुकी है। सरकार इन जिलों में किसानों की निगरानी कर रही है। दूसरी तरफ इस साल कोरोना के चलते हरियाणा से लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके हैं। गेहूं की कटाई तो मशीनों से हो जाती है लेकिन धान की रोपाई अथवा पनीरी तैयार के लिए मजदूरों की जरूरत होती है। प्रवासियों के पलायन से धान का सीजन खतरे में है।

किसान भारतीय कृषि अनुसंधान नई दिल्ली की तकनीक सीधी बिजाई का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रदेश के कुछ हिस्सों में किसानों ने मशीनों के जरिए सीधी बिजाई की तैयारी कर ली है। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के मीडिया प्रभारी राकेश बैंस के अनुसार धान की रोपाई के लिए बड़ी संख्या में श्रमिकों की जरूरत होती है। पर कोरोना की वजह से लॉकडाउन के बीच श्रमिक अपने-अपने गृह राज्यों की तरफ पलायन कर चुके हैं। किसान को धान की रोपाई करने के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे। इसलिए किसानों ने धान की रोपाई की बजाए सीधी बिजाई का निर्णय लिया है।


यह है सीधी बिजाई की तकनीक

आईसीएआर के अनुसार सीधी बिजाई में धान की सभी किस्म कामयाब हैं। यह बिजाई शाम के समय करनी होती है। विशेषज्ञों का प्रस्ताव है कि धान की सीधी बिजाई 20 से 31 मई तक की जा सकती है। क्योंकि इसके बाद कम से कम 10 दिन सूखे मौसम की जरूरत होती है। धान की बिजाई के लिए प्रति एकड़ 7 से 8 किलो बीज लगता है। गहरी जुताई के बाद सिंचाई और नमी पर बीज ड्रिल व छींटा विधि से बिजाई की जाती है। कृषि अनुसंधान के मुताबिक अगर बिजाई के 7 दिन में बरसात हो तो जमीन की सख्त परत तोडऩे के लिए सिंचाई करें। अन्यथा पौधे बाहर नहीं आ पाएंगे। फिर 10 दिन बाद सिंचाई करें और तुरंत छिडक़ाव करें।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की पौध लगाकर फसल लगाने में खपतवार का खतरा कम रहता है। मगर सीधी बिजाई से यह खतरा अधिक बन जाता है। पर इसे नियंत्रण में करने के लिए बिजाई के तुरंत बाद छिडक़ाव किया जाता है।


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