गृह मंत्री विज के प्लान पर अडंगा: शराब तस्करों, अफसरों और नेताओं के गले का फंदा नहीं बनेगी एसईटी

हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने नहीं दी एसईटी को एसआईटी के समान पावर

By: Devkumar Singodiya

Updated: 27 May 2020, 11:35 PM IST

पानीपत/चंडीगढ़. हरियाणा में शराब घोटाले की जांच करा रहे गृह मंत्री अनिल विज को दूसरी बार झटका लगा है। पहली बार तब, जब सरकार ने उनसे सीआइडी वापस ले ली थी। दूसरी बार अब, जब शराब घोटाले की जांच कर रही एसईटी (स्पेशल इंक्वायरी टीम) को एसआईटी (स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम) की पावर नहीं दी जा रही है। अब शराब घोटाले में शामिल बड़े नेता, अधिकारी और तस्कर शायद ही शिकंजे में फंस पाएं।

हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने एसईटी को अधिक पावर देने के गृह सचिव विजयवर्धन के पत्र पर नेगेटिव रिपोर्ट दी है। इससे पहले एलआर (कानूनी सलाहकार) ने अपनी राय देने से इंकार करते हुए एडवोकेट जनरल के पाले में गेंद डाल दी थी। गृह मंत्री अनिल विज चाहते थे कि लाकडाउन के दौरान गोदामों से गायब हुई शराब और उसकी बिक्री के घोटाले की एसआईटी से जांच कराई जाए, लेकिन सरकार ने एसआईटी की बजाय एसईटी की अधिसूचना जारी कर दी। यह मामला अखबारों की सुॢखयां बना तो गृह मंत्री ने भारतीय दंड संहिता की धारा 32 के तहत एसईटी को ही एसआईटी के समान पावर देने के निर्देश जारी कर दिए।


माल गोदाम से हुई थी लाखों रुपए की शराब चोरी

हरियाणा में लाकडाउन के दौरान करोड़ों रुपए का शराब घोटाला हुआ है। मालगोदाम से शराब चोरी तो हुई ही, साथ ही इसे पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से महंगे दामों पर बेचा गया। गृह मंत्री विज के निर्देश पर गृह सचिव विजयवर्धन ने पहले एलआर फिर एडवोकेट जनरल को पत्र लिखा। गृह सचिव ने पूछा कि क्या एसईटी को एसआईटी के समान पावर दी जा सकती है।

गृह मंत्री अनिल विज ने खुद स्वीकार किया कि एसईटी को अधिक पावर देने से एडवोकेट जनरल ने इंकार कर दिया और नेगेटिव रिपोर्ट दी है। एडवोकेट जनरल ने कहा है कि जांच के आधार पर एफआइआर दर्ज हो सकती है। इसके लिए तथ्य जांच एजेंसी (एसईटी) भी जुटा सकती है।


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