संसद में गूंजी पन्ना में डायमंड पार्क और हीरा कारोबार के संरक्षण की मांग

संसद में गूंजी पन्ना में डायमंड पार्क और हीरा कारोबार के संरक्षण की मांग
संसद में गूंजी पन्ना में डायमंड पार्क और हीरा कारोबार के संरक्षण की मांग

Shashikant Mishra | Publish: Aug, 08 2019 01:32:01 PM (IST) Panna, Panna, Madhya Pradesh, India

पत्रिका ने उठाया था मामला, पर्यावरणीय और वन विभाग के कारण गंभीर रूप से प्रभावित है जिले का हीरा कारोबार
तत्कालीन सीएम ने भी पन्ना में डायमंड पार्क के स्थापना की की थी घोषणा

पन्ना. पन्ना के हीरा कारोबार को बचाने और डायमंड पार्क की स्थापना का मुद्दा सांसद वीडी शर्मा ने लोकसभा में उठाया। पन्ना में हीरा निकलने के बाद भी डायमंड पार्क इंदौर में स्थापित करने और सिमटते हीरा कारोबार को लेकर पत्रिका द्वारा मुहिम चलाई गई थी। यही कारण था कि तत्कालीन सीएम शिविराज सिंह चौहान ने पन्ना ेंमें डायमंड पार्क के स्थापना की घोषणा की थी। वन और राजस्व सीमा विवाद को निपटाकर सिमटते हीरा कारोबार को संरक्षित करने के मामले में विस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने-अपने एजेंडे में शामिल किया था, लोकसभा चुनाव के समय भी भाजपा द्वारा जारी ५२ विंदुओं वाले संकल्प पत्र में संकल्प क्रमांक १३ में एनएमडीस को यथावत चालू रखने और हीरा खनन के अन्य विकल्पों की तलाश करने की बात कही गई थी।
सांसद वीडी शर्मा ने सोमवार को शून्यकाल में पन्ना के एनएमडीसी मझगवां डायमंड प्रोजेक्ट और यहां डायमंड पार्क की स्थापना के मामले को उठाया था। सांसद शार्म ने सदन को बताया, पन्ना में एनएमडीसी द्वारा संचालित हीरा की खदान देश की एकमात्र हीरा खदान है।

यहां से शासन को हर साल करोड़ों रुपए का राजस्व मिलता है। हजारों लोगों को इनके द्वारा रोजगार मिलता है। लेकिन पन्ना टाइगर रिजर्व की वजह से हीरा की खदानें संकट में हैं। कई प्रकार के कोर्ट केस होने के कारण यह खदानें नहीं चल पा रही हंै। उन्होंने शासन से मांग की है कि खनिज और वन -पर्यावरण मंत्रालय मिलकर हीरा खदानों को बचाने का प्रयास करें, जिससे इन ऐतिहासिक खदानों को बचाया जा सके।

डायमंड पार्क की स्थापना के मामले को भी उठाया
सांसद वीडी शर्मा ने एनएमडीसी को बचाने के लिए सरकार से मांग करने के साथ ही पन्ना में डायमंड पार्क की स्थापना का मांग भी की। गौरतलब है कि पूर्व में पन्ना में डायमंड पार्क स्वीकृत था। जिसे बाद में पन्ना के बजाए इंदौर में शिफ्ट कर दिया गया। इसका पन्ना के लोगों ने काफी विरोध भी किया लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। पन्ना में लगातार सिमटते जा रहे डायमंड कारोबार को संरक्षित करने और डायमंड पार्क की पन्ना में स्थापना की मांग को लेकर पत्रिका द्वारा २५ फरवरी २०१७ से हीरों की धरती का कड़वा सच अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के तहत करीब दो दर्जन समाचार को क्रमशा: प्रकाशितकर मांग को प्रमुखता के उठाया था। पत्रिका की मुहिम पर ही तत्कालीन पवई विधायक मुकेश नायक ने विस में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा की मांग की गई थी।

विस ने मामले में चर्चा का मौका नहीं मिल सका, लेकिन प्रदेश के तत्कालीन खनिज मंत्री ने इस संबंध में विभाग की जानकारी सदन में रखी और पढ़ी भी। भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी मामले में स्थानीय लोगों की भावनाओं से सीएम को आवगत कराया था। पत्रिका द्वारा लगातार दो माह तक चलाई गई मुहिम का ही नतीजा था कि इसके बाद सत्ता पक्ष रहा हो य विपक्ष हर किसी के अपने मुद्दे में उक्त मांग को जरूर शामिल किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन के ४ अप्रेल २०१८ को आयोजित लोकार्पण समारोह में पन्ना में डायमंड पार्क की स्थिापना और वन व राजस्व सीमा विवाद को निपटाने की घोषणा की थी। इसके बाद अपनी जन आर्शीवाद यात्रा के दौरान २५ जुलाई २०१८ को छत्रसाल पार्क में रात करीब डेढ़ बजे आयोजित सभा में भी उन्होंने पन्ना में डायमंड पार्क की स्थापना की भी घोषणा की थी। उक्त घोषणा के बाद विस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के दोनों दलों के लोगों ने अपने-अपने मुद्दों में जगह दी थी। लोकसभा चुनाव में भी सांसद ने लोकसभा स्तर पर जारी अपने ५२ सूत्रीय संकल्प पत्र में संकल्प क्रमांक १३ के उक्त मांग को शामिल किया था।


नहीं सुलझ रहा वन राजस्व सीमा विवाद
जिले में वन और राजस्व की सीमा का विवाद सालों से चला आ रहा है। किसी ने भी इसे सुलझाने की दिशा में गंभीरता पूर्वक प्रयास नहीं किया है। गौरतलब है कि पन्ना में करीब ५० किमी. की हीरा धारित पट्टी क्षेत्र में उथली हीरा खदानो में हीरा पाया जाता है। पन्ना में करीब ३०० साल से हीरा निकाला जा रहा है। यहां दुनियां में हीरे की सबसे बेहतरीन जैम क्वालिटी के हीरे पाए जाते हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जिले के जिस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की हीरा पाया जाता है वह करीब २ हजार हेक्टेयर का क्षेत्र क्षेत्र वन भूमि में चला गया है। जहां अब वैधानिक रूप से खदान के लाइसेंस नहीं दिए जा रहे हैं, जबकि वहां अवैध रूप से यह कारोबार जोरों पर चल रहा है। फिलहाल इटवा सर्किल और पन्ना सर्किल में ही हीरे के पट्टे दिए जा रहे हैं। पन्ना सर्किल में कमलाबाई का तालाब, सकरिया (चौपरा), कृष्णाकल्याणपुर (पटी) और रक्सेहा की शाकीय जमीन शामिल है। जबकि दहलान चौकी के लिए निजी जमीनों में भी हीरा खदानों के लिए पट्टे जारी किए जाते हैं। वहीं इटमां सर्किल में किटहा, इटमांखास (बगीचा), बडग़ड़ी (मुड्ढ़ा हजारा), सिरस्वाह (भरका), रमखिरिया, मडफ़ा, सिरसा आदि क्षेत्र की उथली हीरा खदान शामिल हैं। उक्त मामले को सुलझाने को लेकर घोषणाए तो खूब हुई हैं, लेकिन भौतिक रूप से समस्या के समाधान के प्रयास नहीं किए गए हैं। कुछ दिनों पूर्व पन्ना के दौरे पर आए कमिश्नर आनंद कुमार शार्म ने भी वन और राजस्व सीमा विवाद को सुझाने की कार्रवाई करने की बात कही थी। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने भी मामले को सुलझाने की दिशा में सकारात्मक दिशा में काम करने की बात कही, इस दिशा में अभी तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया है।

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