हीरे के लिए हत्या, छल और टोटके

डायमंड सिटी में होने वाली अपराधिक वारदातों में इर्द-गिर्द होती है हीरे की अहम भूमिका, अवैध कारोबार पर नहीं जिला प्रशासन और खनिज विभाग का अंकुश, अवैध खदानों और हीरे की कालाबाजारी के कारण बढ़ रहे अपराध

By: suresh mishra

Published: 26 May 2016, 11:14 PM IST


पन्ना
दुनियाभर में चमक बिखेरने वाले पन्ना के हीरे की चमक से हीरा नगरी ही दूर है। करोड़ों के हीरे के अवैध कारोबार ने यहां पूरा एक रैकेट खड़ा कर दिया है। इससे यहां अपराधिक वारदातें तक होने लगी हैं। यहां हीरे के लिए हत्या, लूटपाट, छल-कपट और टोने-टोटके जैसी चीजें आम हो गई हैं। जिले के हीराधारित पट्टी क्षेत्र में होने वाली अपराधिक वारदातों के इर्द-गिर्द हीरे की अहम भूमिका होती है।

गौरतलब है कि जिले की उथली हीरा खदानों से जैम क्वाटिली का उच्च गुणवत्ता वाला हीरा निकलता है। यही कारण है कि यहां हीरे के लिए लूट मची है। हीरा विभाग के अनुसार जिले में 10 से 15 किमी के क्षेत्रफल की लंबी पट्टी में हीरा पाया जाता है। इसे हीराधारित पट्टी भी कहते हैं। जिले में करीब 350 हीरा खदानों के पट्टे दिए गए हैं। एक हीरा खदान के लिए 200 रुपए में एक साल के लिए 8 बाई 8 मीटर का क्षेत्रफल आवंटित किया जाता है। हीरा विभाग के रिकॉर्ड से कई गुना ज्यादा खदानें पन्ना, बृजपुर, पहाड़ीखेड़ा सहित आसपास के क्षेत्र में चल रही हैं। इनमें से अधिकांश अवैध होती हैं। इन खदानों में न सिर्फ अवैध रूप से विस्फोट किए जाते हैं, बल्कि शत प्रतिशत हीरे का कालाबाजारी भी हो रहा है। अवैध हीरा खदानों पर खनिज विभाग और जिला प्रशासन लगाम नहीं लगा पा रहा है।

रिश्तों में दरार
हीरा कारोबार से जुड़े लोग एक दूसरे से छल कपट करते रहते हैं। जो लोग हीरा खदान लगाकर इस काम को छोड़ चुके हैं उनके पूछने पर उत्तर मिलता है कि उनके पार्टनर ने धोखा दे दिया। इसके बाद उन्होंने खदान लगाना बंद कर दिया। पवई क्षेत्र के एक कारोबारी ने बताया कि उसने अपने रिश्ते के बड़े भाई के साथ मिलकर खदान लगाई थी। जब हीरे की चाल बीनने का समय आया तब उसे कहीं चाय लेने भेज दिया जाता था तो कहीं किसी काम से।

पार्टनर चूंकि परिवार के ही लोग थे, इसलिए विश्वास में वह चला जाता था। जिस खदान में शत-प्रतिशत हीरा मिलने की उम्मीद थी, वहां उन्हें एक रुपए के भी हीरे नहीं मिले। बाद में मजदूरों से उन्हें पता चला कि उनके ही रिश्तेदारों ने धोखा दे दिया। हीरे के कारण न सिर्फ रिश्ते बिगड़ रहे हैं, बल्कि रिश्तेदार हत्या तक की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।

हीरा कारोबारी की हुई थी हत्या
जिले में हीरे को लेकर कई लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। पुलिस जांच में हीरे के लिए हत्यारों की बात भी सामने आई थी। फरवरी में कलेक्ट्रेट के पास निवासी हीरा व्यापारी और कांगे्रस नेता रतन जडिय़ा का शव संदिग्ध परिस्थतियों में पाया गया था। मामले की जांच में पुलिस ने पाया कि जडिय़ा को हीरा मिलने की भनक लगने पर सीता सिंह ठाकुर पति विंद सिंह ठाकुर (35) निवासी हाटूपुर थाना बृजपुर ने हीरा पाने के लिए जडिय़ा से नजदीकी संबंध बनाए और बाहर से लोगों को बुलवाकर सुनियोजित तरीके से हत्या कर दी। मामले की जांच के बाद पाया कि जडिय़ा हत्याकांड से पहले ही अवैध रूप से हीरे की बिक्री कर चुके थे। जिसका पैसा उनके साथ खदान लगाने वालों में भी बंट चुका था। यह जानकारी सीता सिंह को नहीं होने के कारण उसने हीरा पाने की लालच में हत्या कर दी। उसके बाद उसे हीरा भी नहीं मिला। मामले में पुलिस ने हत्याकांड के  आरोपियों को तो पकड़ लिया, लेकिन हीरे को अवैध रूप से विक्रय करने वाले जडिय़ा के पार्टनरों और अवैध रूप से खरीदी करने वाले स्थानीय कारोबारी पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की।
Show More
suresh mishra
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned