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नई शर्तें लगाने पर समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से पीछे हट रहे किसान

जिले की कृषि उपज मंडियों में गेहूं का सही दाम मिलने के चलते भी बिक्री के लिए कम पहुंच रहे किसान, भुगतान की प्रक्रिया में भी लेटलतीफी से परेशान हो रहे किसान

पन्ना

Published: April 27, 2022 01:15:39 am

पन्ना. समर्थन मूल्य पर शुरू की गई गेहूं की खरीदी में इस वर्ष पूर्व की तरह कम संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। वहीं मंडी में भी कीमत इस बार ठीक मिल रही है, जिसकी वजह से अधिकांश किसानों का रुझान समर्थन मूल्य के खरीदी केन्द्रों की ओर नहीं है। इसके पीछे किसानों ने जो प्रमुख वजह बताई है, उसमें सरकार द्वारा लागू की गई शर्तें हैं तो वहीं खरीद केन्द्रों के कर्मचारियों की मनमानी भी समस्या बढ़ा रही है।
समर्थन मूल्य पर बनाए गए केन्द्रों में किसानों को सहजता नहीं हो रही है। इस बार स्लाट बुक कराने का निर्देश दिया गया है। जिन किसानों ने स्लाट बुक कराए हैं उनकी उपज भी समय पर नहीं खरीदी जा रही है। किसानों को इंतजार कराया जा रहा है। साथ ही जो गेहूं लेकर जा रहे हैं, उसे खराब बताकर लौटाया भी जा रहा है। जिसकी वजह से अधिकांश किसानों ने वापस लौटकर मंडी में बेचा है। इसके अलावा कई किसानों की ओर से आरोप आए हैं कि खराब गेहूं बताकर प्रति ट्राली के हिसाब से कमीशन मांगा जा रहा है। इतना ही तीन दिन के भीतर भुगतान का निर्देश सरकार की ओर से दिया गया था लेकिन करीब एक हफ्ते से अधिक का समय लग रहा है। वैवाहिक सीजन चल रहा है, जिससे किसानों को तत्काल रुपयों की जरूरत है। । किसानों का तर्क है कि केन्द्र में 2015 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद हो रही है, जबकि मंडी में इससे 60 से 70 रुपए कम में मंडी का भाव है। खरीद केन्द्र में जो अतिरिक्त राशि दे रहे हैं, उतना ही कम दाम मंडी में है इसलिए किसान के लिए कोई अंतर नहीं होता।
Farmers withdrawing from selling wheat on support price
Farmers withdrawing from selling wheat on support price
साफ गेहूं में भी छन्ना अनिवार्य किया

जिले के कई हिस्सों से किसानों ने जानकारी दी है कि वह घर से गेहूं को पूरी तरह से साफ करने के बाद लेकर केन्द्र में पहुंचते हैं, तब भी केन्द्र में लगाए गए छन्ने में डालना पड़ता है। इसके लिए खरीदी केन्द्र प्रभारी और गेहूं सफाई का काम करने वालों की मिलीभगत रहती है। इसके लिए 20 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान भी करना होता है। किसानों ने कहा कि इस साल गेहूं की उपज सही नहीं है, पतला होने की वजह से अधिकांश किसानों को गुणवत्ता के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
स्लॉट बुकिंग की भी समस्या
इस बार सरकार ने केन्द्रों में भीड़ जमा नहीं हो इसके लिए स्लाट बुक करने का विकल्प किसानों को दिया है। यह विकल्प गेहूं की फसल की कटाई के पहले ही दिया गया, जिसके चलते किसान समय पर अपनी तारीख बुक नहीं करा पाए। वहीं कुछ किसानों को इसके बारे में जानकारी नहीं हुई। जिससे उन्हें अप्रेल महीने की तारीख नहीं मिली। जिन्हें तत्काल रुपयों की जरूरत है। वह मंडी की ओर जा रहे हैं।
ऋण की राशि अपनी मर्जी से काट रहा बैंक
खरीद केन्द्रों तक इस साल कम संख्या में आने की एक वजह यह भी बताई गई है कि जिला सहकारी बैंक ने सभी किसानों का ऋण कम्प्यूटर पर फीड करवा रखा है। जैसे ही संबंधित किसान की उपज का भुगतान किया जाएगा, उसी दौरान संबंधित किसान की ऋण का हिस्सा काटकर बैंक के खाते में जमा कर दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि तत्काल उन्हें रुपयों की जरूरत होने पर भी नहीं दी जा रही है। बैंक का भुगतान तो वह बाद में ब्याज के साथ देने को भी तैयार हैं लेकिन तात्कालिक रूप से रुपए मिलने पर वैवाहिक कार्यक्रमों एवं अन्य जरूरी खर्चों को पूरा किया जा सकता है। मंडी में व्यापारियों द्वारा जल्द ही रुपए भुगतान किए जा रहे हैं।

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