झज्जर हत्याकांड: 5 साल से मजदूरी कर रहा था पन्ना का चौधरी परिवार, हत्या की सूचना पर सन्न रह गए परिजन

हत्याकांड से पूरे गांव में मातम: बेटे के फोन के बाद हत्या की जानकारी मिल सकी

पन्ना/ पन्ना के पांच लोगों की हरियाणा के झज्जर में हत्या सेे सन्नाका खिंच गया है। पवई और अमानगंज के धकदा गांव में मातम पसरा हुआ है। इस बीच हत्याकांड के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से सबकी बेचैनी और बढ़ी हुई है। बताया जाता है कि सभी चौधरी परिवार से जुड़े हुए थे और रिश्ते में जीजा-साले का परिवार है। जो विगत पांच साल से हरियाणा के झज्जर में रहते हुए मजदूरी करते थे। ठेकेदार रामदर्शन ने भी झज्जर पुलिस के सामने इस बात को स्वीकार किया है। उसकी शिकायत पर ही पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज किया है।

ठेकेदार की माने, तो पांच साल के दौरान इन लोगों की किसी से विवाद नहीं हुआ, न ही किसी अन्य प्रकार के आपराधिक शिकायत पहुंची। लिहाजा हत्याकांड में पुरानी रंजिश की संभावना बहुत कम बताई जा रही है। ठेकेदार की मानें, तो 15 सितंबर को उसने करीब 42 हजार रुपए हाकीम को दिए थे। लेकिन, वारदात स्थल पर पुलिस को केवल 1200 रुपए मिले हैं।

पुलिस मान रही है कि मात्र दो दिन के अंदर 40 हजार से ज्यादा की राशि खर्च नहीं हो सकती। इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं, पहला पन्ना में रहने वाले परिजनों को भेज दिए या फिर दूसरा कारण है कि किसी ने लूट की नियत से वारदात को अंजाम दे दिया।

बेटे के फोन से पता चला हत्याकांड
हाकम का बेटा कर्ण पन्ना में रहता है। मंगलवार को वो माता-पिता को लगातार फोन कर रहा था। लेकिन, फोन रिसीव नहीं हुआ। जिसके बाद उसने पहचान के केशव के परिवार को फोन किया और बताया कि माता-पिता का फोन नहीं उठ रहा है। जिसके बाद केशव की पत्नी चंदा शाम को हाकिम के घर पहुंची। तो हत्याकांड का खुलासा हो सका।

पहले अचेत किया, फिर हत्या की
सूचना पर झज्जर पुलिस मौके पर पहुंची, फिर एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया। एफएसएल टीम का मानना है कि पांच लोगों की हत्या हुई है। लेकिन मौके पर संघर्ष के निशाना नहीं हैं। सभी के सिर पर किसी वजनदार वस्तु से वार किया गया है। संभवत: जहर या नशीला पदार्थ देकर सभी को अचेत किया गया है। उसके बाद सिर पर हमला कर हत्या की गई है।

लूट व रंजिश में उलझी पुलिस
झज्जर पुलिस हत्या कांड के कारणों को स्पष्ट नहीं कर सकी है। पुलिस लूट व रंजिश के चक्कर में हत्या का लेकर उलझी हुई है। पूरी जांच इसी आधार पर आगे बढ़ रही है। पुलिस का मानना है कि ऐसा कदम पुरानी रंजिश के चक्कर में उठाया जा सकता है। या फिर लूट के नियत से आए बदमाशों द्वारा असफल होने पर हत्याकांड को अंजाम दिया गया होगा।

11 बजे तक रहती है चहलकदमी
जिस क्षेत्र में हत्या हुई है, उस मकान के पीछे पार्क है। रात के समय स्थानीय लोग आठ से लेकर 11 बजे तक पार्क में टहलते रहते हैं। वहीं घटना भी प्रथम तल पर हुई है व मकान में खिड़की-दरवाजे भी नहीं हैं। ऐसे में अगर घटना रात के 11 बजे से पहले होती तो किसी न किसी को इसका जरूर पता लगता।

रात आठ बजे हुई थी साथी से बात
हाकिम व केशव के परिवार के बीच अच्छे संबंध रहे हैं। केशव भी मप्र का रहने वाला है। बताया जाता है कि हाकम की आखिरी बार सोमवार रात आठ बजे केशव से बात हुई थी। मंगलवार को विश्वकर्मा पूजा के चलते सुबह जल्दी सामान लाने की बात कही थी। जिस पर केशव ने बताया था कि वो तो अपना सामान ले आए हैं। अगर वो सामान नहीं लाए होते तो सुबह उनके घर जरूर जाते। वहीं मंगलवार को पूजन के बाद वह गुरुग्राम चला गया था। घर लौटा तो शाम को पत्नी चंदा ने घटनाक्रम के बारे में बताया।

एक माह पहले भेजे थे आठ हजार
ठेकेदार की माने, तो उसने हाकम को करीब 42 हजार रुपए 15 सितंबर को दिए हैं। लेकिन, झज्जर पुलिस को मौके पर मात्र 1200 रुपए बरामद हुए हैं। वहीं मृतकों के पन्ना में रहने वाले परिजनों की माने, तो फिलहाल हाकम ने रुपए नहीं भेजे हैं। एक माह पहले 8 हजार भेजा था।

ठेकेदार ने पुलिस को दी सूचना
मंगलवार को हत्या की जानकारी होने के बाद केशव के परिवार ने ठेकेदार रामदर्शन को बताया। उसके बाद ठेकेदार ने पुलिस को फोन कर जानकारी दी। इसके बाद झज्जर शहर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे और आला अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई।

सीसीटीवी और कॉल डिटेल से खुलेगा राज
पांच लोगों की जघन्य हत्याकांड को लेकर पुलिस हर पहलू से जांच में जुटी हुई है। घटनास्थल के दोनों तरफ कुछ दूरी पर स्थित घरों में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। जहां से सुराग मिलने की पुलिस को पूरी उम्मीद है। वहीं पुलिस मृतकों के मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगालने में लगी हुई है। जिससे कि पता लगाया जा सके कि आखिरी बार उनकी किन-किन लोगों से बातचीत हुई है।

एक ही कमरे में शव
इस हत्याकांड को लेकर रहस्य काफी गहराया हुआ है। कारण है कि सभी शव एक ही कमरे में मिले हैं। सवाल उठता है कि एक साथ पांच लोगों की हत्या कैसे हो सकती है? इन्होंने संघर्ष क्यों नहीं किया? किसी पर भी पहला हमला हुआ होगा, तो अन्य चार को जग जाना चाहिए था। लेकिन, ऐसी स्थिति क्यों नहीं बनी? ऐसे कई सवालों को खोजना झज्जर पुलिस के लिए चुनौती है।

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suresh mishra
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