मप्र में अपराधियों की शरण स्थली बन रहीं रेत खदानें, किसानों को रूला रहा कारोबार

मप्र में अपराधियों की शरण स्थली बन रहीं रेत खदानें, किसानों को रूला रहा कारोबार

By: Bajrangi rathore

Published: 10 Jan 2019, 10:41 PM IST

पन्ना। मप्र के पन्ना जिले के अजयगढ़ और धरमपुर क्षेत्र में करीब आधा सैकड़ा वैध-अवैध खदानें चल रही हैं। इन खदानों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता सोने के भाव रेत बेचकर मालामाल हो रहे हैं, लेकिन इसकी सजा ग्रामीणों और किसानों को भुगतनी पड़ रही है। कारोबारी बड़ी मात्रा में रेत निकालने भारी एलएनटी और लिफ्टर मशीनों का उपयोग कर रहे हैं। इन मशीनों की सहायता से नदियों से 100 फीट की गहराई तक से रेत निकाली जा रही है।

वाहनों की ओवरलोडिंग से क्षेत्र के पुराने पुल-पुलिया जर्जर हालत में हैं और सड़कें चलने लायक ही नहीं बची हैं। खेतों से रेत का अवैध उत्खनन होने और सड़कों के किनारे अवैध डंप होने से खेती नष्ट हो रही है। रेत के कारोबार में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक दलों के लोग जुड़े हैं।

इसी कारण सत्ता परिवर्तन के बाद खदान क्षेत्रों में वर्चस्व को लेकर जंग देखने को मिल रही है। रेत खदानों में अब तक सैकड़ों की संख्या में अवैध रूप से उपयोग हो रहीं मशीनें जब्त की गई हैं। कई बार कार्रवाई दस्ते पर भी हमले हो चुके हैं, इसके बाद भी रोक नहीं लग पा रही है।

दशहत फैलाने करते हैं हथियारों का उपयोग

केन, रुंझ सहित अन्य नदियों में हो रहे रेत उत्खनन के संरक्षण और स्थानीय लोगों में दहशत पैदा करने कारोबारियों द्वारा बड़ी मात्रा में हथियारों का उपयोग किया जा रहा है। खदान क्षेत्रों में दर्जनों की संख्या में हथियारबंद लोग दिख जाते हैं। बीते साल अमहा तिराहा से आधा दर्जन से अधिक हथियारबंदों के पकड़े जाने से पुष्टि भी हो चुकी है। खदान क्षेत्रों में आए दिन फायरिंग की बातें सामने आती रहती हैं।

तहसीलदार को बनाया था बंधक, एसडीएम पर दागी थी गोली

गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2017 को अजयगढ़ तहसीलदार को रेत कारोबारी के गुर्गों ने हथियारों के दम पर करीब 3 घंटे तक बंधक बनाए रखा था। खदान क्षेत्र में काम कर रहे शस्त्रधारी लोगों और कर्मचारियों की जानकारी देने एसपी ने धारा १४४ लगाई थी। इसके बाद भी खदान संचालकों द्वारा पुलिस प्रशासन को इनकी जानकारी नहीं दी गई थी।

कुछ समय पूर्व मोहाना रेत खदान का कवरेज करने गये मीडिया कर्मियों ने जब एलएनटी मशीन को कैमरे में कैद करने की कोशिश की तो आपराधिक तत्वों ने मोबाइल छीन लिया था। मप्र उत्तर प्रदेश की अंतर्राज्जीय सीमा के समीप स्थित चांदीपाठी रेत खदान क्षेत्र में कुछ वर्ष पूर्व केन नदी पर बनाए गए अवैध पुल को तोडऩे की कार्रवाई के दौरान तत्कालीन एसडीएम नाथूराम गौड़ और एसडीओपी जगन्नाथ सिंह मरकाम पर फायरिंग की गई थी।

वहीं अवैध रेत परिवहन करते जब्त ट्रकों को कारोबारी चंदौरा चौकी पुलिस की अभिरक्षा से लेकर उत्तर प्रदेश भाग निकले थे।

बंजर हो रहे खेत, सड़कें बर्बाद

नदी में जहां पर रेत खदानें स्वीकृत हैं वहां रेत कम होने के कारण कारोबारी अब बीच नदी की धार से रेत निकाल रहे हैं या फिर वे स्वीकृत स्थान से हटकर दूसरी जगह रेत का उत्खनन कर रहे हैं। ऐसे हालात में नदी किनारे के खेतों में रेत का अकूत भंडार है।

खेतों में मिट्टी की ऊपरी पर्त हटाने के साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली रेत निकलती है। यही कारण है कि अवैध रूप से कारोबार करने वाले लोग किसानों को प्रति ट्राली 100-200 रुपए देकर खेतों से रेत निकालकर उन्हें बंजर कर रहे हैं, जबकि वे यही रेत 5-7 हजार रुपए ट्रॉली बेचते हैं। इसके साथ ही बारिश के दौरान रेत को बेचने के लिए पूरे क्षेत्र में सड़कों के किनारे रेत के अवैध डंप लगा दिए जाते हैं।

सरेआम उल्लंघन

जिले में मोहना, फरस्वाहा, रामनई, बीरा और जिगनी की रेत खदानों को नई रेत नीति के तहत पंचायतों को सौंपा जाना था। जिसमें से मोहाना, रामनई और फरस्वाहा की रेत खदानें पंचायतों को सौंपकर उन्हें चालू भी करा दिया गया था। हालांकि खदानों के संचालन के लिए पंचायतों द्वारा जरूरी अनुमतियां नहीं ली गई थीं।

यदि ग्राम पंचायतें रेत बेचतीं तो लोगों को 3-4 हजार रुपए में एक ट्रक रेत मिल जाती, जबकि कारोबारी 25-30 हजार रुपए प्रति ट्रक रेत बेच रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश दीक्षित के अनुसार नदियों के किनारे रेत खनन के लिए भारी मशीनों का उपयोग होने से जलीय जीव-जंतु और वनस्पतियों का नष्ट होना गंभीर मामला है। रेत नीति का उल्लंघन, हथियारों का उपयोग खेतों की बर्बादी गंभीर मामले हैं। मामले को कोर्ट ले जाऊंगा।

Bajrangi rathore Desk
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