मडला के रास्ते टिड्डी दल का पन्ना में हमला

छतरपुर के नौगांव और बमीठा से होते हुए जिले की सीमा में किया प्रवेश

By: Shashikant mishra

Published: 24 May 2020, 08:50 PM IST

पन्ना. लाखों की संख्या में टिड्डियों का समूह रविवार की शाम को मडला के रास्ते पन्ना जिले में प्रवेश कर गया। शाम करीब साढ़े पांच बजे यह छतरपुर जिले के नौगांव और बमीठा से होता हुआ मडला से पन्ना जिले की सीमा में प्रवेश किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग टिड्डी दल को देखने के लिए मडला तक पहुंच गए थे। कई लोगों ने अपने-अपने खेतों और रिसॉर्ट आदि से वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया में वायरल किए।


गौरतलब है कि टिड्डी दल के संभावित हमले को लेकर प्रशासन की ओर से पूर्व में ही अलर्ट जारी कर दिया गया था। किसानों को फसलों को टिड्डी दल के हमले से फसल को बचाने के उपाए भी बताए गए थे। शाम को टिड्डी दल के हमले से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक भी मडला पहुंचे हुए थे। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया, शाम करीब ७ बजे तक यह दल टाइगर रिजर्व से लगी बगौहा पंचायत के आसपास था। इसके आगे मनौर य अजयगढ़ क्षेत्र में जाने की आशंका है।


जिला स्तरीय दल का गठन
जिले में टिड्डी दल के प्रकोप को देखते हुए कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने जिला स्तरीय दल का गठन किया है। निगरानी दल में उप संचालक कृषि एपी. सुमन नोडल अधिकारी हैं। इनके अलावा सहायक संचालक कृषि पन्ना जीएल. अहिरवार को सहायक, उप संचालक उद्यानिकी एमएम. भट्ट ,शोभित ठावरे यांत्रिक सहायक कृषि अभियांत्रिकी पन्ना, एके. त्रिपाठी वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ब्लॉक कार्यालय एवं एके. कुशवाहा कृषि विस्तार अधिकारी उप संचालक कृषि पन्ना को दल में सदस्य बनाया गया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिला स्तरीय दल टिड्डी दल की सूचना प्राप्त होने पर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर प्रभावित क्षेत्र में भ्रमण कर रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु आवश्यक कार्यवाही करेंगे। इसके साथ ही की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तत्काल इस कार्यालय को प्रस्तुत करेंगे।


टिड्डी दल से बचाव हेतु सलाह
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास पन्ना ने बताया टिड्डी नियंत्रण के लिए किसान भाई दो प्रकार के साधन अपना सकते हैं। जिसमें भौतिक साधन किसान भाई टोली बनाकर विभिन्न प्रकार के परंपरागत उपाय जैसे शोर मचाकर, ध्वनिवाले यंत्रों को बजाकर, डराकर भगाया जा सकता है। इसके लिए ढोलक, ट्रैक्टर, मोटर साईकिल का साइलेंसर, खाली टीन के डिब्बे, थाली इत्यादि से भी सामूहिक प्रयास से ध्वनि की जा सकती है। ऐसा करने से टिड्डी दल नीचे नही आकर फसलों पर न बैठकर आगे प्रस्थान कर जाता है। इसी प्रकार रासायनिक नियंत्रण में सुबह से कीटनाशी दवा ट्रेक्टर चलित स्प्रे पम्प, पावर स्प्रेयर द्वारा जैसे क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी. 1200 मिली. या डेल्टामेथरिन 2.8 ईसी. 600 मिली. अथवा लेम्डाईलोथिन 5 ईसी. 400 मिली., डाईफ्ल्यूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यू टी. 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। टिड्डी दल वर्तमान में ग्वालियर संभाग तक पहुंच गया है जो कि हवा की गति अनुसार चल रहा है। सभी किसान भाईयों से अनुरोध है कि सतत निगरानी रखें और टिड्डी दल का प्रकोप होने पर बताई गयी विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव करें।

Shashikant mishra Bureau Incharge
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