नोटबंदी के दो साल बाद सीधी हो रही बाजार की कमर

नोटबंदी के दो साल बाद सीधी हो रही बाजार की कमर

Bajrangi Rathore | Publish: Nov, 11 2018 01:31:28 AM (IST) Panna, Panna, Madhya Pradesh, India

नोटबंदी के दो साल बाद सीधी हो रही बाजार की कमर

पन्ना। नोटबंदी के दो साल बाद भी बाजार अब तक उबर नहीं पाया है। कई सेक्टर ऐसे हैं, जिनके जख्म नहीं भर सके हैं। ज्वैलरी, रियल एस्टेट सहित कई सेक्टर के लोग नोटबंदी को दो साल बाद भी खराब निर्णय बता रहे हैं। इसके कुछ पॉजीटिव असर भी सामने आए हैं।

बैंकों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के मामलों में 25 से 30 फीसदी इजाफा हुआ है। वहीं पहले शहर में 10 से 15 स्पैव मशीन लगी थीं अब इनकी संख्या 100 के पार पहुंच गई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर दो साल बाद इस दिवाली में अपनी पुरानी स्थिति की ओर लौट रहा है।

नोटबंदी के दो साल बाद आज भी पन्ना के प्रमुख कारोबार हीरे के बिजनेस में 40 फीसदी की गिरावट अभी तक बनी है। बैंकों की मानें तो जिले में कैशलेस ट्रांजेक्शन इन दो साल में 20 फीसदी से बढ़कर 45 फीसदी तक पहुंच गया है। उनका कहना है ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढऩे से एटीएम ट्रांजेक्शन में भी कमी आई है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से 8 नवंबर 2016 को रात 12 बजे से नोटबंदी की घोषणा की गई थी। घोषणा होते ही हाहाकार मच गया। लोग आज भी सुबह से सब्जी, दूध, ब्रेड आदि खरीदने तक के लिए वैधानिक नोट नहीं होने के किस्से सुनाते हैं।

वे कहते हैं कि शुरुआती दिनों में नए नोट नहीं आने से बैंकों और एटीएम में भीड़ लगती थी। पुराने नोट की जगह २ हजार के नए नोट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। कामकाज छोड़ बैंकों और एटीएम की लाइन में ही लगे रहना होता था। ये एटीएम भी एक से दो घंटों में ही खाली हो जाते थे।

हीरा और ज्वैलरी अब भी मंदी का शिकार

नोटबंदी से लोगों की खरीदी क्षमता प्रभावित हुई है। इससे दैनिक उपयोग की सामग्री को छोड़कर अन्य सेक्टरों में दो साल बाद भी करीब ४० फीसदी तक मंदी का असर देखा जा रहा है। हीरा करोबार, सोने-चांदी के गहने, रियल एस्टेट सेक्टरों में अभी भी मंदी बताई जा रही है।

हालांकि ऑटोमोबाइल सेक्टर में उठाव आने का बड़ा कारण बाइक का दैनिक जरूरत की चीज के रूप में उपयोग होना है। जिले के ग्रामीण अंचलों में जहां बैंकों की शाखाएं कम हैं वहां अभी तक लोगों को समस्या हो रही है। लोगों को पहले की तरह अभी भी रुपए के लिए भटकना पड़ रहा है।

कुछ इस तरह था घटनाक्रम

8 नवंबर: नोटबंदी की घोषणा की गई। साथ ही 30 तक 500 और एक हजार रुपए के नोट बदलने की डेडलाइन घोषित की गई।
9 नवंबर: घोषणा के दूसरे दिन पेट्रोल पंपों, बैंकों और एटीएम बूथों में लगी लंबी कतारें।
10 नवंबर: लोगों के पास रुपए नहीं होने से मार्केट में 90 फीसदी तक घटी खरीदारी, लोग जरूरी कामों के लिए नकदी की व्यवस्था करने में रहे परेशान।
12 नवंबर: बड़े नोट नहीं होने से रिफिल करने के एक से दो घंटे के अंदर ही खाली हो जाते थे एटीम। बैंकों में व्यवस्था बनाने के लिए पुलिसबल ंका लेना पड़ा सहारा।
20 नवंबर: 100 रुपए की कमी पर दो हजार का नोट होने के बाद भी दुकानदार नहीं देते थे सामान। समस्या यह थी कि यदि किसी ने दो-तीन सौ रुपए का सामान खरीदा तो दुकानदार को 100-100 रुपए के 17-18 नोट देने पड़ते, जबकि उस समय एक नोट भी मुश्किल से मिल पा रहा था।
30 नवंबर: नोटबंदी के दौरान बंद किए गए नोटों को बदलने की अंतिम डेडलाइन थी। अब तक दैनिक जरूरतों को छोड़कर शेष सेक्टरों का मार्केट ९० फीसदी से भी अधिक लुढ़क चुका था। लोगों के पास दैनिक उपयोग की फुटकर चीजें खरीदने के लिए तक रुपए नहीं थे। अभी तक मार्केट में 500 रुपए के नोट नहीं आने से समस्या यथावत बनी थी।

डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष श्रीनिवास रिछारिया के अनुसार नोटबंदी के पहले साल तो हीरा कारोबार 5-10 फीसदी ही बचा था। दूसरा साल पूरा होने तक मार्केट 60 फीसदी तक उठा गया, कारोबार में 40 फीसदी की गिरावट अभी तक बनी है। दैनिक जरूरतों को छोड शेष सभी सेक्टरों में दो साल बाद भी 40 से 50 फीसदी तक मंदी का असर देखा जा रह रहा है।

चार्टर्ड एकाउंटेंट मनीष भगत का कहना है कि नोटबंदी का पॉजीटिव और निगेटिव दोनों ही प्रकार का असर हुआ है। पॉजीटिव असर यह हुआ है कि नकदी के बजाए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ा है। जो रुपया लोगों के घरों में डंप था वह बैंकों के माध्यम से मार्केट तक पहुंच रहा है। बैंकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। वहीं निगेटिव असर ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में ज्यादा रहा, जहां बैंकिंग सेक्टर की पहुंच कम है। काला धन भी नहीं निकला।

सेल्स मैनेजर सुरेंद्र ठाकुर के अनुसार बीते साल कारोबार गंभीर रूप से प्रभावित था। इस साल अच्छी बिक्री हो रही है। दीपावली में करीब डेढ़ सौ बाइक बेची है। यह कहा जा सकता है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर के दो पहिया वाहनों का मार्केट नोटबंदी की मंदी से उबर गया है। इस साल बाइक के कारोबार में इजाफा हो रहा है।

एसबीआइ मेन ब्रांच के मैनेजर एके रावत के अनुसार आरबीआई ने नकदी फ्लो बढ़ाकर अब स्थिति सामान्य कर दी है। इससे अब मार्केट में नकदी की समस्या नहीं है। पन्ना जिले में कैशलेस ट्रांजेक्शन 20 फीसदी से बढ़कर 45 से 50 फीसदी तक पहुंच गया है।

स्वैप मशीनों की संख्या भी 10-15 से बढ़कर 100 करीब हो गई है। कैशलेंस ट्रांजेक्शन बढऩे से ऑनलाइन ठगी की आश्ंका बढ़ी है। इससे बैंकर्स द्वारा उपभोक्ताओं को अपना एटीएम नंबर, सीवीसी नंबर और ओटीपी नंबर आदि किसी को भी नहीं बताने के लिए सचेत किया जा रहा है।

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