पन्ना टाइगर रिजर्व में 24 बाघों का हो रहा नामकरण संस्कार

बाघों के शरीर की धारियों के विशेष पैटर्न से वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट करते हैं बाघांंे की पहचान
पहचान करने सहित विभिन्न क्रियाकलापों पर नजर रखने और मॉनीटिरिंग के लिए बनाई जा रही हर बाघ की आईडी
नई आईडी के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन को निगरानी में मिलेगी सहूलियत
आगामी एक सप्ताह चल चलेगी बाघों के नाम करण की प्रक्रिया

By: Shashikant mishra

Published: 16 May 2020, 11:31 AM IST

शशिकांत मिश्रा पन्ना. बाघ पुनस्र्थापन योजना की सफलता से पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। बड़ी संख्या में बड़े हो रहे शावकों के समुचित प्रबंधन के लिए प्रत्येक बाघ का नामकरण संस्कार कराया जा रहा है। यहां बाघों का नाम करण संस्कार कोई पंडि़त नहीं बल्कि टाइगर रिजर्व और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ( डब्ल्यूआईआई) की टीम मिलकर कर रही है।


गौरतलब है कि जिस प्रकार से हर इंसान में हाथेली की रेखाओं का अलग पैटर्न होता है, वे किसी दूसरे व्यक्ति के पैटर्न से मेल नहीं खाती हैं, उसी तरह से बाघों के शरीर मंे पाई जाने वाली धारियां हर बाघ में एक विशेष पैटर्न मंे होती है, जो किसी दूसरे बाघ के पैटर्न से मेल नहीं खातीं। सामान्य लोगों को भले ही सभी बाघों में धारिया समान दिखाई देती हैं लेकिन वाइल्ड लाइफ से जुड़े एक्सपर्ट बाघों के शरीर की धारियों के पैटर्न के आधार पर ही उनकी पहचान करते हैं। इसीलिए प्रत्येक बाघ की बेहतर मॉनीटरिंग के लिए उनकी आईडी बनाई जाती है। यह एेसे ही है जैसे हर बच्चे को पहचान के लिए नाम दिया जाता है।


सघन मॉनीटरिं के लिए पहचान जरूरी
पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर केएस भदौरिया ने बताया, एक साल से अधिक उम्र के बाघों की आईडी बनाई जा रही है। इसमें नंबरिंग के आधार पर प्रत्येक बाघ को विशेष पहचान दी जा रही है। इसके आधार पर हर बाघ की मॉनीटरिंग आसानी से की जा सकेगी। साथ ही बाघों के टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन के अलावा पलायन करने पर इन्हीं आईडी के हिसाब से पहचान की जा सकेगी। रानीपुर सेंचुरी में गई बाघिन २४२ और सरभंगा गई बाघिन २१३ (२२ ) की पहचान इन्हीं आईडी से की गई थी। उन्होंने कहा, यह एेसे ही है जैसे इंसानों के आधार कार्ड बनाए जाते हैं।


37 आईडी से पहले से ही हो रही मॉनीटरिंग
पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ३७ आईडी के माध्यम से पूर्व से ही बाघों की निगरानी कर रहा था, अब २४ और बाघों की आईडी बनाकर उन्हें नंबरों के आधार पर विशेष नाम दिया जा रहा है। इससे अब टाइगर रिजर्व प्रबंधन ६१ आईडी के माध्यम से बाघों की निगरानी करेगा। इससे बाघों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। साथ ही बाघों के उनके पलायन करने की स्थिति में संबंधित जिलों के वन अधिकारियों को भी जानकारी भेजी जा सकेगी।


नाम मंे छिपी पूरी वंशावली, एेसे समझे बाघों के नाम की कोडिंग
पन्ना टाइगर रिजर्व में में बाघों को दिए जाने वाले नाम में किसी शब्द का उपयोग करने के बजाए अंकों का उपयोग किया जा रहा है। यह किसी कोड की तरह ही होता है। बाघ के नाम के साथ ही उसकी पूरी वंशावली का पता चल जाता है। वर्तमान में बाघों के नाम पी- २३४ ( ३१), पी-२३४ (३१ ) और पी-३२४ (३३) इस प्रकार से नाम दिए जा रहे हैं। पी-२३४ ( ३१) का अर्थ हुआ पन्ना के बाघिन टी-२ के तीसरे लिटर की चाथी संतान के तीसरे लिटर का पहला बच्चा । इसी तरह से अन्य बाघों की कोडिंग भी की जा रही है। पी- २७१ और पी-२७२ दिए गए हैं। इनका अर्थ हुआ बाघिन टी-२ के सातवें लिटर की पहली और दूसरी संतान।

एक साल से ऊपर के बाघों की आईडी बनाई जा रही है। इससे उनकी पहचान और मॉनीटरिंग बेहतर ढग़ से करने में आसानी होगी। २४ नई आईडी बनाई जा रही हैं। बाघों के पलायन करने उनकी पहचान में आसानी होगी।

केएस भदौरिया, फील्ड डायरेक्टर पन्ना टाइगर रिजर्व

Shashikant mishra Bureau Incharge
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