एनटीसीए ने लौटाई पन्ना टाइगर रिजर्व के पयर्टक वाहनों की संख्या बढ़ाने संबंधी मांग

बाघ संरक्षण के बजाए आर्थिक प्रबंधन में टाइगर रिजर्व प्रबंधन का ज्यादा जोर
एनटीसीए ने कहा, पहले पूरा टाइगर कंजर्वेशन प्लान दो, टीसीपी की समीक्षा के पहले पर्यटक संख्या बढ़ाने के प्लान की समीक्षा संभव नहीं

By: Shashikant mishra

Published: 03 Jan 2020, 01:19 PM IST

पन्ना. नव वर्ष के पूर्व एक युवा बाघ की मौत की जानकारी सामने आने के बाद अब टाइगर रिजर्व प्रबंधन की लापरवाही के एक के बाद एक करके मामले सामने आ रहे हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) को पूरा टाइगर कंजर्वेशन प्लान भेजे बगैर ही यहां पर्यटन के लिए वाहनों की संख्या बढ़ाए जाने की अनुमति मांगी थी, जिसे एनटीसीए ने सिरे से नकार दिया है। एनटीसीए ने साफ कहा है कि जब तक उसे पूरा टाइगर कंजर्वेशन प्लान नहीं मिलता है और उसकी समीक्षा नहीं हो जाती तब तक पर्यटन के लिए वाहनों की संख्या बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।


गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बीते साल अकोला बफर में सफारी की शुरुआत की थी। आगामी दिनों प्रबंधन की योजना बफर में ही और अजयगढ़ क्षेत्र में टूरिज्म को शुरू करने की थी। इसके पीछे बफर में सुरक्षा को मजबूत करना भी उद्देश्य रहा है। इसी कारण से टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एनटीसीए से पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटक वाहनों की संख्या को बढ़ाए जाने की अनुमति दिए जाने संबंध आवेदन दिया था।


टीसीपी की समीक्षा के बगैर अनुमति नहीं
टाइगर रिजर्व में पर्यटक वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए एनटीसीए ने अनुमति देने से इंकार कर दिया है। मामले में एनटीसीए की ओर से कहा गया कि पूरा टाइगर कंजर्वेशन प्लान मिले बगैर और उसकी समीक्षा किए बगैर पर्यटक वाहनों की संख्या को बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। एनटीसीए के इस निर्णय से पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटक वाहनों की संख्या बढऩे की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लग गया है। इससे पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को जरूर थोड़ी मायूसी हो सकती है।


बाघ संरक्षण के बजाए आर्थिक प्रबंधन पर ज्यादा जोर
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे का आरोप है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के साथ समझौता हो रहा है। यहां का टाइगर कंजर्वेशन प्लान अभी तक एनटीसीए से एप्रूव नहीं है। उनका आरोप है कि पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन बाघों के संरक्षण के बजाए आर्थिक प्रबंधन में ज्यादा ध्यान दे रहा है। टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा बड़ी संख्या में निजी वाहनों को पेट्रोलिंग के नाम पर उपयोग किया जा रहा है।


एक टाइगर रिजर्व का टीसीपी (टाइगर कंजर्वेशन प्लान) ५ व १० साल के लिए बनाया जाता है। बाद में यह रिवाइज होता रहता है। पन्ना टाइगर रिजर्व का टीसीपी सालों से लंबित होने के बाद भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वाहन संख्या बढ़ाने की अनुमति मांगना बाघों की सुरक्षा से समझौता है। इससे साफ है कि पार्क प्रबंधन का जोर बाघ संरक्षण के बजाए आर्थिक प्रबंधन पर ज्यादा है। यह वाइल्ड लाइफ के लिए बेहद खतरनाक है।
अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

Shashikant mishra Bureau Incharge
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