पन्ना टाइगर रिजर्व के बाघों के दीवानी हुई दुनिया, बरस रहे डॉलर

पर्यटकों की संख्या में इजाफा: बाघ पुनस्र्थापन योजना की अभूतपूर्व सफलता के बाद बढ़ा विदेशी पर्यटकों का रुझान

By: Shashikant mishra

Published: 11 Dec 2017, 01:08 PM IST

शशिकांत मिश्रा @ पन्ना। पन्ना के बाघों का आकर्षण दुनियाभर में सिर चढ़कर बोल रहा है। बाघ पुनर्स्थापन योजना की अभूतपूर्व सफलता के बाद पन्ना में आने वाले विदेशी पर्यटकों का ग्राफ दोगुना से भी आगे बढ़ गया है। पन्ना टाइगर रिजर्व में हो रही बाघों की जबरदस्त साइटिंग की गूंज सात समंदर पार से भी लोगों को यहां की शानदार वादियों तक खींचकर ले आती है।

बीते एक साल में आए दिन बाघों को टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन के अलावा सामान्य जंगलों में एवं सड़को के किनारे दिखने की खबरें सुर्खियां बनी हैं। जिससे टूरिज्म में जबर्दस्त इजाफा हो रहा है। पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं।

2008 में बाघविहीन घोषित

गौरततलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में शिकारियों और डकैतों के मूवमेंट के कारण वर्ष 2008 में इसे राजस्थान के सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की तरह ही बाघविहीन घोषित कर दिया गया गया था। इसके बाद वर्ष 2009 में यहां दो चरणों वाली बाघ पुनर्स्थापन योजना शुरू की गई।

देसी नुस्खे से बाघों की वंश वृद्धि

विशेषज्ञों को भी उम्मीद थी कि यहां बाघों का संसार दोबारा बसाने में 10 से 15 साल लग सकते हैं, लेकिन बाघों की वंश वृद्धि के लिए तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर श्रीनिवास मूर्ति ने देसी नुस्के से बाघों की वंश वृद्धि का जो तरीका अपनाया उसने अपने परिणामों से दुनिया को चकित कर दिया।

बाघों की संख्या का रिकॉर्ड

अभी यहां बाघ पुनर्स्थापन योजना शुरू हुए 8 साल ही हुआ है और बाघों की संख्या का यहां रिकॉर्ड बन चुका है। संस्थापक बाघों के अलावा यहां करीब 70 शावक जन्म ले चुके हैं। आज यहां बाघों और शावकों की संख्या 35 से 40 के बीच बताई जाती है। यह टाइगर रिजर्व के इतिहास की सबसे बड़ी संख्या है।

अनोखा कीर्तिमान

इससे पहले यहां बाघों की सबसे अधिक संख्या 34 दर्ज थी। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के कुनबे में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने जहां एक ओर पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा वहीं दूसरी ओर पालतू बाघिनों को भी जंगली बनाकर ब्रिडिंग कराने को लेकर अनोखा कीर्तिमान भी बनाया। इसके बाद ही पन्ना टाइगर रिजर्व का यह प्रोजेक्ट और यहां के बाघ दुनियाभर के लिए रिसर्च का विषय बन गए।

बाघों की हो रही साइटिंग
टाइगर रिजर्व से जुड़े सूत्रों के अनुसार पन्ना टाइगर रिजर्व में बीते दो-तीन सालों से बाघों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही बाघों की साइटिंग भी जबर्दस्त हो रही है। कई बार तो पर्यटकों को दो-तीन बाघ एक साथ देखने को मिल जाते हैं। बाघ घंटों-घंटों तक एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं। बाघों के साइटिंग की जानकारी विदेशों में भी है। यही कारण है कि जो बांधवगढ़ और पेंच में बाघ देखने से मायूस रह जाते हैं उन्हें यहां एक-दो दिन में ही बड़ी आसानी से बाघ के दर्शन हो जाते हैं। यही कारण है कि यहां विदेश पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है।

ऐसे बने सिरमौर
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की मॉनीटरिंग में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बाघ पुनस्र्थापन योजना के प्रारंभिक चरण में सभी बाघिनों को कॉलर आईडी पहनाई गई थी। जिनसे पार्क प्रबंधन उनके एक-एक पग और सांसों तक को गिन सकता था। इसके अलावा टेलीमैट्री का भी उपयोग किया जा रहा है। मैदानी अमले को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया गया। अब यहां का निगरानी तंत्र इतना मजबूत हो चुका है कि बाघों की निगरानी के लिए ड्रोन का सहारा लेने के लिए प्रयोगिक स्तर का काम पूरा हो चुका है। जल्द ही यहां ड्रोन से बाघों की निगरानी का काम भी शुरू हो जाएगा।

कंबोडिया दोहराएगा बाघ पुनर्स्थापन का मॉडल
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन योजना की अप्रत्याशियत सफलता से प्रोत्साहित होकर कंबोडिया अपने यहां बाघों के उजड़े संसार को दोबारा बसाने के लिए पन्ना के बाघ पुनस्र्थापन मॉडल को अपनाना चाहता है। इसके लिए कंबोडिया की राजधानी में 24 से 29 सितंबर तक एक्सपर्ट कमेटी की मीटिंग आयोजित की गई थी।

जिसमें कंबोडिया के वाइल्ड लाइफ और टाइगर से जुड़े एक्सपर्ट के साथ ही भारत के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) और ग्लोबल टाइगर फोरम (जीटीएफ) के प्रतिनिधि हिस्सा लिए। पन्ना टाइगर रिजर्व से जुड़े अपने अनुभव एक्सपर्ट कमेटी को बताने के लिए टाइगर रिजर्व के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर. श्रीनिवास मूर्ति ने भी मीटिंग में हिस्सा लिया।

कोलंबिया ने सीखी बाघ मॉनीटिरिंग
टाइगर रिजर्व के बाघ पुनस्र्थापन योजना की सफलता का अध्ययन करने और बाघों की मॉनीटरिंग के तकनीकी पहलुओं की जानकारी लेने के लिए कोलंबिया के १८ वरिष्ठ अधिकारियों का दल अक्टूबर में दो दिनों के प्रवास पर पन्ना टाइगर रिजर्व पहुंचा था। यहां पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा कोलंबिया के अधिकारियों के दल को बाघों के मॉनीटरिंग की आधुनिक तकनीक ड्रोन एवं टेलीमेट्री का प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्य के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआईआई) देहरादून के तीन वरिष्ठ अधिकारी भी पन्ना पहुंचे थे। इसके साथ ही कोलंबिया के दल ने पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्तमान में बाघों के मॉनीटरिंग की स्थिति और भविष्य की परिस्थितियों और उनसे पार पाने के उपायों के संबंध में भी जानकारी ली। कोलंबिया से आए वरिष्ठ अधिकारियों के दल में पर्यावरण मंत्रालय कोलंबिया के प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, वन एवं वन्यप्राणी विभाग के महानिदेशक, सहायक महानिदेशक, महानिरीक्षक, सहायक महानिरीक्षक, क्षेत्र संचालक, पर्यटन विभाग कोलंबिया के प्रमुख सचिव, महानिदेशक, अन्तर्राष्ट्रीय कॉपरेशन विभाग के निदेशक, टूरिस्ट इन्वेस्ट विभाग के निदेशक, उप निदेशक, प्रोविन्सियल गवर्नमेंट रिप्रजेंटेटिव स्वे सम ईंग, प्रोविन्सियल गर्वनर, मुख्य प्रशासक मोंडुलकिरी, प्रोविंस एवं उप मुख्य मोंडुलकिरी तथा विश्व प्रकृति निधि कंबोडिया के कंट्री डायरेक्टर, रिजनल इनीसियेटिव लीड, लैंड स्केप मैनेजर एवं टूरिज्म मैनेजर शामिल रहे।

Shashikant mishra Bureau Incharge
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