धर्मशाला में भरपूर और यात्रियों को दो माह से पेयजल नसीब नहीं, यात्री बाजार से पानी खरीदने को हुए मजबूर

दुकानों पर निर्भर यात्री और स्टॉफ

पन्ना. प्राणनाथ बस स्टैंड के ऊपरी हिस्से में धर्मशाला संचालित है और नीचे यात्री प्रतीक्षालय और दुकानें हैं। बस स्टैंड भवन की छत में धर्मशाला और बस स्टैंड के लिए अलग-अलग पानी की टंकियां हैं। इसके बाद भी बीते दो माह से प्राणनाथ बस स्टैंड के दोनों वाटर कूलरों से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है, जबकि धर्मशाला को पर्याप्त पानी मिल रहा है। आशंका जताई जा रही है कि धर्मशाला को पानी मिलता रहे इसके लिए यात्रियों वाले हिस्से के पानी को रोक दिया जाता है।

रात में पानी नहीं मिलने से यात्रियों को होती है परेशानी
इससे यात्री और यहां से गुजरने वाली एक सैकड़ा से अधिक बसों का स्टॉफ पानी के लिये दुकानों पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि प्राणनाथ बस स्टैंड से प्रतिदिन एक सैकड़ा से भी अधिक बसों का आवागमन होता है। बस स्टैंड के प्रतीक्षालय में वाहनों का इंतजार करने वाले यात्रियों, वाहनों में सफर करने वाले और बस स्टॉफ के पेयजल की व्यवस्था के लिए स्टैंड परिसर में दो वाटर कूलर रखे हैं। इनमें बीते दो माह से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। इससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है, जबकि बस स्टैड में ही प्रतीक्षालय के ऊपरी हिस्से में संचालित धर्मशाला में भरपूर पानी मिल रहा है।

शिकायतों के बाद भी नहीं सुनवाई
स्थानीय दुकानदरों ने बताया कि उन्होंने वाटर कूलरों से पानी नहीं आने की समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका प्रबंधन को जानकारी दी है। पूर्व पार्षद के माध्यम से भी नपा के अधिकारियों को वाटर कूलर से पानी नहीं आने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। इससे यात्री और स्टॉफ पानी के लिए परेशान है। अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शिकायतों पर भी सुनवाई नहीं हो रही है।

गड्ढ़ों से परेशान रहे लोग
बस स्टैंड के आसपास की सड़कें गढ्डों में तब्दील हो चुकी हैं। बड़े-बड़े गड्ढ़े हादसों को न्योता दे रहे हैं। गुल्लायची मोहल्ला से बस स्टैंड वाली रोड व बस स्टैंड से बेनीसागर वाली रोड में कई बड़े-बड़े गड्ढे हैं। यहां कचरे का भी ढेर रहता है। बस स्टैंड में रात्रि विश्राम व रात में ठहरने वाले यात्रियों के लिए नगर पालिका की तरफ से एक जगह अलाव की व्यवस्था जा रही है। उसमें भी एक दिन छोड़ एक दिन लकडिय़ों को पहुंचाया जा रहा है।

Anil singh kushwah Desk
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