पुलिस का दावा प्रदेश में नहीं दस्यु समस्या, टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने डकैतों से सुरक्षा के नाम पर मांगे 22 लाख रुपए

डकैत मुक्त प्रदेश में डकैतों पर नजर रखने पेट्रोलिंग कैंप बनाने के लिए टाइगर रिजर्व ने मांगे रुपए
चंद्रनगर रेंज में वर्ष २००५ में एक ही साल में सबसे अधिक ४-५ बाघों का हुआ था शिकार
इसी क्षेत्र के एक शिकारी से अंतरराष्ट्रीय वन्य प्राणी तस्कर गिरोह से जुड़े होने की बात भी आई थी सामने
प्रदेश सरकार डकैत मुक्त प्रदेश होने का दावा करती है और टाइगर रिजर्व डकैतों पर नजर रखने के लिए बनाना चाहता है पेट्रोलिंग कैंप



By: Shashikant mishra

Updated: 06 Jan 2020, 01:03 PM IST

पन्ना. प्रदेश सरकार एक ओर प्रदेश के डकैतों की समस्या से मुक्त होने की बात कर रही है तो दूसरी ओर पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन को अभी भी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में डकैती की गतिविधियों की आशंका है। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने घुसपैठियों और डकैतों पर नजर रखने के लिए बफर जोन क्षेत्रों में चार पेट्रोलिंग कैंप बनाने के लिए बजट की मांग की है। इससे पन्ना टाइगर रिजर्व से लगे जंगलों में डकैतों के मूवमेंट अभी भी होने की आशंका खड़ी होने लगी है। जबकि अभी तक क्षेत्र के डकैत मुक्त होने का दावा किया जाता रहा है। बीते कई सालों से क्षेत्र में कोई डकैत गिरोह सक्रिय होने की जानकारी भी सामने नहीं आई है।


मिनिस्ट्री ऑफ इनवार्नमेंट,फारेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज को बीते साल जुलाई में खिले गए पत्र में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से छतरपर जिले के किशनगढ़ बफर जोन के बिला और झरकुआ में पेट्रोलिंग कैंप बनाने की बात कही गई है। इसी प्रकार से पन्ना जिले में अमानगंज बफर जोन के जसवंतपुर और पन्ना बफर जोन के छापर नाला में पेट्रोलिंग कैंप बनाया जाना प्रस्तावित है। पत्र में टाइगर रिजर्व द्वारा लिखा गया है उक्त पेट्रोलिंग कैंपों का निर्माण संबंधित क्षेत्र में शिकारियों, वन्य प्राणी तस्करों की घुसपैठ रोकने और डकैतों पर नजर रखने के लिए किया जाना है। चारो पेट्रोलिंग कैंपों को बनाने के लिए करीब २२ लाख रुपए की मांग की गई है।


ठोकिया, पप्पू यादव और मोहन गड़रिया गिरोह का रहा है मूवमेंट
गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगलों में एक समय ठोकिया, पप्पू यादव और मोहन गड़रिया गिरोह का भी आतंक रहा है। चंद्रनगर रेंज क्षेत्र में ही वर्ष २००५ में एक साल में सबसे अधिक ४-५ बाघों के शिकार की बात सामने आई थी। इसके साथ ही छतरपुर जिले के ही एक सिकारी गिरोह के अंतरराष्ट्रीय वन्य प्राणी तस्कर गिरोह से संबंध स्पष्ट हुए थे। जिसे तत्कालीन डीआईजी छतरपर ने स्वीकार किया था और तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वन एमके रॉय ने अपनी नोटशीट में भी पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सक्रिय शिकारी गिरोह के अंतरराष्ट्रीय वन्य प्राणी तस्कर गिरोह से संबंध होने की बात लिखी थी और इसी आधार पर उन्होंने पन्ना टाइगर रिजर्व में हुए शिकार के मामलों की सीबीआई जांच की मांग भी की थी।


सुरक्षा पुख्ता करने बनाए गए हैं अस्थायी कैंप
गौरतलब है कि कोर क्षेत्र की तरह ही बफर क्षेत्र में भी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पन्ना टाइगर के बफर क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ७५ नवीन अस्थायी सुरक्षा कैंप बनाए गए हैं। इसी तरह से कई पेट्रोलिंग कैंप भी बनाए जा रहे हैं। क्षेत्र में बीते कई सालों से डकैत गिरोह की गतिविधियों की बात सामने नहीं आई है। इसके बाद भी क्षेत्र में सघन वन क्षेत्र होने और सतना-बांदा के सीमावर्ती इलाकों में डकैतों की छुटपुट मौजूदगी से आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इससे टाइगर रिजर्व के इस प्रयास को सुरक्षात्मक तरीके से भी देखा जा रहा है।



रेंज क्षेत्र में कोईभी डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है। पुलिस के पास वन्य प्राणियों के एक भी शिकार के मामले भी दर्ज नहीं हैं।
अनिल महेश्वरी, डीआईजी छतरपुर रेंज


क्षेत्र में कहीं से भी डकैती गतिविधियों की सूचना नहीं मिली है। सघन वन क्षेत्र होने से ऐसी गतिविधियों से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। हो सकता है टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने सुरक्षात्मक उपायों के तहत ऐसा किया हो। इस संबंध में टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात करेंगे।
मयंक अवस्थी, एसपी पन्ना

प्रदेश सरकार प्रदेश के डकैत समस्या मुक्त होने का दावा करती है। जबकि पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा सुघपैठियों के साथ डकैतों पर भी नजर रखने के लिए पेट्रोलिंग कैंप बनाने की बात कही जा रही है। टाइगर रिजर्व प्रबंधन की मांग प्रदेश सरकार के दावों की बिलकुल विपरीत है। हम मामले में सीएम से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हैं।
अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट


पन्ना टाइगर रिजर्व में बीते १०-१५ सालों में डकैतों के मूवमेंट जैसी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। नि:संदेह टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने दुरुपयोग के लिए राशि की मांग की होगी।
सतानंद गौतम, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा

Shashikant mishra Bureau Incharge
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