चने में तेवड़े का तड़का: तेवड़े को लेकर प्रशासन और नेता आमन-सामने

कलेक्टर ने अधिकारियों से तेवड़ा युक्त चना नहीं खरीदने की दी हिदायत
नेताओं ने किसानों से कुछ परसेंट तेवड़ा मिश्रित चना खरीदने के लिए कृषि मंत्री को लिखे पत्र
चने के समान आकार का होने के कारण ग्रेडिक के दौरान भी नहीं निकलता है तेवड़ा

By: Shashikant mishra

Updated: 10 May 2020, 03:22 PM IST

पन्ना. जिले के ५० खरीदी केंद्रों में इन दिनों समर्थन मूल्य पर किसानों से चना, मसूर और सरसो की खरीदी चल रही है। खरीदी केंद्रों में पहुंच रहे चने की फसल में तेवड़ा ( बटरा) पाए जाने को लेकर किसानों की तौल रोकी जाने लगी है। किसानों के सेंपल रिजेक्ट किए जा रहे हैं। इसको लेकर अब प्रशासन और जिले के नेता आमने-सामने आ गए हैं। कलेक्टर ने जिले के अधिकारियों ने तेवड़ा युक्त चना नहीं खरीदने की सख्त हिदायत दी है तो दूसरी ओर जिले के नेताओं ने कृषि मंत्री को पत्र लिखकर तेवड़ा से किसानों को छूूट दिए जाने की मांग की है।


यह कहा कलेक्टर ने
कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कहा, किसानों द्वारा उपार्जन केन्द्रों पर चना लाए जाने पर तेवडा मिश्रित चना नहीं खरीदा जाए। यदि किसान चने की फसल से तेवड़ा को अलग कर चना लाता है तो ही उसे क्रय किया जाए। इस संबंध में किसानों को समझाइश दी जाए कि वे तेवडा मिश्रित चना नहीं लाएं। तेवडा मानव शरीर के लिए नुकसानदेय है। चने की फसल की निदाई करते वक्त तेवडे के पौध को खरपतवार की तरह फसल से पृथक कर दें। उन्होंने कहा कि उपार्जन केन्द्र पर आने वाले प्रत्येक किसान को तेवडे से होने वाले नुकसान की जानकारी दें और फसल से तेवडा छानकर, बीनकर या अन्य किसी विधि से पृथक कर ही बेंचे। कृषि उपज मंडियों में ही चने को विक्रय कर सकते हैं इस बात की समझाइश उन्हें दी जाए।


नेताओं ने कृषि मंत्री को लिखा पत्र
किसानों को तेवड़ा चुक्त चना खरीदने की मांग को लेकर जिपं अध्यक्ष रविराज यादव और भाजपा जिलाध्यक्ष रामबिहारी चौरसिया ने कृषि मंत्री कमल पटेल को पत्र लिखा है। इस पत्र में बताया गया, किसान चने के साथ तेवड़ा की बुवाई नहीं करते हैं। यह खरपतवार के रूप में उग आता है। खेत में ही नष्ट करने के दौरान भी यह कुछ मात्रा में रह ही जाता है। बीज निगम से खरीदने जाने वाले बीज में भी कुछ प्रतिशत में तेवड़ा होता है इससे यह पुन: खेतों में सक्रिय हो जाता है। तेवड़ा चने चने के समान आकार का होने के कारण ग्रेडिंग में भी नहीं निकलता है। बीते सालों तक किसानों से तेवड़ युक्त चना खरीदा जाता रहा है। इस साल एक भी तेवड़ा दिख जाने पर किसानों के सेंपल रिजेक्ट किए जा रहे हैं। किसानों से खरीदी नहीं होने के कारण उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इससे जिले में किसानों से तेवड़ा युक्त चना खरीदने की अनुमति देने की मांग की गई है।

Shashikant mishra Bureau Incharge
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned