वन विभाग की अभिनव पहल: अब पन्ना टाइगर रिजर्व का भ्रमण कर पर्यटन प्रेमी देंगे बाघ संरक्षण पर अपनी राय

बाघ पुनस्र्थापना के 10 साल पूरे होने पर कार्यक्रम

पन्ना. बाघ पुनस्र्थापना योजना के 10 साल पूरे होने पर मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग की ओर से पर्यावरणप्रेमियों को उस मार्ग पर ट्रैकिंग करने का अवसर दिया जाएगा, जिस पर बाघ टी-३ जंगल से भागा था। इसे लेकर टाइगर रिजर्व ने विशेष कार्यक्रम तैयार किया है। बाघ टी-3 के चले मार्ग पर वॉक का आयोजन किया जाएगा। इसके अनुसार टी-3 द्वारा अपनाए गए रास्ते पर 20 से 26 दिसम्बर तक बाघ प्रेमियों व संरक्षकों द्वारा वॉक की जाएगी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ये प्रतिभागी 19 दिसंबर को पन्ना टाइगर रिजर्व में रिपोर्ट करेंगे। २० को 12 किमी लंबे देवरादेव, गहारीघाट व टी-3 ग्रेट स्केप पाइंट की ट्रैकिंग करेंगे। 21 को 10 किमी लम्बे माटीपुरा, राजपुरा और टी-3 के फाइनल स्केप पाइंट का भ्रमण कराया जाएगा।

राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग की पहल
22 दिसम्बर को 10 किमी के पहले पग मार्क मिलने वाले कॉरिडोर पर भ्रमण कराया जाएगा। 23 को 10 किमी लम्बे सगुनि जंगल व 24 को 15 किमी के पातरीकोटा का भ्रमण करेंगे। जहां से भागे हुए बाघ टी-3 को वापस लाया गया था। 25 दिसम्बर को 10 किमी लम्बे गन्ने के खेत का भ्रमण कराया जाएगा। जहां से टी-3 को पुन: टाइगर रिजर्व लाया गया था। 26 को प्रतिभागी टाइगर रिजर्व के खमानी तालाब पर अनुभव साझा करेंगे। दोबारा पार्क पहुंचने पर बाघ यहीं छोड़ा गया था।

टी-3 की रोमांचक यात्रा के मुख्य बिंदु
पेंच से बाघ टी-३ को 7 नवम्बर 2009 को पन्ना टाइगर रिजर्व के बाड़े में पहुंचाया गया था। जिसे 13 नवंबर को रेडियो कॉलर पहनाया गया। 14 नवंबर को उसे बाड़े से निकालकर खुले जंगल में आजाद छोड़ दिया गया था, जो 27 नवबर को पन्ना से पेंच की तरफ कूच कर गया। 25 दिसम्बर को उसे फिर से पकड़ लिया गया और 26 दिसम्बर को दोबारा पन्ना टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। अपनी इस यात्रा में बाघ प्रतिदिन 15 से 50 किमी तक चला था। जिस जगह शिकार करता वहां तीन से चार दिन तक रुका। यात्रा के दौरान चार भारतीय वन अधिकारियों ने बाघ टी- 3 का पीछा करने वाली टीम का नेतृत्व किया। टीम में 40 से 70 वनकर्मी, चार हाथी व 25 वाहन शामिल रहे। बाघ ने केन, सुनार, बेबस और व्यारमा जैसी नदियों को तैरकर पार किया। रात में बटिया खेड़ा और गढ़ाकोटा जैसे कस्बों से होकर गुजरा।

Anil singh kushwah Desk
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