बगैर पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक और जिलेभर के पैथोलॉजी सेंटर

चिकित्सा अधिकारी और एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोस चल रहे ब्लड बैंक और पैथालॉजी सेंटर
जांच परिणामों की गुणत्ता सवालों के घेरे में

By: suresh mishra

Updated: 10 Apr 2019, 03:54 PM IST

पन्ना. शासन के नवीन प्रावधानों के अनुसार ब्लड बैंक और पैथॉलाजी सेंटरों के संचालन के लिये एमडी पैथालाजिस्ट का होना जरूरी है। इसके बाद भी जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक और जिलेभर के पैथॉलीजी सेंटर बगैर पैथॉलाजिस्ट के संचालित हो रहे हैं। इससे जहां एक ओर इन केंद्रों से मिलने वाली जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं वहीं मरीजों के जीवन से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकारी लैब और निजी लैबों की रिपोर्ट में एक ही टाइम की जांच रिर्पोटों में अंतर आना आम बात हो गई है। जिले के स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। तहसील और ब्लॉक स्तरों पर संचालित सेंटरों की हालत और भी अधिक दयनीय है।
गौरतलब है कि जिले की करीब १२ लाख की आबादी के बीच महज एक ब्लड बैंक है। जहां पदस्थ रहे पैथॉलाजिस्ट डॉ. सुरेंद्र सिंह भदौरिया के सेवानिवृत्त होने के बाद से कोई पैथालाजिस्ट नहीं है, बल्कि पैथालाजिस्ट के रूप में एक सामान्य डाक्टर को जिले के इकलौत ब्लड बैंक और पैथॉलाजी सेंटर की कमान सौंपी गई है। वे महीनों से ब्लड बैंक के प्रभारी के रूप में पदस्थ हैं। इसी प्रकार जिल ेमें संचालित करीब आधा सैकड़ा पैथॉलाजी सेंटरों में भी कहीं भी पैथॉलालिस्ट नहीं हैं। इनमें लाइसेंस लेने के लिये मात्र डॉक्टरों की डिग्री लगाई गई हैं, जबकि किसी भी पैथॉलाजी सेंटर में डॉक्टरों को कभी नहीं देखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों द्वारा भी महीनों तक इन पैथॉलाजी सेंटरों की जांच नहीं की जाती है।


खुले में फेक देते संक्रमित कचरा
निजी पैथॉलाजी सेंचालकों में से अधिकांश लोगों द्वारा सेंटरों से निकले वाले कॉटन, निडिल, स्लाइट आदि को सामान्य कचरे के साथ ही सेंटरों के आसपास फेक दिया जाता है। इससे संक्रमण का कचना बना रहता है। जबकि नियमानुसार सेंटरों से निकलने वाले संक्रमित कचरे का निस्तारण सामान्य कचरे से अलग किया जाना चाहिये। स्वास्थ्य सेवाओं की जिले में हालत खराब होने के बाद भी स्वास्थ्य अमले द्वारा इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे बीमार लोगों की सेहत से भी खिलवाड किया जा रहा है। यहां से मिलने वाली जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कुछ पैथॉलाजी सेंटरों का संचालन अप्रत्यक्ष रूप से जिला अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा ही किया जा रहा है। जिसकी जानकारी अधिकारियों को भी है। फिर भी कभी सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

एमडी पैथालाजिस्ट नहीं होने की स्थिति में सरकारी ब्लड बैंक में नियमानुसार एमबीबीएस डॉक्टर को नॉमिनेट किया जा सकता है। जबकि प्राइवेट ब्लड बैंक के लिये पैथालाजिस्ट का होना अनिवार्य है। पैथॉलाजी सेंटरों के लिये दो नियम हैं। वर्ष 2017 के पहले के पॅथॉलाली सेंटर के लाइसेंस एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री लगाने के बाद दिए गए हैं। एक डॉक्टर अधिकतम दो पैथॉलाजी सेंटरों पर ही सेवा दे सकता है। जबकि वर्ष 2017 के बाद के पैथॉलाजी सेंटरों के लिये एमडी पैथॉलाजिस्ट होना अनिवार्य है।
डॉ. एलके तिवारी, सीएमएचओ

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