अद्भुत मिसाल: मुसलमान हैं नहीं, मस्जिद में हिंदू देते अज़ान

अद्भुत मिसाल: मुसलमान हैं नहीं, मस्जिद में हिंदू देते अज़ान
अद्भुत मिसाल: मुसलमान हैं नहीं,मस्जिद में हिंदू देते अज़ान

Navneet Sharma | Updated: 27 Aug 2019, 06:41:16 PM (IST) Nalanda, Bihar, India

सांप्रदायिक झगड़ों की बुनियाद डालने वालों के लिए यह एक अद्भुत मिसाल है।गांव में मुसलमान एक घर भी नहीं ।केवल हिंदू परिवार ही हैं जो पुरानी मस्जिद में अजा़न पढ़ते और उसका रख रखाव करते हैं।

 

बिहारशरीफ(नालंदा)प्रियरंजन भारती.

कहते हैं कि गुरु में विशिष्टता होती है और वह ऐसी वैसी भी नहीं।इसीलिए तो नालंदा विश्वगुरु बना क्योंकि इसने अनेक खूबियों को खुद में समेट रखा है। ऐसी ही एक खासियत नालंदा की राजधानी कहे जाने वाले बिहारशरीफ के माड़ी गांव में वर्षों से दिखता आ रहा है। बेन प्रखंड के माड़ी गांव में लोग अनूठी संस्कृति की मिसाल पेश कर रहे हैं। यहां एक भी घर मुसलमान का नहीं है।मगर हर दिन पांचों वक्त की अजा़न होती है।हिंदू परिवारों के लोग ही यह बीड़ा उठाए चल रहे हैं।
हिंदुओं को अजा़न पढ़नी नहीं आती। ऐसे में वे पेन ड्राइव का सहारा लेते हैं। मस्जिद के रख रखाव और रंगाई पुताई का जिम्मा भी हिंदू परिवारों के कंधों पर है। यह काम गांव के गौतम महतो,अजय पासवान, बखोरी जमादार तथा अन्य संभालते हैं।

गहरी आस्था है जुड़ी हुई
ग्रामीणों की मस्जिद से गहरी आस्था जुड़ी है।ऐसी कि कोई भी शुभ कार्य के शुरू में मस्जिद का पहला दर्शन ज़रूरी है ।सदियों से जारी इस परंपरा को लोग बखछबी निभि भी रहे हैं।मस्जिद के.बा र एक मजार है जिस.पर हिंदू ही चादरशपोशी करते आ रहे हैं।मस्जिद की सुबह शाम सफाई भी नियमित रूप से की जाती है।

कैसे शुरू हुई परंपरा
गांव में पहले अक्सल आग लगती और बाढ़ आती थी।इसी दौरान एक बुजु हज़रत इस्माइल गांव के रास्ते से गुजर रहे थे।वे वहाँ रुके और वहीं उनका देहांत हो गया।उसके बाद यहां अगलगी और सैलाब आना बंद हो गया।तब से गांव को इब्राहिम पुर माड़ी कहा जाने लगा।1942-42में सांप्रदायिक झगड़ों में मुसलमान गांव छोड़ चले गये।तब से हिंदुओं ने मोर्चा संभाल लिया।

मंडी से माड़ी गांव बना
बिहार शरीफ के खालिद आलम भुट्टो ने बताया कि मस्जिद की तामीर उनके नाना बदरे आलम ने दो सौ साल पहले कराई थी।बताया कि जब नालंदा विश्वविद्यालय था तब वहां मंडी लगा करती थी।इसलिए गांव का नाम मंडी था।इसे बोलचाल में लोग माड़ी कहने लग गये।
यह भी मान्यता चली आ रही है कि जो मस्जिद के दर्शन नहीं करता उस पर आफत आ जाती है।

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