देव आनंद को नहीं भूल सकता बिहार

देव आनंद को नहीं भूल सकता बिहार

Gyanesh Upadhyay | Publish: Dec, 03 2018 08:18:06 PM (IST) Patna, Patna, Bihar, India

देव आनंद की पुण्यतिथि 3 दिसंबर : जब लोग नालंदा और राजगीर घूमने आते हैं, तो देव आनंद को जरूर याद करते हैं

पटना। बिहार में अभिनेता देव आनंद की ख्याति बहुत ज्यादा है। आज भी बिहार में लोग बड़े गर्व से चर्चा करते हैं कि देव आनंद की फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ की शूटिंग बिहार के नालंदा प्राचीन विश्वविद्यालय क्षेत्र और राजगीर में हुई थी।
देव आनंद के छोटे भाई विजय आनंद द्वारा निर्देशित जॉनी मेरा नाम का एक पूरा गाना - ओ मेरे राजा... खफा ना होना.... नालंदा के प्राचीन विश्वविद्यालय के खंडहर और राजगीर की घाटियों में स्थित रोप-वे पर शूट हुआ था। आज भी यहां के लोग उस शूटिंग को याद करते हैं। वर्ष 1970 की शुरुआत में करीब दस दिन तक यहां शूटिंग चली थी, जिसमें दस से ज्यादा कलाकारों ने भाग लिया था। नालंदा के ऐतिहासिक खंडहर पटना से 80 किलोमीटर दूर हैं, जबकि इन खंडहरों से राजगीर रोप वे की दूरी करीब 20 किलोमीटर है।

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शूटिंग में क्या हुआ था?
गीतों के फिल्मांकन का निर्देशक विजय आनंद का तरीका निराला हुआ करता था। राजगीर में रोप-वे पर बैठने की जगह कम थी, लेकिन अभिनेता और अभिनेत्री को एक साथ दिखाना था, तो ऐसे में हेमा मालिनी को देव की गोद में बैठाया गया, लेकिन रोप वे बीच में ही रुक गई। हेमा काफी डर गईं, लेकिन माहौल को हल्का करने के लिए देव आनंद उन्हें चुटकले सुनाते रहे, हंसाने की कोशिश करते रहे। काफी देर बाद रोप वे ठीक होकर फिर चला। तब 1970 में हेमा की उम्र 22 और देव आनंद की 47 थी।

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जयप्रकाश नारायण से मिले थे देव आनंद
शूटिंग से समय निकालकर देव आनंद ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण से भी मुलाकात की थी। दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई थी। देव राजनीतिक से काफी सजग थे और समाजवादी विचारों के समर्थक थे। आपातकाल के दौर में देव आनंद ने एक राजनीतिक पार्टी का भी गठन किया था, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

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बिहार में क्यों नहीं होती शूटिंग?
बिहार में शूटिंग के अनेक लोकेशन हैं, लेकिन सुविधा और संसाधन के अभाव के कारण यहां शूटिंग आसान नहीं है। यहां सुरक्षा का भी एक प्रश्न रहा है, यहां शूटिंग के समय का अनुशासन बनाए रखना एक चुनौती है, इसलिए कोई फिल्मकार जल्दी बिहार आकर शूटिंग करना नहीं चाहता। झारखंड ने वर्ष 2015 में फिल्मों के विकास के लिए ठोस प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन ऐसे प्रयास अभी बिहार में परवान नहीं चढ़े हैं।

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