छठ महापर्व, मुस्लिम परिवार भी जुड़े हैं छठ के रोजगार से

लोक आस्था के महापर्व छठ का बिहार के गांव कस्बों और नगरों में सभी को इंतज़ार रहता है। व्रत का चार दिवसीय अनुष्ठान गुरुवार 31 अक्तूबर से शुरु होगा। भागलपुर के नाथनगर, हुसैनाबाद, मनिहारी, लोहापट्टी आदि के चालीस से अधिक मुस्लिम परिवार छठपूजा में चढ़ाई जाने वाली 'बद्धीÓ (सूत की माला)का निर्माण करते हैं।

By: Yogendra Yogi

Updated: 29 Oct 2019, 07:32 PM IST


सीतामढ़ी/भागलपुर (प्रियरंजन भारती): लोक आस्था के महापर्व छठ का बिहार के गांव कस्बों और नगरों में सभी को इंतज़ार रहता है। व्रत का चार दिवसीय अनुष्ठान गुरुवार 31 अक्तूबर से शुरु होगा। व्रत की तैयारियों में व्रती और उनके परिजनों समेत सामाजिक संगठन और सरकार तक जुट गई है। यूं तो छठ की शुरुआत मगध क्षेत्र से होने के कारण मगध में सूर्यदेव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं पर पूरे बिहार के अनेक हिस्से में आस्था से जुड़े अनेक स्थान हैं जहां छठ में लोग अघ्र्यदान करने मुरादें लेकर आते हैं। इनमें से ही एक है सीता जन्यस्थान पुनौरा धाम। पुनौरा स्थित पुण्डरीक क्षेत्र, लक्ष्मणा मंदिर, उर्विजा कुंड, लखनदेई घाट आदि स्थानों के सूर्य मंदिर आस्था के विशेष केंद्र हैं।

सीतामढ़ी का पुनौरा धाम और उर्विजा कुंड

जानकी जन्मस्थान पुनौरा धाम स्थित पुण्डरीक क्षेत्र सूर्य मंदिर और पोखर में लोगों की विशेष आस्था जुड़ी है। मान्यताओं के अनुसार यहां पुण्डरीक ऋषि का आश्रम हुआ करता था। इसीलिए इसे पुण्डरीक क्षेत्र भी कहा जाता है। शहर के प्रसिद्ध जानकी मंदिर परिसर के दक्षिणी भाग में उर्विजा कुंड में लोग छठ व्रत करते हैं। जानकी जन्मस्थली पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह बेहद आकर्षण का केंद्र है। छठव्रती अघ्र्यदान के बाद यहां पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं की मन्नतें यहां पूरी होती हैं। छठव्रती इसीलिए यहां विशेष तौर पर व्रत करने पहुंचते हैं। उर्विजा कुंड के साथ श्रद्धालुओं की आस्था जनकनन्दिनी जानकी से जुड़ी हुई बताई जाती है। उर्विजा कुंड में सीता के उद्भव की झांकी. है। पोखर के बीचोबीच मंदिर में यह झांकी श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।

बिहार में हैं अनेक प्रसिद्ध सूर्यमंदिर

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ पर्व की शुरूआत वैदिक काल में गयासुर के विशालकाय शरीर पर देवताओं और जगकल्याण के लिए हुए विष्णुयज्ञ के काल में ही शुरु हुई जब विष्णु रुपी सूर्य के उपासक मगी ब्राम्हण शाक्यद्वीप से गरूडध की सवारी कर मगध क्षेत्र के गयाधाम लाए गये।ÓमगÓईरना भाषा का एक शब्द है। इसका अर्थ आग का गोला यानी सूर्य है। ये मगी यानी सूर्योपासक ब्राम्हण यज्ञकार्य के लिए लाए गये और यज्ञ के उपरांत आसपास के सात स्थानों में बस गये। इनके वासस्थल होने से ही क्षेत्र को मग से मगध कहा जाने लगा। ये जिन स्थानों पर बसे वहां सूर्य उपासना का केंद्र बनाया और विशेष पूजा करने लग गये। मगध में ऐसे सात स्थल हैं जहां प्रसिद्ध सूर्यमंदिर और कुंड हैं। इन स्थानों पर छठ में भारी भीड़ होती है। इनमें-देव का देवार्क, उलार का उलार्क,औंगारी अंगार्क, पंडारक का पुंड्यार्क,गया का सूर्यार्क समेत अन्य स्थल प्रसिद्ध हैं। जानकारों का मानना है कि शाक्यद्वीप ईरान में है जहां मगी ब्राम्हण के पूर्वज आज भी मौजूद हैं यजीदियों की उपासना इनसे मिलती है। यजीदी भी देवी देवताओं और सूर्य की विशेष पूजा के लिए चर्चित हैं।

मुस्लिम परिवारों को भी रहता छठ का इंतजार
छठव्रत में पवित्रता का विशेष महत्व है। सामाजिक सद्भाव और समरसता का ऐसा दूसरा उदाहरण सनातनी पर्व त्यौहारों में नहीं दिखता। सभी जाति संप्रदाय के लोग सिर्फ पवित्रता और समर्पित भाव से एकाकार होकर आस्था के अथाह सागर में डुबकी लगाते नजऱ आते हैं। पवित्रता के बावजूद पूजन सामग्रियां बेचने और लेने वालों के भाव भी खत्म हो जाते हैं। पूर्ण यानी सर्व समर्पण के भाव के आगे सरकार भी नतमस्तक होकर छठ घाटों के रख रखाव में उतर आती है।
ऐसे ही भावों से लैस भागलपुर का मुस्लिम परवार भी छठपूजा के कार्यों में लगा रहता है। भागलपुर के नाथनगर, हुसैनाबाद, मनिहारी, लोहापट्टी आदि के चालीस से अधिक मुस्लिम परिवार छठ व्रत का पांच महीने पहले से इंतजार करते हैं। ये परिवार छठपूजा में अघ्र्यदान के साथ सामग्रियों में चढ़ाई जाने वाली 'बद्धीÓ (सूत की माला)का निर्माण करते हैं। दिल्ली से कच्चा माल मंगाकर पूरे परिवार के साथ ये लोग चार पांच महीने पहले से ही बद्धी निर्माण में जुट जाते हैं। बद्धी का उपयोग ऐसे प्रसाद के बतौर किया जाता है जो पूरे शरीर का रक्षा कवच माना जाता है। छठव्रती पारण के बाद प्रसाद में बद्धी भी श्रद्धालुआं में.बांटते हैं। छोटू पंडित बताते हैं कि बद्धी का प्रयोग दूसरी पूजाओं में भी होता है। हुसैनाबाद के मुजीर और उसके छोटे भाई का परिवार जुलाई से ही बद्धी निर्माण में जुट गया है। इनका कहना है हमलोग पूरी सफाई से इसका निर्माण करते और खरीदारों को बेचते हैं। इससे हमारी सालभर की कमाई हो जाती है।

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