अररिया में आरजेडी के सरफराज आलम ने लहराया परचम, लालू ने जेल में रहते हुए भी दिखाया अपना दमखम

अररिया में आरजेडी के सरफराज आलम ने लहराया परचम, लालू ने जेल में रहते हुए भी दिखाया अपना दमखम

Prateek Saini | Publish: Mar, 14 2018 07:34:41 PM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 07:34:42 PM (IST) Araria, Bihar, India

सीमावर्ती मुस्लिम यादव बहुल अररिया लोकसभा सीट फिर महागठबंधन के कब्जे में आ गई। आरजेडी के सरफराज आलम ने भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह को 50 हजार से अधिक व

(पटना): सीमावर्ती मुस्लिम यादव बहुल अररिया लोकसभा सीट फिर महागठबंधन के कब्जे में आ गई। आरजेडी के सरफराज आलम ने भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह को 50 हजार से अधिक वोटों से पराजित कर दिया। आरजेडी के सांसद तसलीमुद्दीन के निधन से खाली हुई सीट पर उनके पुत्र सरफराज आलम को चुनाव मैदान में उतारा गया तो यहां भी
सहानुभूति वोट आरजेडी के पक्ष में गया।

उपचुनाव में और भी कई बातें स्पष्ट हो गईं। यह तय हो गया कि लालू यादव के जेल में रहते हुए उनके समर्थकों में न तो उनकी पकड़ कम हुई न ही वोटों का बिखराव हुआ। बल्कि दूसरे शब्दों में कहें तो लालू यादव ने अपने पुत्र तेजस्वी यादव के हाथों जो कमान सौंपी वह और शिद्दत से मजबूत होती जान पड़ी। यह चुनाव तेजस्वी यादव की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया था। लालू के जेल में बंद होने के दौरान तेजस्वी के नेतृत्व की नई कमान को अररिया और जहानाबाद के वोटरों ने कमोबेश स्थापित कर दिखाया।

अररिया सीमावर्ती क्षेत्र होने के साथ यहां मुस्लिम आबादी में बेहद तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां आरजेडी के तसलीमुद्दीन ने भाजपा को पराजित कर दिया था। गत लोस चुनाव में आरजेडी को 407978 जबकि भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह को 261474 मत मिले थे। 2014के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन नहीं था और सत्तारूढ़ भाजपा तथा जदयू के प्रत्याशी अलग अलग चुनाव मैदान में उतरे। लिहाजा मुस्लिम और यादव तथा दलित वोटों की एकजुटता से आरजेडी को जीत का सेहरा सिर मिला। जदयू के विजयकुमार मंडल को 221769 वोट मिले। बसपा प्रत्याशी अब्दुल रहमान ने अलग 17724 वोट काटकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।

जेल में रहकर भी लालू यादव ने दिखाया अपना दमखम :

जेल में बंद रहकर भी लालू यादव ने नीतीश बनाम तेजस्वी की लड़ाई दो एक की बढ़त बनाकर जीत ली। यह संदेश दे पाने में लालू कामयाब दिखे हैं कि जेल में रहने से उनका जनाधार कम नहीं बल्कि और मजबूत हुआ है। उपचुनाव के नतीजे एनडीए को खासकर भाजपा नेतृत्व को फीलगुड से अतिआत्मविश्वास में नहीं रहने को आगाह कर दने वाले हैं। नतीजों की धमक दूर तक जाने वाली है। साफ हो गया कि यदि यही रफ्तार कायम रही तो बिहार में एनडीए की राहें अगले लोकसभा चुनाव में आसान एकदम नहीं होंगी। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि लालू पर अति हमलावर रहकर भाजपा गठबंधन उनके जनाधार को बेधने की बजाय अपना ही नुकसान कर लेगा।

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