नई पार्टी "एलजेडी" को पहचान दिलाने में शरद यादव को करनी होगी मशक्‍कत

शरद यादव की नई पार्टी के सामने कई समस्याएं है जिनका समाधान करना आवशयक है पर यह सब करना शरद यादव के लिए आसान नहीं होगा क्योेंकि...

By: Prateek

Published: 24 May 2018, 04:34 PM IST

(पटना/बिहार): जदयू से अलग होने के बाद समाजवादी नेता शरद यादव ने लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) का गठन तो कर लिया पर उन्हें अपने दल को पहचान दिलाने में काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

शरद यादव को इन समस्याओं का करना पड़ेगा सामना

शरद यादव का राजनीतिक सफर अभी बिहार से ही जुड़ा है और बिहार में अपने दल के समर्पित कार्यकर्ताओं की एक फौज भी उन्हें तैयार करनी होगी। बिहार में सियासत का एक लंबा दौर शरद यादव के जीवन से जुड़ा रहा है। जदयू से अलग होने के बाद अब उन्हें अपने दल को पहचान दिलाने की दरकार होगी। बिहार में जदयू,भाजपा, आरजेडी, कांग्रेस,रालोसपा, लोजपा और हम सेकुलर का वजूद पहले से कायम है। नये दल के साथ नये किरदार में शरद को आने वाले चुनावों में संघर्ष कर एक नया आधार प्रदर्शित करना अभी बाकी है।

बिहार में शरद यादव का यादगार राजनीतिक सफर

शरद यादव के सियासी संघर्ष का एक अपना अलग कीर्तिमान रहा है। वह 1974में जबलपुर से तब सांसद बने जब वहां छात्र संघ से जुड़े थे। दोबारा वह 1977 में जबलपुर से ही जीते। 1995 में वह जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष और 1997 में लालू यादव के हटने पर अध्यक्ष बने। 1998 में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर अलग हुए और 2003 में समता पार्टी के साथ मिलकर जदयू का गठन किया। शरद यादव ने मधेपुरा से लालू यादव को हराकर नया कीर्तिमान स्थापित किया और बिहार में अपनी सियासत को नया आधार और नई धार दी। अब नीतीश के जदयू अध्यक्ष बन जाने के बाद इन्होंने अलग राह पकड़ ली। नये सिरे से अब इन्हें अपनी सियासत को नयी धार देनी की जरूरत आन पड़ी दिख रही है।

संविधान बचाने के लिए काम करेगी "एलजेडी"

शरद यादव ने 18 मई 2018 को दिल्ली में अपनी नई पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल की विधिवत शुरूआत की और यहीं पर पार्टी का पहला अधिवेशन किया गया। शरद यादव ने इस दौरान कहा कि उनकी पार्टी संविधान को बचाने के लिए काम करेगी।

Prateek Desk
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