देश में हर साल आकाशीय बिजली से होती हैं करीब 3500 तक मौतें

(Bihar News ) बिहार में आकाशीय बिजली गिरने (Deaths of ligthning ) से हुई करीब सौ लोगों की मौत ने इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के उपायों को चर्चा में ला दिया है। बाढ़, भूस्खलन, भूकंप और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली मौतों में से वज्रपात से होने वाली मौतों की तादाद लगभग 10 फीसदी (10% Deaths in India ) है। देश में हर साल आसमानी बिजली की चपेट में आकर तीन से साढ़े तीन हजार (3500 died evry year of ligthning ) लोगों की मौत हो जाती है।

By: Yogendra Yogi

Published: 26 Jun 2020, 04:56 PM IST

पटना(बिहार): (Bihar News ) बिहार में आकाशीय बिजली गिरने (Deaths of ligthning ) से हुई करीब सौ लोगों की मौत ने इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के उपायों को चर्चा में ला दिया है। बाढ़, भूस्खलन, भूकंप और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली मौतों में से वज्रपात से होने वाली मौतों की तादाद लगभग 10 फीसदी (10% Deaths in India ) है। देश में हर साल आसमानी बिजली की चपेट में आकर तीन से साढ़े तीन हजार (3500 died evry year of ligthning ) लोगों की मौत हो जाती है। बीते पांच वर्षों के दौरान यह सिलसिला तेज हुआ है। इस साल भी जम्मू-कश्मीर से लेकर दार्जिलिंग तक हिमालय के तराई इलाकों, पूर्वी व मध्य भारत में ऐसी घटनाएं और बढऩे का अंदेशा है।" इन घटनाओं में होने वाली मौतों की तादाद हर साल लगातार बढ़ रही है। दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में खेतों या खुले में काम करने वाले लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है। इससे यहां आसमानी बिजली की जद में आने वालों की तादाद बढ़ जाती है।

ज्यादा खतरनाक वज्रपात
सबसे अचरज भरी बात यह सामने आयी है कि अभी तक वज्रपात से अधिकतम मौतें प्री-मॉनसून सीजन में आती थीं, अब जून में भी आकाशीय बिजली से लोग मर रहे हैं। बिहार और झारखंड में जलवायुविक परिक्षेत्र में क्यूमिलोनिंबस क्लाउड (खास तरह के कपासी वर्षा मेघ) बन रहे हैं। स्थानीय गर्मी और नमी की अधिकता से यह बादल इतने तेजी से बन रहे हैं कि अपरिपक्व अवस्था में न केवल बरस जाते हैं, बल्कि बिजली (ठनका या वज्रपात) भी गिराते हैं। आसमान में अब ये बादल सामान्य से काफी नीचे बन रहे हैं। इसकी वजह से वज्रपात ज्यादा खतरनाक हो गया है।

बढ़ रही बिजली गिरने की रफ्तार

पिछले एक दशक से बिजली गिरने की दर निरंतर बढ़ी हैं। अंतिम तीन-चार साल में वज्रपात की दर चरम पर पहुंच गयी है। जलवायु विज्ञानी इस बदलाव को क्लाइमेट चेंज का सबसे डरावना पहलू मान रहे हैं। जैसे कि पता है कि दशक भर पहले तक बिहार और झारखंड में गर्मी सूखी हुआ करती थी, अब वह नमी युक्त अथवा बरसात से प्रभावित हो गयी है, जिसकी वजह से वातावरण में ऊमस काफी बढ़ी हुई है।

एक कड़क में 50 करोड़ वोल्ट ऊर्जा

बिजली की एक कड़क से 50 करोड़ वोल्ट तक की ऊर्जा पैदा हो सकती है। ऐसा लगता है कि आसमान के शरीर में अचानक कई नसें जल उठी हों। जब भी बिजली कड़कती है, तो ऐसा नजारा दिखता है। कड़क के साथ आसमान से गिरने वाली बिजली को तडि़त कहते हैं। अंग्रेजी में इसे lightning कहते हैं। आकाश में बादलों के बीच तब टक्कर होती है, यानि घर्षण होने से अचानक इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज निकलती है, ये तेजी से आसमान से जमीन की तरफ आता है। इस दौरान हमें तेज़ कड़क आवाज़ सुनाई देती है और बिजली की स्पार्किंग की तरह प्रकाश दिखाई देता है। इसी पूरी प्रक्रिया को आकाशीय बिजली कहते हैं। आकाशीय बिजली के गिरने से लोगों की इंसानों के साथ पशु-पक्षियों तक की मौत हो जाती है, हरे पेड़ तक गिर जाते हैं। लेकिन इस प्राकृतिक आपदा से बचाव संभव है।

क्या हैं कारण

पुणे स्थित आईआईटीएम के वैज्ञानिकों ने कहा है कि तेजी से होने वाला अनियंत्रित शहरीकरण और पेड़ों की कटाई इन घटनाओं और इससे होने वाली मौतों की तादाद बढऩे की प्रमुख वजह है। संस्थान की ओर से ताजा अध्ययन में कहा गया है कि अब ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि प्राकृतिक घटना होने की वजह से इसमें वृद्धि की एकदम सटीक वजह बताना तो संभव नहीं हैं. लेकिन शहरी इलाकों में अनियंत्रित तरीके से होने वाला शहरीकरण इसकी एक प्रमुख वजह है। ग्लोबल वार्मिंग से भी इसका सीधा संबंध है। शहरी इलाकों में पेड़ों की कटाई में तेजी से भी ऐसी घटनाओं का सिलसिला तेज होता है। इन वजहों से ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाके लगातार गर्म हो रहे हैं।

बढ़ता प्रदूषण है प्रमुख कारण

संस्थान ने अपने अध्ययन में कहा है कि शहरी इलाकों में बढ़ता प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन भी इन घटनाओं को तेज करने में सहायक होता है। मेघालय औऱ पूर्वोत्तर के दूसरे पर्वतीय राज्यों में अब भी हरियाली रहने की वजह से वहां वज्रपात और इससे होने वाली मौतों की तादाद देश के दूसरे हिस्सों के मुकाबले कम हैं। मुंबई के मुकाबले कोलकाता जैसे महानगर में वज्रपात की घटनाएं बढ़ी हैं। मानसून के दौरान बादल नीचे होने की वजह से वज्रपात की घटनाएं कम होती हैं।

अंकुश के उपाय

वैज्ञानिकों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा होने की वजह से इस पर पूरी तरह अंकुश तो नहीं लगाया जा सकता. लेकिन विभिन्न इलाकों में होने वाले वज्रपात की घटनाओं पर गहन शोध औऱ एक सटीक चेतावनी प्रणाली के जरिए इससे होने वाले जान-माल के नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के अंतर व इसके बदलते मिजाज को समझने के लिए बड़े पैमाने पर शोध जरूरी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति भी अलग-अलग होती है। इस बात का भी अध्ययन जरूरी है कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ क्यों रही हैं।

ऐसे बचें

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (एनडीआरएफ) द्वारा जारी एक जागरुकता वीडियो में लोगों को इससे बचने के उपाय बताए गए हैं। जिसके मुताबिक अगर आसमान में बिजली कड़क रही है और आप घर के बाहर हैं तो सबसे पहले सुरक्षित (मजबूत छत) वाली जगह तक पहुंचने का प्रयास करें। तुरंत पानी, बिजली के तारों, खंभों, हरे पेड़ों और मोबाइल टॉवर आदि से दूर हट जाएं। आसमान के नीचे हैं तो अपने हाथों को कानों पर रख लें, ताकि बिजली की तेज आवाज़ से कान के पर्दे न फट जाएं। अपनी दोनों एडिय़ों को जोड़कर जमीन पर पर उकड़ू बैठ जाएं।

इनका रखें ध्यान

अगर इस दौरान आप एक से ज्यादा लोग हैं तो एक दूसरे का हाथ पकड़कर बिल्कुल न रहें, बल्कि एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें। छतरी या सरिया जैसी कोई चीज हैं तो अपने से दूर रखें, ऐसी चीजों पर बिजली गिरने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। पुआल आदि के ढेर से दूर रहें, उसमें आग लग सकती है आकाशीय बिजली की प्रक्रिया कुछ सेंकेड के लिए होती है, लेकिन इसमें इतने ज्यादा बोल्ट का करंट होता है कि आदमी की जान लेने के लिए काफी होता है। क्योंकि इसमें बिजली वाले गुण होते हैं तो ये वहां ज्यादा असर करती है, जहां करेंट का प्रवाह होना संभव होता है। आकाश से गिरी बिजली किसी न किसी माध्यम से जमीन में जाती है, और उस माध्यम में जो जीवित चीजें आती हैं, उनको नुकसान पहुंचता है।

बिजली गिरने पर यह करें
1. अगर किसी पर बिजली गिर जाए, तो फ़ौरन डॉक्टर की मदद माँगे ऐसे लोगों को छूने से आपको कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।

2. अगर किसी पर बिजली गिरी है तो फ़ौरन उनकी नब्ज़ जाँचे और अगर आप प्रथम उपचार देना जानते हैं तो ज़रूर दें। बिजली गिरने से अकसर दो जगहों पर जलने की आशंका रहती है- वो जगह जहाँ से बिजली का झटका शरीर में प्रवेश किया और जिस जगह से उसका निकास हुआ जैसे पैर के तलवे।

3. ऐसा भी हो सकता है कि बिजली गिरने से व्यक्ति की हड्डियाँ टूट गई हों या उसे सुनना या दिखाई देना बंद हो गया हो. इसकी जाँच करें।

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