नवरात्रि के आखिरी दिन विधि विधान से करें मां सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना

नवरात्रि के आखिरी दिन विधि विधान से करें मां सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना
नवरात्रि के आखिरी दिन विधि विधान से करें मां सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना

Navneet Sharma | Publish: Oct, 06 2019 06:19:24 PM (IST) | Updated: Oct, 06 2019 06:21:56 PM (IST) Patna, Patna, Bihar, India

navratra: पूर्जा अर्चना के बाद परिवार समेत हवन यज्ञ दोगुना महत्व होता है, मां को चढाएं रंग बिरंगे पुष्प और मिठाइयों का लगाएं भोग, नवरात्रि के दिन हर राशि वाले को मंत्र के साथ मां का पूजन करने से मिलता है खूब लाभ

पटना. शारदीय नवरात्रों के हर दिन मां दुर्गा की आराधना का अपना महत्व होता है। नवरात्रि के नौवे दिन मां श्री सिद्धिदात्री माता का पूजन-अर्चन किया जाता है। नवरात्रि के अंतिम दिन यूं तो माता के सभी रूपों की पूजा-हवन का अपना महत्व है लेकिन इस दौरान पूजा के साथ-साथ यदी हवन-पूजन भी किया जाए तो माता का स्नेह आशीष खूब मिलता है। मां की पूजा करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है। पांडित प्रशांत शर्मा के अनुसार

हवन से मिलता है दोगुना लाभ

नवरात्रि के आखिरी दिन विधि विधान से करें मां सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना

पूजा अर्चना के बाद यथा संभव हवन भी कर सकते हैं। हवन के दौरान प्रज्जवलित अग्नि में फल, शहद, घी, काष्ठ इत्यादि पदार्थों की आहुति दी जाती है। इसमें भी सभी परिवार समेत सभी हिस्सा ले सकते हैं। नवरात्र के आखिरी दिन हवन करने से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में धन व सम्मान का आगमन होता है। हवन करके पूड़ी हलवे का भोग लगाएं और लोगों को बांटें। हवन करने से मां सिद्धिदात्री मां प्रसन्न होती है।

 

 

सिद्धिदात्री माता के पूजन की विधि

नवरात्रि के आखिरी दिन विधि विधान से करें मां सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना

नवरात्रि के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री माता का पूर्ण श्रंगार करें, मां को लाल गुड़हल व लौंग की माला चढ़ाएं। इसके बाद मां की प्रतिमा के सामने धूप दीप जलाकर इनपर लाल गुलाब के फूल, लाल सिंदूर चढ़ाकर मां की पूजा करें। पूजा करते वक्त सभी माता के तमाम रूपों का ध्यान कर इनकी कृपा व आशिर्वाद की कामना करें। सभी परिवार समेत मां की आरती बोलें मां गो खास पकवान व मिठाई का भोग लगाएं। माता को अर्पण करने वाली मिठाइयों में मावे की मिठाई, सफेद खीर, चावल और मूंग दाल की खिचड़ी का भोग लगाएं। सभी तरह के मिष्ठान अर्पण करें। तमाम पूजा अर्चना के बाद नौंवी के आखिरी दिन मां स्वरूप मांता के रूप में नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है। यथाशक्ति कन्याओं को भेंट दी जाती है। मां की पूजा अर्चना के बाद परिवार समेत सभी घर पधारी कन्याओं कें पांव स्पर्श कर उनका आर्शिवाद प्राप्त करें तो इसका पूजा से भी सौ गुणा ज्यादा फल होता है।

 

मंत्रों के साथ मां की पूजा का विशेष महत्व
मेष- ऊँ नम शिवाय या शिवाय ऊँ नम
वृषभ- ऊँ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।
मिथुन- ऊँ शिव शक्त्यै नम
कर्क- ऊँ आनंदांनायकायै नम
सिंह- ऊँ दीप लक्ष्म्यै नम
कन्या-ऊँ सर्वमंत्रमयी नम
तुला-ऊँ अंबे नम
वृश्चिक-ऊँ ब्रह्मांड नायिकायै नम
धनु-ऊँ विद्या लक्ष्म्यै नम
मकर-ऊँ आद्य नायकायै नम
कुंभ-ऊँ शांभवी नम
मीन-ऊँ कात्यायनी नम

 

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