प्रदेश की लोक और आदिम कला को बचाना सरकार की अहम जिम्मेदारी

वरिष्ठ कलाकार और राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व चेयरमैन चिन्मय मेहता ने शिल्पग्राम पर रखे विचार, जेकेके प्रशासन शिल्पग्राम तोड़कर बड़ा ऑडिटोरियम बनाने की प्लानिंग में जुटा

जयपुर. वरिष्ठ कलाकार और राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व चेयरमैन चिन्मय मेहता ने कहा कि जवाहर कला केन्द्र प्रशासन शिल्पग्राम को तोड़कर बड़ा ऑडिटोरियम बनाने में जुटा है। इस भावी योजना को लेकर कला एवं संस्कृति से जुड़े हमारे कलाकार साथियों के विरोध को गंभीरता से लेना चाहिए। विकसित देशों में संस्कृति के क्षेत्र में लिए जाने वाले प्रशासनिक निर्णयों में आट्र्स काउंसिल की भागीदारी सदा रहती है। कला एवं संस्कृति से संबंधित कई मसलों पर यदि उसी क्षेत्र से जुड़े दिग्गजों की भागीदारी से सुनिश्चित होना एक परिपक्व राजनैतिक सोच का परिचायक माना जाता है। संस्कृति के सीमित बजट के रहते गहन विचार विमर्श के बाद ही ऐसे बड़े निर्णय लिए जाय।

जेकेके का जब निर्माण करने की प्लानिंग हुई थी तो इसे एक बहुविधायी सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, जिसमें आधुनिक एवं पारंपरिक दोनों ही कला धाराओं को बराबर महत्त्च दिया जाना था। इसी कारण वास्तुकार चाल्र्स कोरिया के डिजाइन किए जेकेके के भवन में दोनों ही धाराओं के संग्रह एवं प्रदर्शन के लिए उदारता के साथ स्पेसेस दी गई थी। शिल्पग्राम की परिकल्पना भी उसी सोच की क्रियान्विति थी कि राज्य की समकालीन कला के साथ समृद्ध लोक एवं आदिम कला के प्रदर्शन एवं संवर्धन को भी पूरा महत्त्व मिल सके। दर्शक को वर्तमान व अतीत दोनों की ही झलक एक ही परिसर में उपलब्ध हो सके।
अलंकार म्यूजियम को तोडऩा गलत कदम

पिछली सरकार ने राज्य के बाहर से आयातित महानिदेशक के जरिए एक ही झटके में मूल भवन में से लोक व आदिम कला के आकर्षक अलंकार म्यूजियम को तोड़कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उसकी सुंदर पुरातत्वीय कला सामग्री एका-एक अर्बन हाट में स्थान्तरित हो गई। वे यह चाहती थीं कि जेकेके मात्र समसायिक कला का केंद्र रहे। इस निर्णय में भी राज्य के कलाकारों से कभी राय नहीं ली गई। आज वैसी ही एडहॉक निर्णय शैली की पुनरावृत्ति होने जा रही है, जसके तहत शिल्पग्राम को डेमोलिश कर विशाल ऑडिटोरियम का निर्माण होने वाला है। आर्ट व डिजाइन में फॉर्म एवं फंक्शन के आधार पर बदलते समय मे छोटे-बड़े तर्कसंगत फेरबदल की संभावना रहनी चाहिए। शिल्पग्राम में हम प्रदेश के विभिन्न अंचलों की संस्कृति का लाइव प्रजेंटेशन करना चाहते थे। उसके विपरीत झोंपडिय़ों के साथ आज यह परिसर टेंट लगाकर आधुनिक प्रदर्शनियों के लिए प्रयोग में ला रहे है ,जो इस परिसर के लिए बिल्कुल माकूल नहीं है और ना हीं यह इसके लिए डिजाइन किया गया था। इन सभी मुद्ददों को लेकर उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति विचार कर अपनी राय दे सकती है और इस विवाद को सुलझाया जा सकता है।

Anurag Trivedi Reporting
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