सीए-सीएस एग्जाम रीशेड्यूल होने को अवसर की तरह लेने की जरूरत

एग्जाम के लिए मिला एक्स्ट्रा टाइम, अगले अटैम्प्ट में गैप हुआ कम
छोटे-छोटे टाइम स्लॉट में की जाए स्टडी, डर को नहीं होने दें हावी, बच्चों को मोटिवेट करें पैरेंट्स

By: Surya Pratap Singh Rajawat

Published: 16 May 2020, 10:24 PM IST

जयपुर. कोरोना के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन का असर विभिन्न कॉम्पीटिटीव एग्जाम्स पर पड़ रहा है। सीए-सीए के मई-जून में होने वाले एग्जाम को जुलाई-अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। करोनो के चलते स्टूडेंट्स मेंटल स्ट्रेस के दौर से गुजर रहे हैं। नया माहौल नहीं मिल पाने के कारण बच्चों की एक्सपेक्टेशन के अकॉर्डिंग स्टडी में रिजल्ट नहीं आ रहे हैं। एक्सपट्र्स का कहना है कि कोरोना का डर भी बच्चों के एग्जाम को प्रभावित कर सकता है। वहीं नवंबर-दिसम्बर में होने वाले अटैम्प्ट के लिए भी स्टूडेंट्स को कम समय मिलेगा। एवरेज स्टूडेंट्स को दोनों ही अटैम्प्ट खोने का डर भी सता रहा है। ऐसे में स्ट्रेटजी के साथ स्टडी करने की जरूरत है।

इंस्टीट्यूट के स्टडी मैटेरियल से करें तैयारी
द इंस्टीïट्यूट ऑफ चार्टेर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) के जयपुर चैप्टर के चेयरमैन अनिल यादव का कहना है कि स्टूडेंट्स सिर्फ आइसीएआइ के स्टडी मैटेरियल को ही फॉलो करें। अलग-अलग रेफरेंस और राइटर्स की बुक्स पढऩे की बजाय इंस्टीटïयूट के स्टडी मैटेरियल को कम्पलीट कर बार-बार रिवीजन करें। मई में होने वाले सीए एग्जाम्स अब जुलाई-अगस्त में होंगे। ऐसे में बच्चों को तैयारी के लिए दो महीने का एक्स्ट्रा टाइम मिल गया है। इस समय में अपनी तैयार को और स्ट्रॉन्ग बनाए। डेली सुबह छोटे-छोटे गोल्स बनाएं, जिन्हें शाम तक पूरा करने की कोशिश करें। इस अटैम्प्ट में एक्स्ट्रा समय मिलने का एक नुकसान ये है कि नवंबर में होने वाले एग्जाम के लिए कम टाइम मिलेगा। ऐसे में अब जिन स्टूडेंट्स को दोनों ग्रुप एक साथ क्लीयर करने का कॉन्फिडेंस नहीं हैं, वे इस अटैम्प्ट में एक ग्रुप की अच्छे से तैयारी करने के साथ नवंबर अटैम्प्ट में दूसरे ग्रुप की तैयारी करने के ऑप्शन के साथ जा सकते हैं।

स्कॉलरशिप के लिए सौ करोड़ का कॉर्पस फंड
सीए इंस्टीट्यूट ने पहली बार 100 करोड़ का कॉर्पस फंड बनाया है। इससे मेरिट होल्डर्स के साथ ही जरूरतमंद स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप दी जाएगी। आइसीएआइ ने नेशनल प्रेसिडेंट अतुल कुमार गुप्ता के अनुसार ये फंड सिर्फ बच्चों की स्कॉलरशिप के ही काम आएगा। इसकी गाइडलाइन जल्द ही जारी की जाएगी। वहीं फाउंडेशन के स्टूडेंट्स जयपुर चैप्टर और इंटर व फाइनल के कैंडिडेट्स दिल्ली चैप्टर की ऑनलाइन क्लास जॉइन कर सकते हैं।


एक्स्ट्रा टाइम को अपॉच्र्यूनिटी की तरह लें
आइसीएसआइ जयपुर चैप्टर के चेयरमैन नितिन होतचंदानी का कहना है कि स्टूडेंट्स को इस एक्स्ट्रा टाइम को अपॉच्र्यूनिटी के रूप में लेना चाहिए। अपनी तैयारी का टाइम रिवाइज शेड्यूल के अकॉर्डिंग मैनेज करें। जून में होने वाले एग्जाम अब जुलाई में होंगे। ऐसे में इस एक महीने में रिवीजन पर फोकस करें। अगर कुछ डाउट है तो उसे इंस्टीट्यूट को मेल करने के साथ ही फैकल्टी से क्लीयर करें। स्ट्रेस लेने की या नर्वस होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दिसंबर के अटैम्प्ट को अभी दिमाग से बिल्कुल निकाल दें। अभी सिर्फ जुलाई में होने वाले एग्जाम की तैयार में 100 परसेंट देने की कोशिश करें।


स्टै्रस फ्री एनवायर्नमेंट
मनोचिकित्सक डॉ. अनिता गौतम का कहना है कि एग्जाम का वक्त बच्चे के लिए सबसे ज्यादा प्रैशर वाला टाइम होता है। इस दौरान पैरेंट्स का रोल काफी इम्पॉर्टेंट हो जाता है। इस वक्त जितना हो सके, बच्चे को मोटिवेट करें। उसे ये विश्वास दिलाए कि आप उसके साथ हैं, चाहे रिजल्ट कुछ भी हो। घर का माहौल सिर्फ एग्जाम तक ही सीमित नहीं रह जाए। बच्चे को इस वक्त उसकी कमियां बताकर उसे क्रिटिसाइज बिल्कुल नहीं करें। उसके अचीवमेंट्स और अब क्या अच्छा कर सकता है, इसके बारे में उसे मोटिवेट करें। एग्जाम टाइम में पैरेंट्स का रोल स्टै्रस फ्री एनवायर्नमेंट रखने का होना चाहिए। बच्चे को पैरेंट की तरह नहीं एक फ्रेंड की तरह ट्रीट करें।

Surya Pratap Singh Rajawat
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