अब निमंत्रण पत्र बचाएगा पर्यावरण, काड् र्स से उगेगा पौधा

पिंकसिटी में बढ़ रहा है ईको-फ्रेंडली काड्र्स का कल्चर, काड्र्स के जरिए भी लोगों को पर्यावरण बचाने का दिया जा रहा है मैसेज

जयपुर. ग्लोबल वार्मिंग देश-दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है, इसके लिए दुनियाभर में अलग-अलग तरह से प्रयोग हो रहे है। पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य के लिए शहर में इन दिनों ईको-फ्रेंडली वेडिंग इन्विटेशन काड्र्स का प्रयोग किया जा रहा है। इस अनूठी पहल से शादी के लिए अतिथियों को इंवाइट तो किया ही जा रहा है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। ईको-फ्रेंडली काड्र्स में यूज होने वाले पेपर को रिसाइकिल कर फिर से काम लिया जा रहा है, एेसे में इन पेपर पर काड्र्स प्रिंट करवाने की दिलचस्पी लोगों में बढ़ती जा रहा है। साथ ही एेसे काड्र्स डिजाइन हो रहे है, जो नेचर को इफेक्ट्स होने से बचाते है। ये खास तरह के सीड पेपर काड्र्स चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कार्ड से बन जाता है गेंदे का पौधा
क्या कभी सोचा है कि आपके पास आया शादी का निमंत्रण पत्र गेंदे के फूल का पौधा बन सकता है। जाहिर है ऐसा सोचकर एक बारगी तो हैरानी होती है, लेकिन ईको-फ्रेंडली काड्र्स से ऐसा मुमकिन हो गया है। दरअसल, जयपुर में एक ऐसा ही अनूठा ईको-फ्रेंडली वेडिंग कार्ड बनाया गया है, जिसको रिसाइकिल कर गेंदे के फूल का पौधा उगाया जा सकता है। कार्ड से गेंदे के फूल का पौधा बनाने के बताए गए तरीके के अनुसार सबसे पहले निमंत्रण पत्र को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखना होगा। इसके बाद जब ये कागज की लुगदी में बदल जाए, तब इसे किसी गमले की मिट्टी में रोप दें। अब इसे सूर्य की उपयुक्त रोशनी में प्रतिदिन पानी देते रहें। कुछ ही दिनों में गमले में मेरीगोल्ड (गेंदे) के फूल का पौधा खिल उठेगा। वैशाली नगर निवासी आकांक्षा गोस्वामी और अंकित शर्मा ने ईको-फ्रेंडली काड्र्स डिजाइन करवाया है।

ये दे रहे सन्देश
अनूठे कार्ड में इस निमंत्रण पत्र को री-यूज करने के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही सन्देश लिखा है कियह निमंत्रण मैरीगोल्ड सीड पेपर (गेंदे के फूल के बीज से बना कागज) से बना है। इस पेपर से पौधरोपण करके आप नवविवाहित जोड़े की ओर से इस मातृभूमि को कुछ वापस करने में मदद कर सकते हैं। वेडिंग इंविटेशन काड्र्स कॉन्सेप्ट की तरह ही ग्रीटिंग काड्र्स और कैलेंडर भी बनाए जा रहे हैं। हालांकि इन्हें बनवाने में ज्यादातर कॉर्पोरेट कम्पनिया ही दिलचस्पी दिखा रहीं हैं। इन काड्र्स और कैलेंडर्स को भी साल खत्म होने के बाद गमले में रोपकर पौधा उगाया जा सकता है।

बढ़ रही है डिमांड
पेपर मैन्यूफेक्चरिंग इंडस्ट्री से जुड़े मोहित सोलंकी ने बताया कि सीड पेपर इको-फ्रेंडली काड्र्स की ओर लोगों का रुझान बढऩे लगा है। अब इनकी डिमांड काफी बढ़ गई है। कॉर्पोरेट सेक्टर और एनआरआई ऐसे काड्र्स छपवाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

Anurag Trivedi
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned