शूटिंग पर सांप ने काटा, डॉक्टर्स ने हौसला दिया और तीन दिन बाद सेट पर लौट आया : योगेन्द्र सिंह परमार

टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहुंची फिल्म 'डुग डुग' में प्रमुख भूमिका में नजर आएंगे शहर के योगेन्द्र सिंह परमार

By: Anurag Trivedi

Updated: 30 Aug 2021, 10:52 PM IST

अनुराग त्रिवेदी जयपुर. टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टिफ) 2021 में पहुंची भारतीय फिल्म 'डुग डुग' में प्रमुख भूमिका में जयपुर शहर के युवा एक्टर योगेन्द्र सिंह परमार नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन शहर के ही रित्विक पारीक ने किया है। योगन्द्र ने बताया कि राजस्थानी परिवेश और भाषा की खूबसूरती के साथ देश—दुनिया की आॅडियंस को यह फिल्म पसंद आएगी। यह फिल्म पूरी तरह से राजस्थान में ही शूट हुई और अधिकांश कलाकार राजस्थान से ही है। ऐसे में टिफ में इसका सलेक्शन होना देशवासियों के साथ प्रत्येक राजस्थानी के लिए गर्व की बात है। इसमें मेरे साथ अल्ताफ हुसैन, गौरव सोनी, दुर्गालाल सैनी प्रमुख भूमिकाओं में है। हालही में टिफ की ओर से फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया, जिसके बाद मुझे देशभर से प्रशंसा मिल रही है।

पैर में सूजन, आंखों में आया धुंधलापन
योगेन्द्र ने बताया कि लगभग आधी फिल्म शूट होने के बाद जमवारामगढ के पास एक गांव में कुछ सीन फिल्माए जाने थे। पहाडी के पास चेयर पर बैठा था, अचानक लगा कि पैर में किसी ने काट लिया। मैंने इस पर ज्यादा रिएक्ट नहीं किया और शूटिंग में बिजी हो गया। कुछ समय बाद पैर में सूजन आ गई और दर्द भी बढने लगा। अगले दिन जब शूटिंग पर पहुंचा और सीन फिल्मा रहा था, तब आंखों में धुंधलापन आने लगा। यह देखने के बाद मैं भी घबरा गया और सीनियर एक्टर सर्वेश व्यास मुझे एसएमएस हॉस्पिटल ले आए। यहां डॉक्टर्स ने अपना ट्रीटमेंट शुरू किया और कुछ देर बाद आकर कहा कि इन्हें तो सांप ने काटा है। हम थोडा डर गए, लेकिन डॉक्टर्स् ने ठीक करने का पूरा विश्वास दिला दिया। तीन दिन बाद मैंने फिर शूटिंग जॉइन कर ली। यह एक डरवाना लेकिन यादगार किस्सा रहा है।

रित्विक की वर्किंग स्टाइल ने किया इम्प्रेस

योगेन्द्र ने बताया कि डायरेक्टर रित्विक पारीक ने इस फिल्म को पूरे दिल से बनाया है और रिसर्च वर्क के साथ अपने विजन से फिल्म को यादगार बनाया है। जब तक रित्विक को सीन अच्छे से नहीं मिलता था, वे उसे बेहतर बनाने में दिन—रात लग जाते थे। इसी अंदाज और वर्किंग स्टाइल के कारण उन्होंने मुझे इम्प्रेस किया है। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को बहुत पसंद आएगी और टिफ में भारत का नाम भी रोश करेगी।

जेकेके में पता चली एक्टिंग की ताकत

एजुकेशन की प्लानिंग के लिए जयपुर आए था, लेकिन पढाई में ज्यादा रुझान नहीं था। फिल्मों के प्रति बचपन से एक झुकाव था, ऐसे में एक्टिंग करने की इच्छा थी, लेकिन उस वक्त यह मालूम नहीं था कि एक्टिंग भी सीखी जाती है। ऐसे में जानकारी लेकर जवाहर कला केन्द्र पहुंचा। यहां नाटय निर्देशक साबिर खान की वर्कशॉप में जॉइन हो गया। वर्कशॉप के दौरान एनएसडी के दौलत वैद के निर्देशन में नाटक 'महानिर्वाण' में छोटी सी भूमिका निभाई। यहां से एक्टिंग की ताकत और इसके महत्व के बारे में पता चला। मैं मंच पर था और सैंकडों लोग आॅडिटोरियम में तालियां बजा रह थे। इसके बाद नाटकों का सिलसिला चल पडा, तीन साल छोटे—छोटे किरदारों को मंच पर उतारता रहा। फिर नाटय गुरु भारत रत्न भार्गव के नाटयकुलम को जॉइन किया और एक साल का भारतीय रंगमंच पर डिप्लोमा किया। डिप्लोमा के समापन पर टैगोर का लिखा नाटक 'विसर्जन' में लीड कैरेक्टर करने का मौका मिला और लोगों से जमकर तारीफ मिली।


रंगमंच का साथ बना रहा

योगेन्द्र ने बताया कि 'विसर्जन' के बाद मुझे प्रमुख भूमिकाएं मिलने लग गई। इसके बाद संस्कृति मंत्रालय से स्कॉलरशिप अवॉर्ड हुई। संकेत जैन के नाटक 'वेटिंग फॉर गोडो' के पोजो, विशाल विजय के नाटक '12एंग्री मैन' के नम्बर तीन और 'उदृवस्त धर्मशाला' के काका और अभिषेक गोस्वामी के नाटक 'गगन दमामा बाज्यो' के सुखदेव के किरदारों ने जयपुर रंगमंच में पहचान मिली। इसके बाद नाटय निर्देशक के रूप में 'मेरी ताल','सही गलत को खेल' और 'एन एनिमी आॅफ द पीपुल' काम किया।


माजिद मजीदी के साथ पहला काम

योगेन्द्र सिंह परमार ने बताया कि आॅस्कर नॉमिनेड डायरेक्टर माजिद मजीदी की फिल्म 'बियॉन्ड द क्लाउडस' मेरी पहली फिल्म थी। इसमें मुख्य भूमिका में ईशान खटटर थे।

Anurag Trivedi Reporting
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