हास्य-व्यंग्य अंदाज में किरदारों ने कही कहानी

महाराणा प्रताप सभागार में नाटक का मंचन, राजेन्द्र सिंह पायल के निर्देशन में हुई प्रस्तुति

By: Anurag Trivedi

Published: 28 Feb 2020, 03:22 PM IST

जयपुर. भवन सुरुचि केन्द्र व साक्षी थिएटर गु्रप की ओर से महाराणा प्रताप सभागार में गुरुवार को नाटक 'गधे की बारात' का मंचन किया गया। हरिभाई वडगांवकर लिखित इस नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी राजेंद्र सिंह पायल ने किया। महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कीर्तन शैली में नाटक को पेश किया गया है। नाटक में दिखाया कि इंद्रसभा में रंभा का हाथ पकड़ लेने से कुपित इंद्र ने गंधर्व चित्रसेन को श्राप स्वरूप गधे बनाकर मृत्युलोक भेज दिया है। वह पुन: गंधर्व तभी बन सकता है जब वह राजा सत्य धर्मा की बेटी से विवाह करने में सफल होगा। बड़े ही रोचक घटनाक्रम से चित्रसेन पृथ्वी पर एक कुम्हार के घर में शरण लेता है।

राजा सत्याधर्मा की बेटी ने अपने विवाह के लिए एक शर्त रखी है, उसके अनुसार जो कोई भी गरीबों की बस्ती से राजमहल तक का पुल एक रात में बना देगा राजकुमारी उसी से विवाह करेगी। चित्रसेन ने अपनी अलौकिक शक्तियों से वह पुल बना दिया है, लेकिन अब समस्या यह है कि कोई भी लड़की गधे के गले में वरमाला कैसे डाले? इसके लिए उसका लौकिक पिता कल्लू कुम्हार अपनी जान दांव पर लगा देता है। इधर वरमाला होते ही चित्रसेन गधे से गंधर्व बन जाता है और अपने लौकिक माता-पिता को पहचानने से इंकार कर देता है। कल्लू कुम्हार इस बात से हतप्रभ है कि हमारा ही पुत्र जब राजा बन जाता है तो हम ही लोगों को पहचानने से इंकार कर देता है। कई समसामयिक घटनाओं व प्रसंगों से गुथे नाटक में रोचकता अंत तक बराबर बनी रहती है।
मंच पर कलाकार

नाटक में विनोद सोनी, लक्ष्मी सुराणा, अभिषेक चौधरी, चंद्र प्रताप सिंह, माधव शर्मा, अंकित शर्मा, धर्मेंद्र भारती, त्रिशा व राजेंद्र सिंह पायल ने प्रभावशाली अभिनय किया। प्रकाश व्यवस्था महेंद्र सैनी व अनिल चौधरी की रही, मेकअप रवि बांका और म्यूजिक मुकेश वर्मा सोनी ने दिया।

Anurag Trivedi Reporting
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