रवीन्द्र मंच के मैजिक ने बदली सोच, थिएटर से बनाई खुद की पहचान

वल्र्ड थिएटर डे
पहले नाटक से जुड़ी है खास यादें, एक्टर्स और थिएटर डायरेक्टर्स ने शेयर किए अनुभव

By: Anurag Trivedi

Published: 29 Mar 2020, 12:19 PM IST

जयपुर. रामनिवास बाग पर बनाया गया रवीन्द्र मंच जयपुर के हर किसी रंगकर्मियों की यादों से जुड़ा हुआ है। विश्व रंगमंच के दिवस के मौके पर शहर के रंगकर्मियों ने अपने पहले नाटक से जुड़े अनुभवों को साझा किया। आज शहर के कई कलाकार मुम्बई में अपनी विशेष पहचान रखते है, लेकिन उन्होंने थिएटर से कभी दूरी नहीं बनाई, क्योंकि रवीन्द्र मंच ने उनकी सोच को बदला है और थिएटर उनकी पहचान बना है।


पहले नाटक में थे जयपुर रंगमंच के श्रेष्ठ कलाकार

टीवी शो 'सीआइडीÓ फेम एक्टर और थिएटर डायरेक्टर नरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि स्कूल-कॉलेज में प्ले किया करता था। मेरे बड़े भाई थिएटर गु्रप चलाया करते थे, उस दौरान एनएसडी की पढ़ाई करते हुए भानुभारती छुट्टियों पर जयपुर आए थे। भाई के साथ उनसे मुलाकात हुई, फिर उनके साथ 'जस्मा ओढऩÓ नाटक किया। भानुभारती के इस प्ले में जयपुर रंगमंच के श्रेष्ठ एक्टर्स मौजूद थे, उनके साथ एक्टिंग करना मेरे लिए भी बहुत खास रहा है। यहां से शुरू हो सफर टीवी और फिल्मों तक पहुंचा, लेकिन खुशी इस बात की है कि १९७१ में थिएटर से जुड़ाव हुआ था, जो आज मुम्बई में रहते हुए भी कायम है।

कमिटमेंट सीखने को मिला

बॉलीवुड एक्टर रवि झांकल ने बताया कि मोनो एक्टिंग से शुरुआत हुई। इसके बाद वरिष्ठ रंगकर्मी वासुदेव भट्ट ने नाटक में जुडऩे के लिए प्रेरित किया। इसके बाद शशि शर्मा के साथ एक्टिंग की बेसिक बारीकियां सीखने की शुरुआत हुई। इनके साथ पहला नाटक बादल सरकार का लिखा 'मादा कैक्टसÓ किया। यह रवीन्द्र मंच पर हुआ था, जो टिकिटेड था। यहां से भानुभारती, एचपी सक्सेना जैसे रंगकर्मियों के साथ काम किया। यह जयपुर रंगमंच का गोल्डन टाइम था, वहां मुझे कमिटमेंट की अहमियत सीखने को मिली, जो आज तक फॉलो करता हूं।

टेक्सटाइल डिजाइनर से हुई थी शुरुआत

थिएटर डायरेक्टर रुचि भार्गव ने बताया कि थिएटर में आना बिलकुल एक्सीडेंटली रहा। मैंने टेक्सटाइल डिजाइन की पढ़ाई की और इससे जुड़ा काम भी करने लगी थी, लेकिन दोस्त के कहने पर ड्रामा डिपार्टमेंट में एडमिशन लिया। सोचा कि यहां से लाइट डिजाइन और सेट डिजाइन की नॉलेज मिलेगी, जो टेक्सटाइल डिजाइन में मददगार साबित हो सकती है। इसके बाद पहला नाटक चरण दास चोर का राजस्थानी रूपांतरण 'खाटिलो चोरÓ किया, इसे जयरुप जीवन ने निर्देशित किया था। यहां से फिर नाटकों की शुरुआत हुई और फिर इसे ही अपना लक्ष्य समझ लिया। आज थिएटर ही मेरी पहचान है।

बाल कलाकार से हुई शुरुआत

एनएसडी ग्रेजुएट और थिएटर डायरेक्टर विशाल विजय ने बताया कि मेरे पिता विजय माथुर रंगमंच से जुड़े हुए थे, उनके साथ रिहर्सल पर जाया करता था। जहां मुझे कुछ काम मिल जाता था। पहला नाटक 'जेठवा उजलीÓ किया, इस नाटक के लिए यूथ फेस्ट में श्रेष्ठ बाल कलाकार का अवॉर्ड भी मिला। एनएसडी जाने से पहले कई नाटकों में अभिनय किया। इसके बाद दिल्ली में यहुदी की लड़की नाटक खेला गया, जिसका निर्देशन हेमा सिंह ने किया। इसके जरिए भी काफी प्रशंसा मिली। पहला निर्देशन 'भूमि कन्या सीताÓ नाटक का किया और आज एक रंगकर्मी के रूप में ही लोग पहचान रखते हैं।

इरफान का इंटरव्यू पढ़कर एनएसडी कॉल किया

एक्टर अजीत सिंह पालावत ने बताया कि स्कूल के प्रिंसीपल महिपाल सिंह जादौन ने बच्चों को रवीन्द्र मंच पर नाटक देखने को भेजा, उस समय मैं ७वीं क्लास में था। जब पहली बार रवीन्द्र मंच पहुंचा तो वहां के माहौल ने मुझे अट्रेक्ट किया। जब ९वीं कक्षा में था, तब इरफान खान का इंटरव्यू न्यूजपेपर में पढ़ा था। इसके बाद मैंने एनएसडी में फोन कर पूछा था कि यहां एडमिशन कैसे लेते हैं, तब उन्होंने कहा था कि गे्रजुएशन करके आओ। कॉलेज के दौरान इप्टा के थिएटर कॉम्पीटिशन में मेरा लिखा नाटक 'चु चु नवाबÓ प्रस्तुत हुआ, इसमें मुझे बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। यहां से फिर थिएटर का सिलसिला शुरू हो गया और फिर एनएसडी और आज मुम्बई में फिल्म और थिएटर लगातार चल रहा है।

Anurag Trivedi Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned