सीएम योगी के इस फैसले से खफा टीचरों ने हड़ताल की दी धमकी

Vinod Nigam

Updated: 12 Sep 2019, 09:01:02 AM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। सरकारी स्कूलों में अधिक पारदर्शिता लाने के चलते सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के टीचरों के लिए पुराना नियम बदल दिया है। 30 सितंबर के बाद अब इन्हें स्कूल में प्रवेश के दौरान व छुट्टी में जाने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए सरकार एक प्रेरणा नाम का ऐप लेकर आई है, जो 1 अक्टूबर से कानपुर में जिले में शुरू हो जाएगा। जिसके कारण कानपुर के टीचर एक स्कूल में एकत्र हुए और इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताते हुए सरकार को हड़ताल में जाने की धमकी दे डाली।

प्रेरणा ऐप के जरिए निगरानी
प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने व टीचरों के लिए एक नया नियम लेकर आई है। जिसके तहत अब टीचरों को स्कूल में एंट्री के दौरान प्रेरणा ऐप में अपना अंगूठा लगाना होगा। जिस टीचर की इस एप में एंट्री नहीं दिखेगी उसका पूरा विवरण सरकार के पास पहुंच जाएगा और उसकी वेतन काट दी जाएगी। वहीं जब इसकी जानकारी टीचरों को हुई तो वह विरोध पर उतर आए। शिक्षक नेता सौरभ मिश्रा कहते हैं कि सरकार का ये कदम गलत है। सीएम योगी आदित्यनाथ को यदि कुछ करना है तो हम टीचरों को पोलियो, चुनाच सहित अन्य सरकारी कार्यो से पहले रोकें।

कुछ इस तरह से करना होगा कार्य
राज्य में सिंगल डे कैजुअल लीव (सीएल) के मामले में स्कूल स्टाफ को प्रेरणा ऐप के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन अपलोड होने के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को छुट्टी मंजूर करनी होगी। यदि बीईओ छुट्टी की मंजूरी नहीं देते हैं, तो यह छुट्टी स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि आकस्मिक अवकाश चार दिनों से अधिक है तो बीईओ की स्वीकृति आवश्यक है। एकल शिक्षक स्कूलों के शिक्षक जब अवकाश पर जाएंगे तो ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को अन्य शिक्षक की व्यवस्था करनी होगी। मेडिकल अवकाश के लिए इस ऐप में आवेदन के साथ चिकित्सा प्रमाणपत्र ऑनलाइन अपलोड करने का विकल्प होगा।

शिक्षकों ने शुरू किया विरोध
हलांकि प्रेरणा एप 30 सितम्बर के बाद से लागू किया जाएगा, लेकिन प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने अभी से इसका विरोध शुरू कर दिया है। कानपुर के बेनाझाबर में बने प्राथमिक स्कूल में जमा हुए शिक्षकों ने एक शुर में प्रेरणा एप का विरोध करते हुए कहा कि सरकार पहले प्राथमिक स्कूलों की व्यवस्था में सुधारे तो हमें इससे कोई आपत्ति नहीं होगी। शिक्षक सारिका कहती हैं, सरकार हम टीचरों के साथ भेदभाव कर रही है। हमें बच्चों को पढ़ाने से ज्यादा सरकारी कार्यो में उलझाए रखा जाता है। इस मामले को हम प्रदेश स्तर तक लेकर जाएंगे और इसका विरोध कर इसे लागू नहीं किए जाने को लेकर सीएम को ज्ञापन देंगे।

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