इस 15 अगस्त जानिए छत्तीसगढ़ के अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी पं. सुन्दरलाल शर्मा के बारे में कुछ खास बातें

इस 15 अगस्त जानिए छत्तीसगढ़ के अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी पं. सुन्दरलाल शर्मा के बारे में कुछ खास बातें

Pradeep Sahu | Publish: Aug, 15 2019 08:00:00 AM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

जानिए पंडित सुन्दर लाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ में कैसे जगाई स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला

रायपुर:भारत को स्वाधीनता दिलाने के लिए आजादी के यज्ञ में वैसे तो देश के हर हिस्से के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जान की आहुति दे दी थी।जिसमे छत्तीसगढ़ जो उस समय मध्यपरदेश का हिस्सा हुआ करता था। यहाँ के भी कई स्वतंत्रता सेनानियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था।इनमे से एक थे नाट्यकला, मूर्तिकला व चित्रकला के विद्वान पंडित सुंदरलाल शर्मा।

आजादी के असहयोग आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ से जेल जाने वाले व्यक्तियों में आप प्रमुख थे। जीवन-पर्यन्त सादा जीवन, उच्च विचार के आदर्श का पालन करते रहे। समाज सेवा में रत परिश्रम के कारण शरीर क्षीण हो गया और 28 दिसम्बर 1940 को आपका निधन हुआ। छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी स्मृति में साहित्य/आंचिलेक साहित्य के लिए पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान स्थापित किया है।

जानिए पं. सुन्दरलाल शर्मा के जीवन की की खास बातें इन 10 बिन्दुओं में

1. इनका जन्म रंजिम के चमसुर नामक गांव में विक्रम संवत 1938 की पौष कृष्ण अमावस्या अर्थात् 1881 ई० को हुआ था।

2. इनकी शिक्षा गांव के मिडिल स्कूल में हुई थी। इसके बाद की पढ़ाई घर पर ही हुई थी।

3.इनके पिता घर में बहुत-सी पत्रिकाएँ मगवाया करते थें, जैसे- "केसरी" (जिसके सम्पादक थे लोकमान्य तिलक) "मराठा"। पत्रिकाओं के माध्यम से सुन्दरलाल शर्मा की सोचने की क्षमता बढ़ी। किसी भी विचारधारा को वे अच्छी तरह परखने के बाद ही अपनाने लगे।

4. सन 1898 में उनकी कवितायें रसिक मित्र में प्रकाशित हुई। सुन्दरलाल न केवल कवि थे, बल्कि चित्रकार भी थे। चित्रकार होने के साथ-साथ वे मूर्तिकार भी थे। नाटक भी लिखते थे। रंगमंच में उनकी गहरी रुचि थी।

5. छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में व्याप्त रुढ़िवादिता, अंधविश्वास, अस्पृश्यता तथा कुरीतियों को दूर करने के लिए आपने अथक प्रयास किया
आपके हरिजनोद्धार कार्य की प्रशंसा महात्मा गांधी ने मुक्त कंठ से करते हुए, इस कार्य में आपको गुरु माना था।

6. 1920 में धमतरी के पास कंडेल नहर सत्याग्रह आपके नेतृत्व में सफल रहा। आपके प्रयासों से ही महात्मा गांधी 20 दिसम्बर 1920 को पहली बार रायपुर आए।

7. देश में 9वीं सदी के अंतिम चरण में राजनैतिक और सांस्कृतिक चेतना की लहरें उठ रही थीं। समाज सुधारकों, चिंतकों तथा देशभक्तों ने परिवर्तन के इस दौर में समाज को नयी सोच और दिशा दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

8. अपने जीवन में इन्होने कई रचनाएँ लिखी जिसमें दानलीला (खंडकाव्य), राजिम क्षेत्र महात्मय, श्री प्रहलाद चरित (नाटक), श्री ध्रुवचरित (नाटक) , करुणा पच्चीसी, विक्टोरिया वियोग, श्री रघुनाथ गुण कीर्तन, प्रताप पदावली, छत्तीसगढी रामलीला, सतनामी भजनमाला, मुख्य है।

9. 'असहयोग आन्दोलन' के दौरान पण्डित सुन्दरलाल शर्मा छत्तीसगढ़ से जेल जाने वाले व्यक्तियों में प्रमुख थे।

10. समाज सेवा में लगातार रहने और अत्यधिक परिश्रम के कारण शरीर क्षीण हो गया और 28 दिसम्बर, 1940 को इन्होनें अपना शरीर त्यागा।

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