वाराणसी. भारत के सुरक्षा परिदृश्य में अभी चीन और पाकिस्तान ही मुख्य चुनौतियों के रूप में सामने हैं। कश्मीर में आज हाईब्रीड वार की स्थिति है जिसमें राजनीतिक समाधान, युवाओं में विश्वास बहाली के उपाय और मजबूत सैन्य और सूचना तंत्र विकसित करने की जरूरत है। हमें मनोवैज्ञानिक लड़ाई में पाकिस्तान के ऊपर बढत लेनी होगी। हमें एक समग्र रणनीतिक एवं राष्ट्रीय रक्षा नीति की जरूरत है जिसमें नीति निर्माण प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार के तौर पर उच्च सैन्य अधिकारियों को भी शामिल किया जाए।

भारत में हमें अब बौद्धिक सैन्य अधिकारियों की जरूरत है जिनके पास अन्तर्विषयक ज्ञान हो। राष्ट्रीय सुरक्षा में लैंगिक एवं मानव सुरक्षा के तत्व अनिवार्य रूप से विद्यमान हैं। हमें एक मजबूत सैन्य- कारपोरेट औद्यौगिक तंत्र की जरूरत है जो हमारी सुरक्षा आवश्यकताओं की परिपूर्ति करे। भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है और हमें इसकी सुरक्षा के लिए मजबूत राजनीतिक तंत्र और आंतरिक आर्थिक सशक्तिकरण की जरूरत है। उपरोक्त बातें आज युनेस्को चेयर एवं मालवीय शांति अनुसंधान केन्द्र काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान 'भारत की राष्ट्रीय सुरक्षाः मुद्दे एवं चुनौतियां' में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कहीं। बता दें कि जनरल हसनैन कश्मीर के सुरक्षा वातावरण के रग-रग से वाकिफ हैं और कश्मीरी युवाओं में विश्वास बहाली और संवेदनशील सुरक्षा वातावरण के निर्माण के अग्रणी सूत्रधार रहे हैं। रणनीतिक एवं सैन्य विज्ञान में बौद्धिकता का समावेश करने वाले जनरल हसनैन कारगिल युद्ध के भी नायक रहे हैं।

 

सत्र की अध्यक्षता करते हुए समाज विज्ञान संकाय की पूर्व प्रमुख और अंतर्राष्ट्रीय मामलों की चिंतक प्रो. अंजू शरण उपाध्याय ने कहा कि भारत में मजबूत नागरिक-सैन्य संबंध है और इस तरह के संवाद से हमें भारतीय सेना के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलता है। इस कार्यक्रम में विद्वान वक्ता के सारगर्भित व्याख्यान के बाद गहन प्रश्न और उत्तर परिचर्चा हुई। अभ्यागत अतिथि का स्वागत युनेस्को चेयर प्रो. प्रियंकर उपाध्याय एवं समन्वयक, मालवीय शांति केन्द्र ने किया। उन्होंने अपने सार संक्षेप में कहा कि मानव सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक साथ जोड़े जाने की आवश्यकता है। एक सैनिक को शांति की सबसे अधिक तलाश होती है।

विषय प्रवेश कराते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव, (शिक्षण) मंयक नारायण सिंह जो कि खुद ही एक सुरक्षा और रणनीतिक चिंतक, विश्लेषक के रूप में उभर रहे हैं ने प्रमुख वक्ता का विस्तृत परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन अनीता डे ने किया और केन्द्र के सहआचार्य डॉ मनोज मिश्रा ने आभार जताया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रो. एम के सिंह, छात्र अधिष्ठाता, प्रो. आर आर झा, प्रो. मधुकर राय, प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी, प्रो. बृजेश सिन्हा, प्रो. संजय श्रीवास्तव, प्रो. अनुराग देव, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. मधु तपाड़ीया, प्रो. जे. आर राय मौजूद रहे।

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