पितृपक्ष 2018: यहां हर साल लगता है पितृपक्ष मेला, देशभर से हजारों की संख्या में आते है श्रृद्धालु

पितृपक्ष 2018: यहां हर साल लगता है पितृपक्ष मेला, देशभर से हजारों की संख्या में आते है श्रृद्धालु

Tanvi Sharma | Publish: Sep, 26 2018 05:15:10 PM (IST) तीर्थ यात्रा

पितृपक्ष 2018: यहां हर साल लगता है पितृपक्ष मेला, देशभर से हजारों की संख्या में आते है श्रृद्धालु

बोधगया धार्मिक और पवित्र तिर्थस्थल माना जाता है। बिहार में बोधगया तिर्थस्थल में देश ही नहीं बल्कि विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां कई लोग पितृपक्ष व श्राद्ध के दौरान पिंडदान करने आते हैं। गया जी में श्राद्धपक्ष यानी पितृपक्ष में मेला भी लगता है। जोकी इस वर्ष में लगने वाला मेला शुरू हो चुका है। यह मेला 17 दिन तक चलेगा। श्राद्धपक्ष में बोधगया में देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग पिंडदान करने आते हैं। यहां लोग अपने पितृरों का पिंडदान करते हैं जिससे उन्हें मोक्षधाम प्राप्त होता है। हिंदू धर्म के अनुसार माना जाता है की पितृपक्ष के दिनों में पितृ हमारे घर में रहते हैं और तर्पण के माध्यम से तृप्त होते हैं। पितृपक्ष आश्विन कृष्णपक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है और अमावस्या तक रहता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार पितरों के लिए श्रद्धा से श्राद्ध करना एक सर्वोत्तम कार्य माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार एक पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक माना जाता है, जब वह अपने जीवन काल में जीवित माता-पिता की सेवा करे और उनके मरणोपरांत उनकी मृत्यु तिथि पितृपक्ष में उनका विधिवत श्राद्ध करें।

 

bodhgaya

गयासुर के शरीर से बनी गया

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भस्मासुर के वंश में गयासुर नामक राक्षस ने कठिन तपस्या कर ब्रह्माजी से वरदान मांगा था कि उसका शरीर देवताओं की तरह पवित्र हो जाए और लोग उसके दर्शन मात्र से पाप मुक्त हो जाएं। इस वरदान के मिलने के बाद स्वर्ग में अधर्मियों की जनसंख्या बढ़ने लगी। इससे बचने के लिए देवताओं ने गयासुर से यज्ञ के लिए पवित्र स्थल की मांग की। गयासुर ने अपना शरीर देवताओं को यज्ञ के लिए दे दिया। यज्ञ के बाद गयासुर लेटा तो उसका शरीर पांच कोस में फैल गया। यही जगह आगे चलकर गया बनी। गयासुर ने देवताओं से वरदान मांगा कि यह स्थान लोगों को तारने वाला बना रहे।
जो भी लोग यहां पर किसी का तर्पण करने की इच्छा से पिंडदान करें, उन्हें मुक्ति मिले। यही कारण है कि आज भी लोग अपने पितरों को तारने के लिए पिंडदान के लिए गया आते हैं।

कहां कराएं पिंडदान पूजा

पिंडदान पूजा कराने के लिए यहां कई आश्रम हैं जैसे भारत सेवा आश्रम, बंगाली सेवा आश्रम आदि। यहां से आप पूजा करवा सकते इसके लिए आपको इन्हे पहले से बोलना होता है। इसके अलावा आप पूजा के लिए अपने होटल में भी पंडा बुक करने के लिए बोल सकते हैं।

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