नवरात्र में इन मंदिरों में करें देवी का दर्शन, माता भर देंगी झोली

नवरात्र में इन मंदिरों में करें देवी का दर्शन, माता भर देंगी झोली

Devendra Kashyap | Updated: 23 Sep 2019, 01:07:30 PM (IST) तीर्थ यात्रा

नवरात्र में मंदिरों में देवी मां का दर्शन करना बहुत ही खास माना जाता है।

29 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की उपासना की जाएगी। भारत में देवी दुर्गा के कई मंदिर हैं, जहां सालोभर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन नवरात्र में इन मंदिरों में देवी मां का दर्शन करना बहुत ही खास माना जाता है। माना जाता है कि इन मंदिरों में देवी मां के दर्शन और पूजन से विशेष फल मिलता है।

आज हम आपको माता रानी के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताएंगे, जिनके दर्शन मात्र से ही माता की कृपा से आपकी झोली भर जाएगी। आइये जानते हैं उन मंदिरों के बारे में...

Shardiya Navratri

मां वैष्णो देवी

मां वैष्णो का पावन दरबार जम्मू स्थित त्रिकुट पर्वत पर है। यहां पर माता वैष्णों देवी लक्ष्मी, सरस्वती और काली के साथ विराजमान हैं। मां वैष्णो देवी का दर्शन बड़ा ही पुण्यदायी माना जाता है।

मां पीतांबरा देवी

मध्यप्रदेश के दतिया जिले में मां पीतांबरा सिद्धपीठ है। इस सिद्धपीठ की स्थापान 1935 में स्वामी जी ने की थी। यहां मां के दर्शन छोटी से खिड़की से की जाती है। मां पीतांबरा देवी तीन पहर से अलग-अलग स्वरूप धारण करती है। मां के बदलते स्वरूप का राज आज तक किसी को पता नहीं चल सका। कहा जाता है कि पीले वस्त्र धारण करके, मां को पीले वस्त्र और पीला भोग अर्पण करने से हर मुराद पूरी होती है।

मां त्रिपुर सुंदरी

रहस्यमंयी मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर का निर्माण 400 साल पहले हुआ था। इस मंदिर का निर्माण तांत्रिक भवानी मिश्र ने किया था। बताया जाता है कि मध्य रात्रि में इस मंदिर परिसर में अवाजें आती हैं। मान्यता है कि यहां स्थित मां की प्रतिमाएं आपस में बात करती हैं। नवरात्र के दौरान यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है।

दुर्गा परमेश्वरी मंदिर

मंगलूरू स्थित दुर्गा परमेश्वरी मंदिर एक खास परंपरा के लिए जाना जाता है। अग्नि केलि नाम की परंपरा के अनुसार, यहां आने वाले भक्त एक दूसरे अंगारे फेंकते हैं। बताया जाता है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। नवरात्र के मौके पर यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है।

मां दंतेश्वरी मंदिर

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी मंदिर है। इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थाप पर मां सती का दांत गिरा था। इस स्थान पर सिले हुए कपड़ा पहनकर जाना मनाही है। नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों का तांता लगता है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर

कोलकाता में हुगली नदी के किनारे स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर श्रद्धा का केन्द्र है। यहां मां काली के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु साल आते-जाते रहते हैं लेकिन नवरात्र के दिनों में यहां पर देवी के दर्शन का विशेष लाभ माना गया है।

करणी माता मंदिर

राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर माता करणी मंदिर स्थित है। इस मंदिर को चूहों वाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु चूहों का जूठा किया हुआ प्रसाद खिलाया जाता है। माता करणी को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। नवरात्र में यहां भक्तों की खूब भीड़ लगती है।

श्रीसंगी कालिका मंदिर

श्रीसंगी कालिका मंदिर कर्नाटक के बेलगम में स्थित है। यहां पर काली स्वरूप की उपासना की जाती है। मान्यता है जो भी भक्त यहां दर्शन करने आता है, वह कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ लगती है।

नैना देवी मंदिर

नैना देवी का मंदिर नैनीताल में नैनी झील के किनारे स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि इस झील में देवी सती के नेत्र गिरे थे। इस मंदिर में दो नेत्र है, जो मां नैना देवी को दर्शाते हैं। नवरात्र के दिनों में नैना देवी के दर्शन के लिए लंबी लाइनें लगती हैं। कहा जाता है कि आज तक कोई भी नैना देवी के दर से खाली हाथ नहीं लौटा है।

श्री महालक्ष्मी मंदिर

श्री महालक्ष्मी मंदिर कोल्हापुर में स्थित है। इस मंदिर को प्रसिद्ध शक्तिपीठों में एक माना जाता है। इस मंदिर में भगवान विश्णु के साथ मां लक्ष्मी विराजमान हैं। इस मंदिर की खासियत ये है कि भगवान सूर्य साल में दो बार मां महालक्ष्मी के चरणों को छूकर पूजा करते हुए दिखाई देते हैं।

ज्वाला देवी

ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थापित है। यह मंदिर शक्तिपीठों में है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पर देवी सती जी जीभ गिरी थी। इस मंदिर में मां ज्योति के रूप में स्थापित हैं। यही वजह है कि इस मंदिर को ज्वाला देवी के मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में जलने वाली जोत के बारे में बताया जाता है यह सदियों से जल रहा है। इसे जलाने के लिए तेल या घी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned