यहां होती है योनि की पूजा, शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र है यह शक्तिपीठ

यहां होती है योनि की पूजा, शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र है यह शक्तिपीठ

Devendra Kashyap | Updated: 30 Sep 2019, 11:14:29 AM (IST) तीर्थ यात्रा

51 शक्तिपीठों में एक कामाख्या मंदिर तंत्र मंत्र विद्या और सिद्धि का प्रमुख केन्द्र माना जाता है।

51 शक्तिपीठों में एक कामाख्या मंदिर तंत्र मंत्र विद्या और सिद्धि का प्रमुख केन्द्र माना जाता है। कामाख्या मंदिर असम के नीलांचल पर्वत पर स्थित हैं। कामाख्या शक्तिपीठ सभी शक्तिपीठों में सर्वोत्तम माना जाता है।

kamakhya1.jpg

इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। बल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो कि हमेशा फूलों से ढका रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलते रहता है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है। यहां माता के योनि भाग होने के कारण वो रजस्वला भी होती हैं।

kamakhya123.jpg

मंदिर का नाम कामाख्या क्यों पड़ा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे। बताया जाता है कि जहां-जहां माता सती के शरीर के टुकड़े गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ बन गया। कहा जाता है कि कामाख्या में माता सती की योनि गिरी थी। यही कारण है कि यहां पर मां की योनि की पूजा की जाती है। वैसे तो यहां पर हर दिन भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बूवाची और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है।

kamakhya12.jpg

अजीबो गरीब प्रसाद

हर साल यहां अम्बूवाची मेला के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। कहा जाता है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के रजस्वला होने के कारण होता है। इसके तीन दिन बाद दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ मंदिर की ओर उमड़ पड़ती है। यहां आने वाले भक्तों को अजीबो गरीब प्रसाद दिया जाता है। कामाख्या देवी मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा दिया जाता है।

kamakhya1234.jpg

बताया जाता है कि जब मां को तीन दिन का रजस्वला होता है, तो सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर डाल दिया जाता है। तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वह वस्त्र माता के रज से लाल हो जाता है। इस कपड़े को अम्बूवाची वस्त्र कहते है। इसे ही भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned