इस मंदिर में सोना-चांदी, मिट्टी के घोड़े चढ़ाने से होती है हर मन्नत पूरी

इस मंदिर में सोना-चांदी, मिट्टी के घोड़े चढ़ाने से होती है हर मन्नत पूरी

Tanvi Sharma | Updated: 03 Oct 2019, 12:56:18 PM (IST) तीर्थ यात्रा

इस मंदिर में सोना-चांदी, मिट्टी के घोड़े चढ़ाने से होती है हर मन्नत पूरी

नवरात्रि में देवी मंदिरों, पंडालों व सभी शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। मां के दरबार में सभी माथा टेकने आते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिये प्रार्थना करते हैं।

 

नवरात्रि में सभी देवी मंदिरों के दरबार सज जाते हैं और सभी की रौनक दोगुनी हो जाती है। वहीं यदि शक्तिपीठों की बात की जाए तो वहां की महीमा तो अपरंपार है। सभी शक्तिपीठों में मां अंम्बे के भक्त दर्शन के लिये पहुंचते हैं। ऐसा ही एक शक्तिपीठ हिरयाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है। आइए जानते हैं इस शक्तिपीठ के बारे में...

 

bhadrakali mandir in haryana

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित भद्रकाली का परमशक्ति पीठधाम है। 52 शक्तिपीठों में से एक श्रीदेवी कूप भद्रकाली मंदिर का विशेष महत्व है। इस महाशक्तिपीठ में नवरात्रि के दौरान विशेष उत्सव मनाया जाता है। कहा जाता है कि शक्तिपीठों में माता सती का निवास रहता है। क्योंकि यहां माता सती के अंग गिरे थे। इसलिये इन जगहों पर शक्तियों का संचार रहता है।

 

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यहां गिरा था मां के बाएं पैर का टकना

भद्रकाली शक्तिपीठ में देवी सती का दांए पैर का टखना यानी घुटने के नीचे का भाग गिरा था। सती का दायें टखना इस मंदिर में बने कुएं में गिरा था, इसलिए इसे मंदिर को श्री देवीकूप मंदिर भी कहा जाता है। यह स्थान थानेसर में है। यहां देवी काली की प्रतिमा स्थापित है और मंदिर में प्रेवश करते ही एक कमल का फूल बना है, जिसमें मां सती के दाएं पैर का टकना स्थापित है। मां सती का टकना सफेद संगमरमर से बना बहुत ही आकर्षक रुप से बना है।

 

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मंदिर में चढ़ाए जाते हैं चांदी-सोने व मिट्टी के घोड़े

यूं तो भद्रकाली शक्तिपीठ का अपना अलग महत्व है। भद्रकाली शक्तिपीठ में श्रीकृष्ण और बलराम का मुंडन हुआ था। जिससे इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि यहां महाभारत काल में श्रीकृष्ण पांडवों के साथ भद्रकाली मंदिर में आए थे। उन्होंने विजय के लिए मां से मन्नत मांगी थी। युद्ध में विजय हासिल करने के बाद पांडवों ने मंदिर में आकर घोड़े दान किये थे, तब से यही प्रथा चलती आ रही है। तब से यहां घोड़े चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। कुछ लोग यहां चांदी-सोने के घोड़े चढ़ाते हैं, तो कुछ लोग मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं।

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