आज है पुनवर्सु नक्षत्र, भूल कर भी न करें ये काम, हो जाएंगे बर्बाद

Sunil Sharma

Publish: Sep, 15 2017 09:37:50 (IST)

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आज है पुनवर्सु नक्षत्र, भूल कर भी न करें ये काम, हो जाएंगे बर्बाद

दशमी पूर्णा संज्ञक तिथि सायं ६.३० तक, इसके बाद एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि प्रारंभ हो जाएगी

दशमी पूर्णा संज्ञक तिथि सायं ६.३० तक, इसके बाद एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि प्रारंभ हो जाएगी। यदि समय शुद्ध हो तो दशमी व एकादशी तिथियों में सभी धार्मिक, पौष्टिक, विवाहादि मांगलिक कार्य, वास्तु, प्रतिष्ठा, यात्रा व यज्ञोपवीत आदि विषयक कार्य शुभ होते हैं।

नक्षत्र: पुनर्वसु ‘चर व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र रात्रि २.१६ तक, तदुपरान्त पुष्य ‘क्षिप्र व ऊध्र्वमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। पुनर्वसु नक्षत्र में शांति, पुष्टता, यात्रा, अलंकार, कृषि और विद्यादि कार्य करने योग्य हैं।

योग: वरियान नामक नैसर्गिक शुभ योग रात्रि १०.२४ तक, तदन्तर परिघ नामक नैसर्गिक अशुभ योग है। परिघ योग की पूर्वाद्र्ध घटियां शुभ कार्यों में वर्जित हैं। विशिष्ट योग: कुमार योग नामक शुभ योग व सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से रात्रि २.१६ तक है। करण: वणिज नामकरण प्रात: ७.३३ तक, इसके बाद सायं ६.३० तक भद्रा संज्ञक विष्टि नामकरण है, तदुपरान्त बवादि करण प्रारंभ हो जाएंगे।

शुभ विक्रम संवत् : 207४
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 193९
हिजरी संवत् : 143८, मु.मास: जिलहिज-२३
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : शरद्
मास : आश्विन।
पक्ष : कृष्ण।

शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार भद्रा पूर्व पुनर्वसु नक्षत्र में यथाआवश्यक अन्नप्राशन व हलप्रवहण आदि के शुभ मुहूर्त हैं।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: सूर्योदय से पूर्वाह्न १०.५१ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत, दोपहर १२.२२ से दोपहर बाद १.५४ तक शुभ तथा सायं ४.५७ से सूर्यास्त तक चर के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर ११.५७ से दोपहर १२.४६ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारंभ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज दशमी का श्राद्ध, इंजीनियर्स दिवस व गुरुनानक देव पुण्य दिवस (प्रा. मत से) है। चन्द्रमा: चन्द्रमा रात्रि ८.३६ तक मिथुन राशि में, इसके बाद कर्क राशि में प्रवेश करेगा। ग्रह राशि-नक्षत्र परिवर्तन: प्रात: १०.३१ पर शुक्र मघा नक्षत्र व सिंह राशि में प्रवेश करेगा। दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। पर आज रात्रि ८.३६ तक मिथुन राशि के चन्द्रमा का वास पश्चिम दिशा की यात्रा में सम्मुख होगा। यात्रा में सम्मुख चन्द्रमा धन लाभ कराने वाला व शुभ माना गया है। राहुकाल: प्रात: १०.३० से दोपहर १२.०० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (को, ह, ही, हु, हे) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। रात्रि ८.३६ तक जन्मे जातकों की राशि मिथुन व इसके बाद जन्मे जातकों की राशि कर्क है। इनके जन्म का पाया रजत है। सामान्यत: ये जातक पवित्र, भाग्यवान, चंचलचित्त, बुद्धिमान, धर्म कार्यों के ज्ञाता, शीतल स्वभाव, काव्यप्रेमी, मातृ-पितृ भक्त और आनंदमय जीवन जीने वाले होते हैं। इनका भाग्योदय लगभग २४ वर्ष की आयु के बाद होता है। मिथुन राशि वाले जातकों का आज का दिन धार्मिक कार्यों में और आमोद-प्रमोद में गुजरेगा।

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