scriptaanganavaadiyon mein bachche nahin pahunchate, haajiree shat-pratishat | आंगनवाडिय़ों में बच्चे नहीं पहुंचते, हाजिरी शत-प्रतिशत | Patrika News

आंगनवाडिय़ों में बच्चे नहीं पहुंचते, हाजिरी शत-प्रतिशत

आंगनवाड़ीयो में ताले लगे

पीथमपुर

Published: April 01, 2022 06:39:49 pm

देपालपुर. प्रदेश सरकार लाख प्रयास कर ले की छोटे-छोटे ननिहाल बच्चे ज्यादा से ज्यादा आंगनवाड़ी जाए शासन द्वारा दी जा रही पौस्टिक राशन का उपयोग करें। वह समय-समय पर बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ प्रोटीन युक्त भोजन मिले ताकि कोई बच्चा कुपोषण का शिकार ना हो। लेकिन देपालपुर तथा बेटमा क्षेत्र की अधिकतर गांव में आंगनवाडिय़ों में बच्चे जाते ना हो पर उपस्थिति शत-प्रतिशत लगती है। कई जगह तो आंगनवाड़ीया खुलती नहीं और जहां आंगनवाड़ी खुली हैं वहां बच्चे जाते नहीं। जबकि देपालपुर तहसील मुख्यालय पर दो परियोजना कार्यालय कार्यरत हैं। एक परियोजना में नगर तथा गौतमपुरा क्षेत्र तथा दूसरी परियोजना में बेटमा व ग्रामीण क्षेत्र आते हैं। इन दोनों परियोजना के दफ्तर देपालपुर में जब भी मीटिंग होती है तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ को करीब 30 से40 किलोमीटर की दूरी तय कर देपालपुर आना पड़ता है। जबकि एक परियोजना का दफ्तर बेटमा में होना चाहिए। परियोजना के दफ्तर दूर होने के चलते कई क्षेत्रों में तो परियोजना अधिकारी तो जाते ही नहीं होंगे। सबसे ज्यादा आंगनवाडिय़ों के बुरे हाल नगर हो या नदी किनारे के ग्रामीण क्षेत्र के गांव वहां बच्चों की संख्या बहुत कम देखने को मिलती है। जबकि हकीकत आंगनवाड़ी में जाकर देखा जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। पत्रिका प्रतिनिधि ने ग्रामीण क्षेत्र की कई आंगनबाडिय़ों में जाकर देखा तो कही आंगनवाडिय़ां खुली थी तो बच्चे नदारद थे और कई जगह आंगनवाड़ीयो में ताले लगे थे।
आंगनवाड़ी खुलने का समय सुबह 9 बजे का है लेकिन 110 बजे तक भी आंगनवाड़ी खुलती नहीं है। पूर्व मेंं आंगनवाड़ी में काफ ी बच्चे जाते थे लेकिन अब बच्चे नाम मात्र के रह गए हैं। आंगनवाडिय़ों में सिर्फ मंगलवार के दिन खीर पूरी बनती है तो कुछ बच्चे पहुंचते हैं। जबकि आंगनवाड़ी में नाश्ता और भोजन दोनों देने का प्रावधान है, लेकिन कई आंगनवाड़ी में नाश्ता मिल गया तो भोजन नहीं और भोजन मिल गया तो नाश्ता नहीं और कई बार तो दोनों चीज भी नहीं बनती है ना पहुंचती है। क्योंकि आंगनवाड़ी खुलती नहीं और खोली तो बच्चे नहीं लेकिन भोजन बनाने वाले स्व सहायता समूह पर्याप्त मात्रा में बच्चों की उपस्थिति दिखा देते हैं। आंगनवाडिय़ों में बेटमा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हालात ठीक नही है।
आंगनवाडिय़ों में बच्चे नहीं पहुंचते, हाजिरी शत-प्रतिशत
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