कर्नाटक: येदियुरप्‍पा सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी 10 अहम बातें

Dhirendra Mishra

Publish: May, 18 2018 01:35:46 PM (IST)

Political
कर्नाटक: येदियुरप्‍पा सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी 10 अहम बातें

सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने कर्नाटक की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा और विरोधी के लिए करो या मरो की नौबत।

नई दिल्ली। कर्नाटक में भाजपा बनाम कांग्रेस-जेडीएस के बीच सत्ता का संग्राम टी-20 मैच की तरह रोमांचक दौर में पहुंच गया है। सीएम के रूप में येदियुरप्‍पा के शपथ ग्रहण को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। आज इस बात को लेकर जस्टिस सीकरी की पीठ के समक्ष दोनों पक्षों के वकील ने अपना-अपना पक्ष रखा। इस दौरान बहुत तीखी बहस हुई। बहस के बाद सीकरी की पीठ ने अपना फैसला सुना दिया। इस दौरान अदालत में क्‍या-क्‍या हुआ 10 बिंदुओं में जानिए सारी बातें।

1. कर्नाटक के सीएम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत से सोमवार तक का वक्त बहुमत साबित करने के लिए मांगा था जिसे पीठ ने खारिज कर दिया। इसके बदले पीठ ने कल फ्लोर टेस्‍ट कराने का आदेश सुना दिया।

2. सीकरी ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा शनिवार चार बजे तक सदन में बहुमत साबित करें। फ्लोर टेस्‍ट से पहले सभी विधायकों को शपथ भी दिलाई जाए।

3. शीर्ष अदालत ने फ्लोर टेस्‍ट के दौरान बीएस येदियुरप्‍पा के अनुरोध को भी ठुकरा दिया। अदालत का यह आदेश भाजपा के लिए सबसे बड़ा झटका है।

4. कोर्ट के फैसले के बाद येदियुरप्‍पा ने कहा हमारी सरकार फ्लोर टेस्‍ट के दौरान बहुमत साबित कर देगी। उनके वकील मुकुल रोहतगी ने भी अदालत में बहस के दौरान इस बात का दावा किया था।

5. कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की ओर से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने शीर्ष कोर्ट में कहा कि शक्ति परीक्षण के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कल तक का समय पर्याप्‍त नहीं है।

6. जस्टिस एके सीकरी की पीठ ने येदियुरप्पा से कहा कि वह बहुमत साबित होने तक कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे। न ही इस दौरान वे एंग्लो इंडियन समुदाय के एक व्‍यक्ति को विधायक नामित करेंगे।

7. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्यपाल को दी गई भाजपा की चिट्ठी का अवलोकन किया। इसमें सिर्फ 104 विधायकों के नाम थे। वहीं कांग्रेस ने 116 विधायकों के हस्ताक्षर थे। येदियुरप्पा के वकील रोहतगी ने कांग्रेस के हस्ताक्षर वाले दावे पर सवाल उठाए।

8. जस्टिस सीकरी की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता तथा वकील जेठमलानी की याचिका पर कहा कि राज्‍यपाल के विवेकाधिकार के मुद्दे पर बाद में फैसला लेंगे। कोर्ट ने कहा राज्‍यपाल एक सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है और उनके विवेकअधिकार का मुद्दा न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएगा। इस पर सुनवाई दस हफ्ते बाद होगी।

9. पहले विधानसभा का अस्थायी अध्यक्ष (प्रो-टेम स्पीकर) नियुक्त किया जाएगा। विश्वास मत की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी नहीं कराई जाएगी। वीडियोग्राफी की मांग कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से की थी।

10. सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी राज्य के डीजीपी की तय किया है। डीजीपी को जारी आदेश में कहा गया है कि हर हाल में विधायों को सुरक्षा प्रदान की जाए।

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